कौन हैं 'हाइफा के हीरो' मेजर दलपत सिंह, जिनका पीएम मोदी ने इजरायल में किया गर्व से जिक्र

प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायली संसद में प्रथम विश्व युद्ध के महानायक मेजर दलपत सिंह शेखावत को याद किया, जिन्होंने 1918 में अपने अदम्य साहस से हाइफा शहर को दुश्मनों से आजाद कराया था.

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  • मेजर दलपत सिंह, राजस्थान के पाली जिले के देवली गांव के रहने वाले थे और ब्रिटिश भारतीय सेना में मेजर पद पर थे
  • प्रथम विश्व युद्ध के दौरान मेजर दलपत सिंह ने 1918 में हाइफा शहर को तुर्क और जर्मन सेनाओं से मुक्त कराया था
  • जोधपुर लांसर्स के नेतृत्व में भारतीय सैनिकों ने तलवार और भालों से युद्ध में विजय प्राप्त की
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 फरवरी 2026 को इजरायल की संसद 'नेसेट' (Knesset) में दिए अपने ऐतिहासिक संबोधन में राजस्थान के वीर सपूत मेजर दलपत सिंह शेखावत का गर्व से उल्लेख किया. दलपत सिंह ब्रिटिश भारतीय सेना के अधिकारी थे. पीएम मोदी ने उन्हें भारत-इजरायल के साझा इतिहास और बलिदान का प्रतीक बताया. उन्होंने कहा कि विश्व युद्ध के दौरान हजारों भारतीयों ने इस इलाके में अपनी जान कुर्बान की थी. इनमें हमारे मेजर ठाकुर दलपत सिंह हाइफा के हीरो थे.मेजर दलपत सिंह को 'हाइफा का नायक' माना जाता है. उन्होंने इजरायल के हाइफा शहर को आजाद कराने में बड़ी भूमिका निभाई थी. आखिर भारत का ये वीर कौन था, जिसे इजरायल में हीरो माना जाता है? आइए बताते हैं.

कौन थे मेजर दलपत सिंह?

मेजर दलपत सिंह राजस्थान के पाली जिले के छोटे से गांव देवली के रहने वाले थे. उनका जन्म 26 जनवरी 1892 को हुआ था. वो रावणा राजपूत शेखावत परिवार से संबंधित थे. उन दिनों भारत पर अंग्रेजों का शासन था. दलपत सिंह जोधपुर के महाराजा की सेना में मेजर थे. इसके बाद साल 1910 में वो ब्रिटिश भारतीय सेना में शामिल हो गए. ब्रिटिश आर्मी में भी वो मेजर के पद पर रहे.

इजरायल के हाइफा शहर को कराया आजाद

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान मेजर दलपत सिंह ब्रिटिश भारतीय सेना की ओर से अपनी टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे थे. 23 सितंबर 1918 को मेजर दलपत सिंह के नेतृत्व में उनकी सैन्य टुकड़ी ने इजरायल के रणनीतिक बंदरगाह शहर हाइफा को तुर्क और जर्मन सेनाओं के कब्जे से मुक्त कराया था. उनकी टुकड़ी में जोधपुर की सेना 'जोधपुर लांयस' के सैनिक थे, जो अपने अदम्य साहस के लिए जाने जाते थे. भारतीय सैनिकों ने आधुनिक तोपों और मशीनगनों का सामना केवल तलवारों और भालों के दम पर किया. यह युद्ध इतिहास के अंतिम सफल घुड़सवार हमलों में से एक माना जाता है. उन्होंने वीरता दिखाते हुए हाइपा शहर को आजाद करा लिया. लेकिन महज 26 साल की उम्र में इस युद्ध का नेतृत्व करते हुए उन्होंने वीरगति प्राप्त की. आज भी भारतीय सेना हर साल 23 सितंबर को 'हाइफा दिवस' मनाती है. इजरायल के स्कूलों में भी उनकी वीरता की कहानी पढ़ाई जाती है.

पीएम मोदी ने इजरायल की संसद से किया याद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल की संसद से वीर मेजर दलपत सिंह को गर्व से याद किया. पीएम मोदी ने उन्हें भारत और इजरायल के बीच 'खून और बलिदान से लिखे गए' गहरे संबंधों का प्रतीक बताया. उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान सितंबर 1918 में हुए 'हाइफा के घुड़सवार युद्ध' का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि कैसे मेजर दलपत सिंह के नेतृत्व में भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस दिखाते हुए इस शहर को आजादी दिलाई. पीएम ने जोर देकर कहा कि इस भूमि (इजरायल) के साथ भारत का संबंध केवल कूटनीतिक नहीं है, बल्कि यह रिश्ता प्रथम विश्व युद्ध में अपने प्राणों की आहुति देने वाले 4,000 से ज्यादा भारतीय सैनिकों के खून से सींचा गया है.

दिल्ली की तीन मूर्ति चौक से कनेक्शन

दिल्ली के तीन मूर्ति चौक से भी मेजर दलपत सिंह का कनेक्शन है. यहां जो तीन मूर्ति हैं उनमें से एक जोधपुर लांसर्स की हैं, जिसका नेतृत्व मेजर दलपत सिंह कर रहे थे. जोधपुर लांसर्स के अलावा यहां मैसूर लांसर्स और हैदराबाद लांसर्स के सैनिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले सैनिकों की प्रतिमाएं हैं. पीएम मोदी ने इजरायल में दिल्ली के 'तीन मूर्ति चौक' का नाम बदलकर 'तीन मूर्ति हाइफा चौक'करने का भी जिक्र किया. उन्होंने इजरायल द्वारा इन भारतीय सैनिकों के सम्मान को बनाए रखने की सराहना भी की.

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