नारी शक्ति से माफी, विपक्ष पर निशाना... महिला आरक्षण पर PM मोदी की हुंकार- हम हारे नहीं, हमारा हौसला बुलंद है

PM मोदी ने करीब 29 मिनट 21 सेकेंड के अपने इस संबोधन में देश की महिलाओं से माफी मांगी, विपक्ष का निशाना साधा और अंत में यह हुंकार भी भरा कि हम हारे नहीं है. हमारे पास आगे भी मौके आएंगे. हमें आधी आबादी के सपनों के लिए, देश के भविष्य के लिए इस संकल्प को पूरा करना ही है. 

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महिला आरक्षण बिल पर राष्ट्र को संबोधित करते पीएम मोदी.
नई दिल्ली:

PM Modi Address To Nation: लोकसभा में महिला आरक्षण बिल से जुड़ा अहम संविधान संशोधन विधेयक पास नहीं हो सका. शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में इस पर अपनी बातें रखी. पीएम मोदी ने करीब 29 मिनट 21 सेकेंड के अपने इस संबोधन में देश की महिलाओं से माफी मांगी, विपक्ष का निशाना साधा और अंत में यह हुंकार भी भरा कि हम हारे नहीं है. हमारे पास आगे भी मौके आएंगे. हमें आधी आबादी के सपनों के लिए, देश के भविष्य के लिए इस संकल्प को पूरा करना ही है. 

पढ़ें- महिला आरक्षण बिल पर पीएम मोदी का राष्ट्र के नाम दिया संबोधन

पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा, "देश की माताओं, बहनों और बेटियों से बात करने के लिए आया हूं. आज भारत का हर नागरिक देख रहा है कि कैसे भारत की नारी शक्ति की उड़ान को रोक दिया गया. उनके सपनों को बेरहमी से कुचल दिया गया. हमारे भरसक प्रयास के बावजूद हम सफल नहीं हो पाए. नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन नहीं हो पाया. और मैं इसके लिए सभी माताओं, बहनों से क्षमा प्रार्थी हूं."

पीएम मोदी ने आगे कहा- हमारे लिए देश हित सर्वोपरि है. लेकिन जब कुछ लोगों के लिए दल हित सब कुछ हो जाता है, दल हित देश हित से बड़ा हो जाता है, तो नारी शक्ति को इसका खामियाजा उठाना पड़ता है. इस बार भी यही हुआ है. कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और समाजवादी पार्टी जैसे दलों की स्वार्थी राजनीति का नुकसान देश की नारी शक्ति को उठाना पड़ा है.

'टेबल पर थाप नहीं नारी के स्वाभिमान पर प्रहार'

पीएम मोदी ने कहा- कल देश की करोड़ों महिलाओं की नजर संसद पर थी. देश की नारी शक्ति देख रही थी. मुझे भी ये देखकर बहुत दुख हुआ कि जब ये नारी हित का प्रस्ताव गिरा तो कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी, सपा जैसी परिवारवादी पार्टियां खुशी से तालियां बजा रही थीं. महिलाओं से उनके अधिकार छीनकर यह लोग मेजे थपथपा रहे थे. उन्होंने जो किया वह केवल टेबल पर थाप नहीं थी. वह नारी के स्वाभिमान पर प्रहार था.

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नारी अपना अपमान कभी नहीं भूलती...

पीएम ने आगे कहा- नारी सब भूल जाती है. अपना अपमान कभी नहीं भूलती. इसलिए संसद में कांग्रेस और उसके सहयोगियों के उस व्यवहार की कसक हर नारी के मन में हमेशा रहेगी. देश की नारी जब भी अपने क्षेत्र में इन नेताओं को देखेगी, तो वो याद करेगी कि इन्हीं लोगों ने संसद में महिला आरक्षण को रोकने का जश्न मनाया था. नारी नजर रख रही है, वो उनकी मंशा भांप रही है और सच्चाई भी भली भांति जान चुकी है. इसलिए महिला आरक्षण का विरोध करके जो पाप विपक्ष ने किया है, इसकी उन्हें सजा जरूर मिलेगी.

विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा, "इन दलों ने संविधान निर्माताओं की भावनाओं का भी अपमान किया है. और जनता द्वारा इसकी सजा से भी वह बच नहीं पाएंगे. सदन में नारी शक्ति वंदन संशोधन किसी से कुछ छीनने का नहीं था. यह हर किसी को कुछ न कुछ देने का था. यह 40 साल से लटके हुए नारी के हक को 2029 के अगले लोकसभा चुनाव से पहले देने का संशोधन था."

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नारी शक्ति वंदन संशोधन 21वीं सदी के भारत की नारी को नए अवसर देने, नई उड़ान देने, उसके सामने से बाधाएं हटाने का महायज्ञ था. देश की 50% यानी आधी आबादी को उसका अधिकार देने का साफ नियत के साथ, ईमानदारी के साथ किया गया एक पवित्र प्रयास था. नारी को भारत की विकास यात्रा में सहयात्री बनाने और सबको जोड़ने का प्रयास था.

पीएम मोदी ने कहा, नारी शक्ति वंदन संशोधन समय की मांग है. उत्तर, दक्षिण, पूरब, पश्चिम.. सभी राज्यों की शक्ति में समान वृद्धि का प्रयास था. राज्य छोटा हो या बड़ा, आबादी कम हो या ज्यादा — सबकी समान अनुपात में शक्ति बढ़ाने की कोशिश थी.

पीएम मोदी ने अपनी बात आगे रखते हुए कहा, लेकिन इस ईमानदार प्रयास की कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने सदन में पूरे देश के सामने भ्रूण हत्या कर दी है. यह कांग्रेस, टीएमसी, समाजवादी पार्टी, डीएमके जैसे दल इस भ्रूण हत्या के गुनहगार हैं. यह देश के अपराधी हैं. यह देश की नारी शक्ति के अपराधी हैं.

कांग्रेस महिला आरक्षण के विषय से ही नफरत करती है. उसने हमेशा से ही महिला आरक्षण को रोकने के लिए षड्यंत्र किए हैं. इतनी बार प्रयास हुए, हर बार कांग्रेस ने इसमें रोड़े अटकाए हैं. इस बार भी कांग्रेस और उसके साथियों ने महिला आरक्षण को रोकने के लिए एक के बाद एक नए झूठ का सहारा लिया. कभी संख्या को लेकर, कभी किसी और तरीके से कांग्रेस और उसके साथियों ने देश को गुमराह करने की कोशिश की. ऐसा करके इन दलों ने भारत की नारी शक्ति के सामने अपना असली चेहरा सामने ला दिया है. अपना मुखौटा उतार दिया है.

मुझे व्यक्तिगत तौर पर आशा थी कि कांग्रेस अपनी दशकों पुरानी गलती सुधारेगी. कांग्रेस अपने पापों का प्रायश्चित करेगी. लेकिन कांग्रेस ने इतिहास रचने का, महिलाओं के पक्ष में खड़े होने का अवसर खो दिया.

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कांग्रेस खुद देश के अधिकांश हिस्सों में अपना वजूद खो चुकी है. कांग्रेस परजीवी की तरह क्षेत्रीय दलों की पीठ पर सवार होकर खुद को जिंदा रखे हुए है. लेकिन कांग्रेस ये भी नहीं चाहती कि क्षेत्रीय दलों की ताकत बढ़े. इसलिए कांग्रेस ने इस संशोधन का विरोध करवाकर अनेक क्षेत्रीय दलों के भविष्य को अंधकार में धकेलने का राजनीतिक षड्यंत्र किया है.


कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, टीएमसी और दूसरी पार्टियां इतने वर्षों से हर बार वही बहाने, वही कुतर्क गढ़ते आए हैं. कोई न कोई टेक्निकल पेंच फंसाकर ये महिलाओं के अधिकारों पर डाका डालते रहे हैं. देश राजनीति का यह भद्दा पैटर्न और इसके पीछे की वजह भी जान चुका है.

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नारी शक्ति वंदन अधिनियम के विरोध की एक बड़ी वजह है इन परिवारवादी पार्टियों का डर. इन्हें डर है कि अगर महिलाएं सशक्त हो गईं तो इन परिवारवादी पार्टियों का नेतृत्व खतरे में पड़ जाएगा. ये कभी नहीं चाहेंगे कि उनके परिवार के बाहर की महिलाएं आगे बढ़ें. आज पंचायतों में, लोकल बॉडीज में जिन हजारों-लाखों महिलाओं ने अपनी क्षमता को साबित किया है — जब वे आगे बढ़कर लोकसभा और विधानसभाओं में आना चाहती हैं.

परिवारवादियों के भीतर महिलाओं से असुरक्षा की भावना बैठी हुई है. परिसीमन के बाद महिलाओं के लिए कहीं ज्यादा सीटें होंगी, महिलाओं का कद बढ़ेगा — इसलिए इन लोगों ने नारी शक्ति वंदन संशोधन का विरोध किया है. देश की नारी शक्ति कांग्रेस और उसके सहयोगियों को इस पाप के लिए कभी माफ नहीं करेगी.

कांग्रेस और उसके साथी दल डीलिमिटेशन पर लगातार झूठ बोल रहे हैं. ये विभाजन की आग को सुलगाना चाहते हैं. बांटो और राज करो — यह राजनीति कांग्रेस अंग्रेजों से विरासत में सीखकर आई है और आज भी उसी के सहारे चल रही है. कांग्रेस ने हमेशा देश में दरार पैदा करने वाली भावनाओं को हवा दी है.

इसीलिए यह झूठ फैलाया गया कि डीलिमिटेशन यानी परिसीमन से कुछ राज्यों को नुकसान होगा. जबकि सरकार ने पहले दिन से स्पष्ट किया है कि न किसी राज्य की भागीदारी का अनुपात बदलेगा, न किसी का रिप्रेजेंटेशन कम होगा. बल्कि सभी राज्यों की सीटें समान अनुपात में ही बढ़ेंगी. फिर भी कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और समाजवादी पार्टी जैसे दल इसे मानने को तैयार नहीं हुए.

यह संशोधन बिल सभी दलों और सभी राज्यों के लिए एक अवसर था. यह बिल पास होता तो तमिलनाडु, बंगाल, यूपी, केरल — हर राज्य की सीटें बढ़तीं. लेकिन अपनी स्वार्थी राजनीति की वजह से इन दलों ने अपने राज्यों के लोगों को भी धोखा दे दिया.

समाजवादी पार्टी के पास मौका था कि वो महिला विरोधी छवि के दाग को कुछ कम कर सके. लेकिन सपा भी इसमें चुक गई. समाजवादी पार्टी लोहिया जी को तो पहले ही भूल चुकी है. सपा ने नारी शक्ति वंदन संशोधन का विरोध करके लोहिया जी के सारे सपनों को पैरों तले रौंद दिया है. सपा महिला आरक्षण विरोधी है — यूपी की और देश की महिलाएं यह कभी नहीं भूलेंगी.

महिलाओं के आरक्षण का विरोध करके कांग्रेस ने फिर एक बार सिद्ध कर दिया है कि वह महिला विरोधी है. यही कांग्रेस का इतिहास है और यही कांग्रेस की नेगेटिव पॉलिटिक्स है. कांग्रेस एक रिफॉर्म विरोधी पार्टी है. 21वीं सदी के विकसित भारत के लिए जो भी निर्णय, जो भी सुधार जरूरी हैं — कांग्रेस उन सबका विरोध करती है, उन्हें खारिज कर देती है.

यही वो कांग्रेस है जिसने जनधन, आधार, मोबाइल और स्त्री शक्ति का विरोध किया. कांग्रेस ने डिजिटल पेमेंट्स का विरोध किया. कांग्रेस ने जीएसटी का विरोध किया. कांग्रेस ने सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण का विरोध किया. कांग्रेस ने ट्रिपल तलाक के विरुद्ध कानून का विरोध किया. कांग्रेस ने आर्टिकल 370 हटाने का विरोध किया. हमारा संविधान जिस यूनिफॉर्म सिविल कोड — समान नागरिक आचार संहिता — को जरूरी बताता है, कांग्रेस उसका भी विरोध करती है.

रिफॉर्म का नाम सुनते ही कांग्रेस विरोध की तख्ती लेकर दौड़ पड़ती है. ऐसा कोई भी काम जिससे देश मजबूत होता है, कांग्रेस उसमें बाधाएं खड़ी करने के लिए पूरी शक्ति लगा देती है.

कांग्रेस वन नेशन वन इलेक्शन का विरोध करती है. कांग्रेस देश में घुसपैठियों को भगाने का विरोध करती है. कांग्रेस मतदाता सूची के शुद्धिकरण और SIIR का विरोध करती है. कांग्रेस वक्फ बोर्ड में सुधार का विरोध करती है. और कांग्रेस शरणार्थियों को सुरक्षा देने वाले CAA का भी विरोध करती है.

पीएम मोदी ने कहा- कांग्रेस माओवादी, नक्सली हिंसा को समाप्त करने के देश के प्रयासों में भी रुकावटें डालती है. कांग्रेस का एक ही पैटर्न रहा है — कोई भी सुधार आए तो झूठ बोलो, भ्रम फैलाओ, अफवाहें फैलाकर देश में भंवर खड़ा कर दो.

जो भी कार्य देश के लिए जरूरी होता है, कांग्रेस उसे कारपेट के नीचे डाल देती है. कांग्रेस के इसी रवैये की वजह से भारत विकास की उस ऊंचाई पर नहीं पहुंच पाया जिसका वह हकदार है. आजादी के समय हमारे साथ और भी कई देश आजाद हुए थे — उनमें से ज्यादातर हमसे बहुत आगे निकल गए. इसकी वजह थी कि कांग्रेस हर सुधार को रोककर बैठी रही.

लटकाना, भटकाना, अटकाना — यही कांग्रेस का सिद्धांत रहा है, यही कांग्रेस का वर्क कल्चर रहा है. कांग्रेस ने पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवादों को लटकाया. कांग्रेस ने पाकिस्तान के साथ पानी बंटवारे से जुड़े विवादों को लटकाया. कांग्रेस ने OBC आरक्षण के निर्णय को 40 साल तक लटकाए रखा. कांग्रेस ने सैनिकों के लिए वन रैंक वन पेंशन को 40 साल तक रोके रखा.

कांग्रेस के इस रवैये ने हमेशा देश का बहुत बड़ा नुकसान किया है. कांग्रेस के हर विरोध, हर अनिर्णय, हर छल-प्रपंच का खामियाजा देश ने भुगता है, देश की पीढ़ियों ने भुगता है. आज देश के सामने जितनी भी बड़ी चुनौतियां हैं, वो कांग्रेस के इसी रवैये से उपजी हुई हैं.

इसलिए यह लड़ाई सिर्फ एक कानून की नहीं है. यह लड़ाई कांग्रेस की उस एंटी रिफॉर्म मानसिकता के खिलाफ है जिसमें सिर्फ नकारात्मकता है. और मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि देश की सभी बहनें-बेटियां कांग्रेस की इस मानसिकता को करारा जवाब देकर रहेंगी.

कुछ लोग देश की महिलाओं के सपने टूटने को सरकार की नाकामी बता रहे हैं. महिलाओं को दकियानूसी सोच से देखने वाले फिर भी अपने झूठ पर अड़े रहे. नारी शक्ति को भागीदारी दिलाने की लड़ाई दशकों से चल रही है और वर्षों से मैं भी इसके लिए प्रयास करने वालों में से एक हूं.

मैं जानता हूं कि आज मेरे देश की माताएं, बहनें, बेटियां... आप सभी दुखी हैं. मैं भी आपके इस दुख में दुखी हूं. आज भले भी बिल पास कराने के लिए जरूरी 66 प्रतिशत वोट हमें नहीं मिला हो, लेकिन मैं जानता हूं कि देश की 100 प्रतिशत नारी शक्ति का आशीर्वाद हमारे साथ है. मैं देश की हर नारी को विश्वास दिलाता हूं कि हम महिला आरक्षण के रास्ते में आने वाले हर रुकावट को खत्म करके रहेंगे. 

हमारा हौसला बुलंद है, हमारी हिम्मत भी अटूट है और हमारा इरादा भी अटिग है. महिला आरक्षण का विरोध करने वाली पार्टियां ये देश को नारी शक्ति को संसद और विधानसभा में उनकी भागीदारी बढ़ाने से कभी भी रोक नहीं पाएंगे. नारी शक्ति के सशक्तिकरण तक बीजेपी, एनडीए का संकल्प अक्षुण्ण है. 

कल हमारे पास संख्याबल नहीं था. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम हार गए. हमारा आत्मबल अजेय है. हमारा प्रयास रुकेगा नहीं, हमारा प्रयास थमेगा नहीं. हमारे पास आगे भी और मौके आएंगे. हमें आधी आबादी के सपनों के लिए, देश के भविष्य के लिए इस संकल्प को पूरा करना ही है. आप सब का बहुत-बहुत धन्यवाद. 

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