PHOTOS: आज़ादी के 75 वें साल में "ढाई आखर प्रेम" नामक सांस्कृतिक यात्रा ऐसे पहुंची मध्य प्रदेश

आज़ादी के 75 वें साल में पांच राज्यों से होकर गुजरने वाली "ढाई आखर प्रेम" की सांस्कृतिक यात्रा छत्तीसगढ़, झारखण्ड, बिहार, उत्तर प्रदेश होते हुए 41वें दिन मध्यप्रदेश के भोपाल पहुंची. इस दौरान 250 से अधिक स्थानों पर कार्यक्रम हो चुके हैं.

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मध्य प्रदेश पहुंची सांस्कृतिक कार्यक्रमों की ये यात्रा
भोपाल:

एक बार एक जंगल में आग लग गयी, सारे बड़े जानवर शेर, भालू, हाथी जंगल से भागने लगे, लेकिन एक छोटी गौरेया अपनी चोंच से पानी ला ला कर आग बुझाने लगी , यह देख कर सारे जानवरों ने उससे कहा अरे पागल तेरी छोटी चोंच पानी से जंगल की आग नहीं बुझने वाली, तू क्यों परेशान हो रही है... यह सुन उसने कहा मुझे भी पता है की मेरे एक चोंच पानी से आग नहीं बुझने वाली लेकिन आज से कुछ समय बाद जब जंगल का इतिहास लिखा जायेगा या इस आग का जिक्र होगा तो " मेरा नाम आग बुझाने वालो में लिखा जायेगा न कि तुम्हारी तरह भागने वालों में. 

कुछ इसी कहानी की तर्ज़ पर आज़ादी के 75 वें साल में पांच राज्यों से होकर गुजरने वाली "ढाई आखर प्रेम" की सांस्कृतिक यात्रा छत्तीसगढ़, झारखण्ड, बिहार, उत्तर प्रदेश होते हुए 41वें दिन मध्यप्रदेश के भोपाल पहुंची. इस दौरान 250 से अधिक स्थानों पर कार्यक्रम हो चुके हैं. भोपाल में गांधी भवन में यात्रा का भव्य स्वागत किया गया. स्वागत के बाद 'हम गली-गली में प्यार की शम्मा जलायेंगे', 'जब तक रोटी के प्रश्नों पर रखा रहेगा भारी पत्थर जैसे जनगीत गाए गए. 

दीपक नेमा के निर्देशन में "चंपक वन" और योगेश परिहार के निर्देशन में "डकैत चूहे" नाटक का मंचन हुआ. कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में इप्टा के राष्ट्रीय महासचिव राकेश वेदा ने कहा कि यह यात्रा संवैधानिक मूल्यों को लेकर, देश के नायकों के आंगन की मिट्टी एकत्र करते हुए और प्रेम सद्भाव का संदेश देते हुए गांव, देहात, शहर कस्बों से होते हुए जनता के साथ संवाद करते हुए गुजर रही है. विख्यात कवि राजेश जोशी ने कहा कि भोपाल में इप्टा की यह यात्रा सांस्कृतिक आंदोलन के लिए मील का पत्थर साबित होगी और नए संस्कृति कर्म की शुरुआत करेगी, जो प्रेम और भाईचारे की तहजीब को आगे ले जाएगा.  

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देश के असली नायकों को याद करते हुए कबीर के प्रेम के संदेश को लेकर 9 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के रायपुर से शुरू हुई, देश के पांच राज्यों छत्तीसगढ़, झारखण्ड, बिहार, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश से होकर गुजरने वाली  इप्टा की इस सांस्कृतिक यात्रा का समापन 22 मई को इंदौर में होगा. इस 45 दिवसीय यात्रा के दौरान प्रगतिशील लेखक संघ, जनवादी लेखक संघ, जन संस्कृति मंच, दलित लेखक संघ, जन नाट्य मंच समेत अन्य संगठनों, समूहों के सहयोग से गीत, संगीत, नाटक, फिल्म, किस्सागोई के तमाम कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. यात्रा में करीब 25 ख्यातिलब्ध कलाकार साथ-साथ चल रहे हैं. साथ ही स्थानीय कलाकारों के सहयोग से प्रस्तुतियां की जा रही हैं.

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