तेल कंपनियों ने आज 10 दिन में चौथी बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा कर दिया. पेट्रोल 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ है. दिल्ली की बात करें तो पेट्रो ल 102.12 रुपये प्रति लीटर हो गया है. जबकि डीजल का रेट 95.20 रुपये प्रति लीटर हो गया है. लेकिन क्या आपको पता है कि 1947 में देश की आजादी के वक्त पेट्रोल और डीजल का रेट क्या था. उस वक्त पेट्रोल 25 से 27 पैसे प्रति लीटर और डीजल 15 से 20 पैसे प्रति लीटर था. यानी आज जो दिल्ली में पेट्रोल का रेट है, उतने पैसे में 408 लीटर आ जाता. यानी करीब दो ड्रम भरकर तेल खरीदा जा सकता था. डीजल तो करीब 500 लीटर से ज्यादा खरीदा जा सकता था. उस वक्त 100 से 150 रुपये के मासिक वेतन को अच्छी तनख्वाह माना जाता था. आज देश की प्रति व्यक्ति आय मासिक 20 हजार रुपये से ऊपर है.
पेट्रोल की कीमतों का इतिहास (Petrol Diesel Price)
1947 -27 पैसा
1970 -90 पैसा
1990-4.20 रुपये
2004 -33.71 रुपये
2008-51 रुपये
2014- 72.43 रुपये
2026-102 रुपये
भारत का पहला पेट्रोल पंप
भारत में पहला पेट्रोल पंप 1928 में मुंबई में खुला था, तब पेट्रोल की कीमत महज 6 पैसे प्रति लीटर थी. पेट्रोल पंप पर एक हैंडपंप के सहारे तेल बाहर निकाला जाता था और गाड़ियों में भरा जाता था.
पेट्रोल पंपों का इतिहास
उस दौर के पेट्रोल पंपों में आज की तरह डिजिटल स्क्रीन नहीं होती थीं. पेट्रोल डिस्पेंसर मशीनों (Petrol Pump) पर एक बड़ा गोल घड़ी जैसा डायल होता था. इसकी सुइयां घूमकर यह बताती थीं कि कितने गैलन पेट्रोल गाड़ी में डाला गया है. 1947 में भारत में पेट्रोल लीटर में नहीं,गैलन बेचा जाता था.1 गैलन में करीब 4.5 लीटर तेल आता था. तब भारत में बर्मा शेल स्टैनवैक और कैल्टेक्स जैसी विदेशी तेल कंपनियों का दबदबा था. आज भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) इन्हीं कंपनियों के राष्ट्रीयकरण से बनीं. इंडियन ऑयल कारपोरेशन (IOCL) आज सबसे बड़ी तेल कंपनी है. पेट्रोल पंपों पर मशहूर कारें जैसे हिंदुस्तान 10 (बाद में एंबेसडर) या ब्रिटिश काल की पुरानी फिएट और शेवरले गाड़ी ईंधन भरवाने आती थीं.
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गैलन से लीटर का बदलाव
भारत सरकार ने 1956 में मापन का नया कानून ( Standard of Weights and Measures Act) पास किया, जिसके तहत देश में मीट्रिक प्रणाली (Metric System) को अपनाया गया. 1 अक्टूबर 1960 से पेट्रोल पंपों पर गैलन को हटाकर लीटर में तेल मापना शुरू किया गया. 1 गैलन लगभग 4.5 लीटर के बराबर होता था.
मिट्टी के तेल की बिक्री
बर्मा शेल (Burmah-Shell) जैसी कंपनियों ने 20वीं सदी की शुरुआत में भारत में कदम रखा, तब गाड़ियों की संख्या बहुत कम थी. कारों के लिए पेट्रोल बेचने के बजाय उनका मुख्य कारोबार मिट्टी का तेल (Kerosene) बेचना था, जो लालटेन जलाने के काम आता था.कंपनी ने केरोसिन के साथ फ्री लालटेन दिया, जिससे कंपनी की बिक्री आसमान छूने लगी.
युद्ध पेट्रोल के कूपन और कोटा
द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945) और आजादी के शुरुआती सालों में भारत में तेल की भारी किल्लत थी. ज्यादातर तेल सेना के लिए रिजर्व था. आम लोगों के लिए पेट्रोल का कोटा और कूपन सिस्टम लागू किया गया. कार मालिकों को सरकार से पेट्रोल कूपन मिलते थे. डॉक्टरों, अफसरों और जजों को ज्यादा कूपन मिलते थे. लोग पेट्रोल चुराने के डर से गाड़ियों को गैरेज में बंद रखते थे.
तेल कंपनियों का राष्ट्रीयकरण
आजादी के बाद भी 1970 के दशक तक भारत का पूरा तेल बाजार विदेशी कंपनियों के हाथ में था. लेकिन चीन युद्ध के बाद 1970 के दशक में सरकार ने बड़ा कदम उठाया. भारत सरकार ने 1974 में अमेरिकी कंपनी ESSO की भारतीय शाखा का अधिग्रहण किया और उससे हिन्दुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) बना. ब्रिटिश कंपनी बर्मा शेल का राष्ट्रीयकरण 1976 में हुआ तो भारत पेट्रोलियम (BPCL) अस्तित्व में आई. अमेरिकी कंपनी कैल्टेक्स का 1976-77 में विलय कर HPCL में मिलाया गया.
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पेट्रोल पहली बार 100 के बार
वर्ष 2014 में पेट्रोल का रेट 72 रुपये पार कर गया था, लेकिन 2015 में यह 60 रुपये तक गिर गया, ये सबसे बड़ी कमी थी. वर्ष 2024 में पेट्रोल के दाम पहली बार 100 के पार गए थे और अब यह 102 रुपये प्रति लीटर है.
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