- संसद के बजट सत्र की शुरुआत में विपक्ष के हंगामे की वजह से लोकसभा की कार्यवाही प्रभावित हुई
- भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर विपक्ष संसद में सरकार से स्पष्टीकरण मांग सकता है
- सोमवार से आम बजट पर चर्चा प्रस्तावित है जिसमें विपक्ष अपनी बात रखना चाहता है
संसद का बजट सत्र शुरुआत से ही विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ रहा है. राहुल गांधी के भाषण के मुद्दे पर पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच ऐसी तीखी नोकझोंक हुई कि लोकसभा की कार्यवाही सही से चल ही नहीं पाई. लेकिन संभावना जताई जा रही है कि लोकसभा की कार्यवाही सोमवार से सुचारू रूप से चल पाएगी. कांग्रेस सूत्रों ने कहा है कि पार्टी आम बजट पर होने वाली चर्चा में भाग लेना चाहती है, ताकि बजट पर अपनी बात रख सके. लेकिन ऐसा नहीं है कि विपक्ष बिल्कुल भी हंगामा नहीं करेगा.
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संसद में गूंजेगा भारत-US ट्रेड डील का मुद्दा
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का असर संसद की कार्यवाही पर भी पड़ना तय है. सोमवार को जब बजट सत्र की कार्यवाही फिर शुरू होगी तो व्यापार समझौता को लेकर आया भारत-अमेरिका के संयुक्त बयान की छाया संसद के दोनों सदनों में देखने को मिलेगी. कांग्रेस और तमाम विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार से स्पष्टीकरण देने की मांग करेंगे. इस समझौते के ऐलान के बाद से ही विपक्ष ये आरोप लगा रहा है कि मोदी सरकार ने अमेरिका के सामने घुटने टेक दिए. हालांकि सरकार की तरफ़ से वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एक बयान तो ज़रूर दिया था लेकिन कोई बहस नहीं हो पाई थी.
विपक्ष की ओर से मनीष तिवारी और मानिकम टैगोर जैसे सांसदों ने इस मुद्दे पर कार्य स्थगन प्रस्ताव के तहत तुरंत बहस करवाए जाने की मांग करते हुए नोटिस दिया था, जिसे नकार दिया गया. लेकिन अब इस मुद्दे पर हंगामा होना तय माना जा रहा है.
कृषि और किसानों के सवाल पर हंगामा तय
सबसे ज़्यादा बवाल कृषि से जुड़े बिंदुओं को लेकर होना तय है. कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने संयुक्त बयान में कृषि से जुड़े बिंदुओं को लेकर सरकार से सफाई मांगी है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि हाल ही में पेश वित्त विधेयक में पहले ही अमेरिका से आयात होने वाली वस्तुओं पर कई रियायतों का ऐलान किया जा चुका है . तिवारी के मुताबिक जिन नए प्रावधानों का ऐलान हुआ है उसका व्यापक असर होने वाला है.
आम बजट पर चर्चा करना चाहता है विपक्ष
सोमवार से शुरू होने वाले हफ़्ते में आम बजट पर चर्चा प्रस्तावित है. राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस के दौरान जो बवाल शुरू हुआ उसने लोकसभा में बीते हफ़्ते को धो डाला. राज्यसभा में तो कार्यवाही सुचारु रूप से चली लेकिन लोकसभा में राहुल गांधी के भाषण से शुरू हुआ बवाल इतना बढ़ा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जवाबी भाषण भी नहीं हो सका.
लोकसभा की कार्यवाही बिना हंगामे के चलने की उम्मीद
ऐसी उम्मीद है कि सोमवार से शुरू हो रहे अगले हफ़्ते में जब आम बजट पर चर्चा शुरू होगी तो लोकसभा की कार्यवाही भी सुचारू रूप से चल पाएगी. कांग्रेस समेत विपक्ष के कई सांसदों ने एनडीटीवी को बताया था कि आम बजट पर चर्चा के दौरान वे सांसद अपनी बातें रखना चाहते हैं. समाजवादी पार्टी और टीएमसी जैसी विपक्षी पार्टियां भी इस बात के पक्ष में थीं कि बजट पर लोकसभा में बिना हंगामे के चर्चा होनी चाहिए.












