तो विपक्षी दलों को बिहार चुनाव लड़ने के लिए सोचना होगा... वोटर लिस्‍ट विवाद पर NDTV से पप्पू यादव

क़ानून व्यवस्था के मुद्दे पर पप्पू यादव ने तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर सवाल उठा दिया. पप्पू यादव ने कहा कि इस मुद्दे को तेजस्वी यादव विपक्ष के नेता के तौर पर ठीक से नहीं उठा रहे हैं और विरोध केवल सोशल मीडिया तक सीमित रह गया है.

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किस आधार पर लोगों को वोटर लिस्‍ट से हटाया जाएगा, पप्‍पू यादव का सवाल
पटना:

पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने बिहार में चल रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) पर सवाल उठाए हैं. पप्‍पू यादव का कहना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बावजूद चुनाव आयोग SIR को वैसे ही जारी रखता है, तो विपक्षी दलों को बिहार चुनाव लड़ने पर पुनर्विचार करना होगा. अगर केवल बीजेपी को ही किसी तरह चुनाव जितवाना है, तो चुनाव लड़कर कोई फ़ायदा नहीं है. 

तेजस्‍वी पर पप्‍पू यादव का तंज

वहीं क़ानून व्यवस्था के मुद्दे पर पप्पू यादव ने तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर सवाल उठा दिया. पप्पू यादव ने कहा कि इस मुद्दे को तेजस्वी यादव विपक्ष के नेता के तौर पर ठीक से नहीं उठा रहे हैं और विरोध केवल सोशल मीडिया तक सीमित रह गया है. बालू, शराब माफिया, नेता और अफसरों का नेक्सस बन गया है और इसमें सभी पार्टियों के नेता शामिल हैं. गोपाल खेमका हत्याकांड मामले में हुए एनकाउंटर पर भी पप्पू यादव ने सवाल उठाते हुए सीबीआई जांच की मांग की है. उन्होंने कानून व्यवस्था पर सवाल उठाने वाले चिराग पासवान को पहले एनडीए से बाहर आने की चुनौती दी.


किस आधार पर लोगों को सूची से हटाया जाएगा?

बिहार में वोटर लिस्‍ट की जांच के बीच चुनाव आयोग ने कहा है कि गहन पुनरीक्षण के दौरान नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार के कई लोग पाए गए, जिनके नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं किए जाएंगे. इस पर यादव ने तंज कसते हुए कहा, "चुनाव आयोग बिना कागजात लिए कैसे दावा कर रहा है कि कोई नेपाल या बांग्लादेश का है? अगर आधार कार्ड, राशन कार्ड या अन्य दस्तावेज हैं, तो किस आधार पर लोगों को सूची से हटाया जाएगा?"

कैसे तय हो रहा कोई विदेशी है?

पप्‍पू यादव ने सवाल किया कि जब कोई पहचान पत्र या दस्तावेज मांगा ही नहीं जा रहा, तो केवल नाम और पिता का नाम पूछकर कैसे तय हो रहा है कि कोई विदेशी है. पप्पू यादव ने इस प्रक्रिया को गलत और संदिग्ध बताया. उन्होंने कहा, "विपक्ष इस मुद्दे को इसलिए उठा रहा है क्योंकि बिना ठोस सबूत के लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं। यह चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है." उन्होंने आरोप लगाया कि बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) बिना दस्तावेजों की जांच के केवल मौखिक जानकारी ले रहे हैं, जो गलत है. उन्होंने आगे कहा कि इस मुद्दे को लेकर विपक्ष सुप्रीम कोर्ट का रुख कर रहा है, क्योंकि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है. सांसद पप्पू यादव ने कहा कि बिहार में पहले दस चुनाव मौजूदा मतदाता सूची के आधार पर हुए हैं, तो अब अचानक यह पुनरीक्षण क्यों? पप्पू यादव ने इस प्रक्रिया को संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया और मांग की कि इसे पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया जाए.
 

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