तेल को बना हथियार ईरान ने चली होर्मुज की चाल, दुनिया में मचा हड़कंप, भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी बड़ा खतरा

ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद किए बगैर ही वैश्विक तेल सप्लाई को पूरी तरह प्रभावित कर दिया. भारत जैसे देशों के लिए यह चेतावनी है कि ऊर्जा सुरक्षा के लिए तेल-गैस में निवेश और वैश्विक गठबंधन बढ़ाना जरूरी है.

विज्ञापन
Read Time: 7 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • ईरान की होर्मुज की एक चाल ने दुनिया को तेल के संकट में डाल दिया.
  • भारत के लिए सबसे बड़ा सवाल- क्या हम अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए तैयार हैं?
  • तेल-गैस में निवेश बढ़ाए बिना भारत की आर्थिक और सैन्य ताकत सुरक्षित नहीं हो सकती.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

दुनिया में तेल की कोई कमी नहीं है. सच तो यह है कि बड़े तेल उत्पादक देशों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि मांग उतनी तेजी से नहीं बढ़ रही जितनी वे चाहते हैं. फिर भी दुनिया आज एक गंभीर तेल संकट की गिरफ्त में आ गई है. कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और पर्शियन गल्फ क्षेत्र से गुजरने वाली करीब 20 प्रतिशत तेल सप्लाई बाधित हो चुकी है. आखिर इसकी वजह क्या है? इसका जवाब है कि तेल को हथियार बना दिया गया है.

सबसे पहले पश्चिमी देशों ने यूक्रेन पर हमले के लिए मॉस्को को सजा देने के नाम पर रूस के तेल और गैस पर प्रतिबंध लगाए. और अब ईरान ने तेल और LNG को सबसे नाटकीय और विनाशकारी तरीके से हथियार बना दिया है. ईरान ने गल्फ में स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है. यह वही समुद्री रास्ता है जो वैश्विक तेल आपूर्ति व्यवस्था और पूरी विश्व अर्थव्यवस्था की सबसे अहम नस माना जाता है. दुनिया के लिए यह किसी झटके से कम नहीं है. दुनिया के लगभग 80 प्रतिशत तेल आयात करने वाले देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा का मतलब तेल की सप्लाई को सुरक्षित रखना है. वहीं तेल निर्यात करने वाले देशों के लिए भी यह संकट है, क्योंकि उनकी अर्थव्यवस्था ज्यादातर मामलों में तेल की मांग पर ही टिकी होती है.

ईरान इस जियो-एनर्जी गणित को अच्छी तरह समझता है. वह अमेरिका और इजरायल की सैन्य ताकत का मुकाबला नहीं कर सकता. इसलिए उसने इतिहास में पहली बार यह कदम उठाया. ईरान ने सिर्फ चेतावनी दी कि जो भी तेल या गैस का टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरने की हिम्मत करेगा, वो उस पर हमला कर देगा. उसकी यह रणनीति काम कर गई. इस तरह उसने होर्मुज को औपचारिक रूप से बंद किए बिना ही बंद कर दिया. लेकिन इस खतरनाक और हाई-वोल्टेज भू-राजनीतिक खेल के पीछे असली एजेंडा क्या है?

ये भी पढ़ें: तेल का महीनों का स्टॉक, लेकिन गैस क्यों नहीं? LPG-LNG के गणित को आसान भाषा में समझिए

उम्मीद है कि यह युद्ध जल्द खत्म होगा. जैसे ही बंदूकें खामोश होंगी, होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकर फिर से गुजरने लगेंगे. लेकिन भारत के लिए यह युद्ध एक बड़ा सबक छोड़ जाएगा. हमें तेल और गैस पर ज्यादा ध्यान देना होगा. देश में तेल और गैस की खोज और उत्पादन में निवेश बढ़ाना होगा. और उससे भी ज्यादा जरूरी है कि भारतीय तेल कंपनियां विदेशों में जाकर निवेश बढ़ाएं. खासकर पश्चिम अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, अमेरिका और कनाडा, मध्य पूर्व और रूस जैसे ऊर्जा समृद्ध क्षेत्रों में. और ईरान को भी मत भूलिए, जो भौगोलिक रूप से हमारे सबसे करीब एक बड़ा तेल-गैस महाशक्ति है. भारत को तेल और गैस के मजबूत और टिकाऊ गठबंधन बनाने होंगे. वैसे ही जैसे सैन्य गठबंधन बनाए जाते हैं, जैसे NATO या कभी वारसा पैक्ट हुआ करता था.

Advertisement

 हमें याद रखना चाहिए कि दुनिया की कोई भी बड़ी उभरती अर्थव्यवस्था, भारत जितना तेल आयात पर निर्भर नहीं है. ऐसे में जब तक हम तेल और गैस के मामले में खुद को सुरक्षित नहीं करेंगे, तब तक हम आर्थिक और सैन्य रूप से भारत को सुरक्षित नहीं बना सकते. इसलिए तेल और गैस सुरक्षा सबसे पहले आनी चाहिए.

नरेंद्र तनेजा ऊर्जा नीति और भू-राजनीति के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित विचारक हैं.

Featured Video Of The Day
Harish Rana Verdict: 13 साल से कोमा में पड़े हरीश को Supreme Court ने दी इच्छामृत्यु की इजाजत | NDTV
Topics mentioned in this article