ओडिशा के मयूरभंज में मानव बस्तियों में 100 से ज्यादा हाथियों ने बरपाया कहर, खौफ में लोग

Odisha News: हाथियों की बड़ी संख्या ने विभाग को मानव-पशु संघर्ष को रोकने के लिए चौबीसों घंटे उन पर नजर रखने के लिए सतर्क कर दिया है. करीब 625 'गज साथी' (हाथी ट्रैकर) और 120 संरक्षण कर्मचारियों के साथ-साथ वन रक्षक और वन अधिकारी भी सेवा में लगाए गए हैं.

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ओडिशा के मयूरभंज में हाथियों का आतंक.
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  • ओडिशा में करीब 110 हाथियों का झुंड पश्चिम बंगाल से बारीपाड़ा और मोराडा क्षेत्र की मानव बस्तियों में घुस गया
  • हाथियों के हमले में दो दिन पहले एक युवक की मौत हो चुकी है, जिससे स्थानीय लोगों में भय है
  • वन विभाग के कर्मचारी और अधिकारी बारीपाड़ा और करंजिया डिवीजनों में हाथियों की निगरानी कर रहे हैं
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मयूरभंज:

ओडिशा के मयूरभंज में हाथियों का आतंक देखने को मिला है. हाथियों के झुंड ने ऐससा कहर बरपाया कि लोगों में डर और दहशत फैल गई. करीब 110 हाथियों का एक बड़ा झुंड पश्चिम बंगाल से बारीपाड़ा और मोराडा क्षेत्र की मानव वस्तियों में घुस गया.जिसकी वजह से लोगों में खौफ का माहौल देखने को मिला. मयूरभंज में वन विभाग के कर्मचारी और उनके वरिष्ठ अधिकारी बारीपाड़ा और करंजिया डिवीजनों में मौजूद हाथियों के झुंड की निगरानी में दिन-रात जुटे हुए हैं. 110 हाथियों का एक झुंड बारीपाड़ा वन विभाग को व्यस्त रखे हुए है.

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हाथियों के हमले में एक युवक की मौत

पश्चिम बंगाल से छोटे-छोटे समूहों में आए ये विशालकाय हाथी दिन के समय बारीपाड़ा, मोराडा और राशगोविंदपुर पर्वतमाला में धान की फसलों को चरते हैं. रात को सिमिलिपाल क्षेत्र के विशाल साल के जंगलों में विश्राम करते हैं. मयूरभंज जिले के मोराडा और रसगोबिंदपुर ब्लॉक में पूरे साल हाथियों का उत्पात देखने को मिलता है. दो दिन पहले हाथी के हमले में एक युवक की मौत भी हुई.

रसगोबिंदपुर रेंज के तहत नकीचुआ जंगल में 34 सिमिलिपाल हाथी हैं. वहीं डेली रेंज और शूलियापाड़ा ब्लॉक के बोनकटी और घनघना से महज दस से 12 किलोमीटर दूर पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के तपोवन जंगल से सैकड़ों हाथियों के झुंड को निकलते देख शूलियापाड़ा ब्लॉक के लोग डरे हुए हैं. डेली के रेंजर जगदीश दास ने बताया कि वन विभाग ने कड़ी नजर रखी है. हाथियों के झुंड को ढकने के लिए सभी तरह के इंतजाम किए गए हैं.  

हाथियों के झुंड पर 24 घंटे रखी जा रही नजर

रिहायशी बस्तियों में बड़ी संख्या में हाथियों को देखकर लोग इकट्ठा होने लगे हैं. उनकी भारी संख्या ने विभाग को मानव-पशु संघर्ष को रोकने के लिए चौबीसों घंटे उन पर नजर रखने के लिए सतर्क कर दिया है. करीब 625 'गज साथी' (हाथी ट्रैकर) और 120 संरक्षण कर्मचारियों के साथ-साथ वन रक्षक और वन अधिकारी भी सेवा में लगाए गए हैं. इसके अलावा एक नियंत्रण कक्ष भी है जो चौबीसों घंटे काम करता है. 

हर साल, हाथी पश्चिम बंगाल से बारीपाड़ा, बड़ासाही होते हुए गलियारों से गुजरते हैं. सर्दियों में जब कटाई का मौसम नजदीक आता है, तो वे कुलदिहा वन्यजीव अभ्यारण्य तक जाते हैं. वन अधिकारियों का कहना है कि हाथियों ने महसूस किया है कि ओडिशा का क्षेत्र भोजन और चारागाह के अलावा बच्चों को जन्म देने के लिए ज्यादा सुरक्षित है, इसीलिए वे देश के इस हिस्से की ओर रुख करते हैं.
 

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