कब थमेगा मौतों का सिलसिला? जाजपुर के 90 ट्यूबवेलों में घुल चुका है जहर, पलाटपुर में अब तक 100 मौतें

ओडिशा के पलाटपुर पंचायत में पीने के पानी के प्रदूषण ने एक भयावह त्रासदी का रूप ले लिया है. पिछले एक दशक में जहरीले पानी के सेवन से 100 से अधिक ग्रामीणों की जान जा चुकी है.

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  • ओडिशा के जाजपुर जिले के पलाटपुर पंचायत में पिछले दस वर्षों में दूषित पानी से 100 से अधिक मौतें हुई हैं.
  • जांच में 90 ट्यूबवेलों के पानी में सीसा, कैडमियम, आर्सेनिक, मैंगनीज और लोहा जैसे खतरनाक रसायन पाए गए हैं.
  • प्रशासन ने सभी दूषित ट्यूबवेलों को सील कर दिया है और स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था करने का आग्रह किया है.
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जाजपुर:

ओडिशा के जाजपुर जिले के दशरथपुर ब्लॉक के पलाटपुर पंचायत में दूषित पेयजल का एक चौंकाने वाला संकट सामने आया है, जहां कथित तौर पर पिछले 10 वर्षों में कैंसर और गुर्दे संबंधी बीमारियों के कारण 100 से अधिक लोगों की मौत दूषित पानी से हुई है.  अधिकारियों ने बताया कि कम से कम 12 मरीज वर्तमान में इलाज करा रहे हैं, जिससे ग्रामीण जल सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ गई हैं. 

रिपोर्टों के बाद, जिला और राज्य प्रशासन ने जांच शुरू की. पेयजल आपूर्ति विभाग ने पंचायत के 827 निजी और सरकारी ट्यूबवेलों से नमूने एकत्र किए. इनमें से 160 नमूनों का भुवनेश्वर स्थित केंद्रीय प्रयोगशाला में परीक्षण किया गया, और परिणामों से भयावह संदूषण का पता चला. अधिकारियों के अनुसार, 90 ट्यूबवेलों के पानी में सीसा, कैडमियम, आर्सेनिक, मैंगनीज और लोहा सहित खतरनाक रासायनिक पदार्थ पाए गए. ये जहरीले तत्व कैंसर, गुर्दे की बीमारियों और पीलिया जैसी जानलेवा बीमारियों का कारण बनते हैं.

इसके जवाब में, प्रशासन ने आगे उपयोग रोकने के लिए सभी 90 दूषित ट्यूबवेलों को सील कर दिया है. स्थानीय सरपंच लिपिका मल्लिक ने अधिकारियों से निवासियों की सुरक्षा के लिए स्वच्छ पेयजल की तत्काल पाइपलाइन आपूर्ति की व्यवस्था करने का आग्रह किया है. यह घटना ग्रामीण ओडिशा में बढ़ते सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल को उजागर करती है.

RWSS के लैब असिस्टेंट दिलीप कुमार ने बताया कि हम पानी के सैंपल इकट्ठा कर रहे हैं, कल तक हमने 71 सैंपल इकट्ठा किए हैं. इन सभी सैंपल को टेस्टिंग के लिए स्टेट हेड लेबोरेटरी में भेजा जाएगा.

एडिशनल चीफ इंजीनियर कटक सर्कल ने कहा, शिकायत के अनुसार हमने पानी के जो सैंपल टेस्ट किए हैं, उनमें मैंगनीज जैसी कुछ भारी धातुएं मिली हैं, जो इस तरह के प्रदूषण और कई बीमारियों के फैलने का कारण हैं. गांव के ज़्यादातर पानी के सोर्स दूषित हैं. इसलिए हमने गांव वालों को सलाह दी है कि वे खाना बनाने या पीने के लिए इस पानी का इस्तेमाल न करें.

इससे पहले इंदौर भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से लोगों के बीमार पड़ने का सिलसिला दिसंबर के आखिर में शुरू हुआ था और हेमंत गायकवाड़ को मिलाकर अब तक कुल 25 लोगों की मौत का दावा किया जा रहा है. हालांकि, हाई कोर्ट में पेश किए गए मध्य प्रदेश सरकार की स्टेटस रिपोर्ट में मौत का आंकड़ा अलग है. 
 

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