संसद का विशेष सत्र गुरुवार यानी आज से शुरू हो रहा है. जिसमें नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण कानून) में संशोधन और परिसीमन से जुड़े विधेयक पेश किए जाने हैं. चूंकि यह संविधान संशोधन विधेयक है, इसलिए इसे पारित कराने के लिए सरकार को लोकसभा और राज्यसभा, दोनों में दो‑तिहाई बहुमत चाहिए.
लोकसभा में गणित
लोकसभा की कुल सदस्य संख्या 543 है. दो‑तिहाई बहुमत के लिए सरकार को 360 सांसदों का समर्थन जरूरी है.
एनडीए के पास अभी:
- बीजेपी: 240
- टीडीपी: 16
- जेडीयू: 12
- शिवसेना: 7
- अन्य सहयोगी: 18
कुल: 293 सांसद. यानी सरकार 360 के आंकड़े से 67 सांसद दूर है.
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राज्यसभा में गणित
राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या 245 है. दो‑तिहाई बहुमत के लिए 163 सांसद जरूरी हैं.
एनडीए के पास:
- बीजेपी: 106
- जेडीयू: 4
- टीडीपी: 2
- शिवसेना: 2
- अन्य सहयोगी: 20
कुल: 134 सांसद. यानी सरकार 29 सांसदों की कमी में है.
क्यों अहम है विपक्ष का समर्थन
विपक्षी दल महिला आरक्षण के समर्थन की बात तो कर रहे हैं, लेकिन उसका परिसीमन से जोड़ने का विरोध कर रहे हैं. ऐसे में अगर विपक्ष साथ नहीं आता, तो सरकार के लिए विधेयक पारित कराना आसान नहीं होगा.
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महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को पास कराने के लिए सरकार के पास फिलहाल दोनों सदनों में जरूरी दो‑तिहाई बहुमत नहीं है. ऐसे में आने वाले दिनों में संसद के भीतर तेज सियासी मोलभाव और विरोध‑समर्थन का दौर देखने को मिल सकता है.
संसद सत्र से पहले पीएम मोदी का पोस्ट
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने संसद के विशेष सत्र की बैठक की शुरुआत से पहले महिला सशक्तीकरण को लेकर बड़ा संकेत दिया है. X पर अपने संदेश में पीएम मोदी ने कहा कि इस विशेष सत्र में देश नारी सशक्तीकरण के लिए ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि माताओं और बहनों का सम्मान ही राष्ट्र का सम्मान है और इसी भावना के साथ सरकार इस दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रही है. अपनी पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी ने संस्कृत के एक श्लोक का भी उल्लेख किया, जो नारी शक्ति के तेज और उसकी महत्ता को दर्शाता है.














