ट्रंप का टर्म खत्म होने का इंतजार करेंगे... NSA अजीत डोभाल ने रुबियो से ट्रेड डील से पहले ही कह दिया था

डोभाल की मुलाकात के कुछ समय बाद ही दोनों देशों के बीच तनाव कम होने का पहला संकेत दिखाई दिया. ट्रंप ने 16 सितंबर को पीएम मोदी को उनके जन्मदिन पर फोन कर उनके शानदार काम की तारीफ की. साल के अंत तक, दोनों नेताओं ने टैरिफ कम करने के समझौते की ओर बढ़ते हुए चार बार और फोन पर बातचीत की.

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मीटिंग के कुछ ही समय बाद ही दिखा था तनाव में कमी का पहला संकेत
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  • US-भारत के बीच हाल ही में हुई ट्रेड डील को अमेरिका ने अपनी सफलता के रूप में पेश किया है.
  • NSA अजीत डोभाल ने अमेरिका में विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात कर ट्रंप के कठोर रुख पर आपत्ति जताई थी
  • अजीत डोभाल ने स्पष्ट किया था कि भारत ट्रंप प्रशासन के दबाव में नहीं आएगा और ट्रेड डील न होने पर इंतजार करेगा
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नई दिल्ली:

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को अमेरिका अपनी जीत के रूप में पेश कर रहा है. लेकिन इस बीच एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें कुछ और ही बात पता चली है. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अजित डोभाल ने अमेरिका में विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात पर ट्रंप के अड़ियल रवैये पर आपत्ति जाहिर की थी. उन्होंने कहा था कि अगर ट्रेड डील नहीं होती है तो भारत ट्रंप का कार्यकाल खत्म होने का इंतजार करेगा.

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रुबियो से मिले थे NSA अजीत डोभाल 

रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम मोदी ने सितंबर की शुरुआत में चीन में व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग के साथ सौहार्दपूर्ण बातचीत के तुरंत बाद बिगड़ते रिश्तों को सुधारने में मदद के लिए NSA अजीत डोभाल को वाशिंगटन भेजा था. नाम न बताने की शर्त पर बैठक से परिचित दिल्ली के अधिकारियों के मुताबिक, अजीत डोभाल अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के लिए एक संदेश लेकर पहुंचे थे. संदेश यह था कि भारत दोनों देशों के बीच की कटुता को पीछे छोड़कर बिजनेस डील पर फिर से बातचीत शुरू करना चाहता है.

अधिकारियों के मुताबिक, अजीत डोभाल ने रुबियो से कहा कि भारत, डोनाल्ड ट्रंप और उनके शीर्ष सहयोगियों के दबाव में नहीं आएगा. उन्होंने ट्रंप के अड़ियल रवैये पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि अगर ट्रेड डील नहीं होती है तो वह ट्रंप का कार्यकाल समाप्त होने तक इंतजार करेंगे. डोभाल ने रुबियो से ये भी कहा था भारत चाहता है कि ट्रंप और उनके सहयोगी उसकी सार्वजनिक तौर पर आलोचना करना थोड़ा कम करें, ताकि बिगड़ते संबंध फिर से सुधारे जा सकें.

डोभाल की मुलाकात के बाद US ने दिए तनाव कम होने के संकेत

ट्रंप ने अगस्त में भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया हुआ था. भारत ट्रंप ने अपमान भरे शब्दों और टैरिफ से आहत था.  दरअसल ट्रंप ने भारत को उच्च टैरिफ वाली "मृत" अर्थव्यवस्था कहा था. उन्होंने ये भी कहा था कि भारत रूसी तेल खरीदकर यूक्रेन में पुतिन के युद्ध को वित्त पोषित कर रहा है.डोभाल की रुबियो से मुलाकात के कुछ समय बाद ही दोनों देशों के बीच तनाव कम होने का पहला संकेत दिखाई दिया. ट्रंप ने 16 सितंबर को पीएम मोदी को उनके जन्मदिन पर फोन कर उनके शानदार काम की तारीफ की. साल के अंत तक, दोनों नेताओं ने टैरिफ कम करने के समझौते की ओर बढ़ते हुए चार बार और फोन पर बातचीत की.

विदेश मंत्रालय और पीएम मोदी के दफ्तर ने ज्यादा जानकारी के लिए भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं दिया. वहीं अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि राजनयिक नियमों के मुताबिक, वे निजी चर्चाओं का विवरण सार्वजनिक नहीं करते हैं.

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US ने भारत पर घटाया टैरिफ

सोमवार को ट्रंप ने ऐलान किया कि उन्होंने पीएम मोदी के साथ एक बिजनेस डील की है, जिसके तहत भारत के सामानों पर 25 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18% किया जाएगा. यह टैरिफ एशिया के ज्यादातर देशों की तुलना में कम है. इसके साथ ही अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने पर भारत पर लगाया गया 25% का टैरिफ भी हटा दिया. ट्रंप ने कहा कि इसके बदले में भारत को 500 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान खरीदेगा. उन्होंने कहा कि भारत वेनेजुएला से तेल खरीदना शुरू करेगा और अमेरिकी आयात पर जीरो टैक्स लगाने पर भी सहमति बनी है. हालांकि मोदी सरकार की तरफ से इस पर कोई आधिकाकिक बयान नहीं आया. उन्होंने ट्रंप की इन बातों की पुष्टि नहीं की. साथ ही किसी भी पक्ष ने इस डील पर कोई लिखित दस्तावेज भी पेश नहीं किया. 

ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में किया भारत से डील का जिक्र

द एशिया ग्रुप की पार्टनर और दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के लिए पूर्व अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री निशा बिस्वाल ने ब्लूमबर्ग टीवी को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि पिछले एक साल में अमेरिका और भारत, दोनों ही देशों ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए जी तोड़ मेहनत की है. यह डील दोनों देशों के लिए फायदे का सौदा है. भारत आखिरकार वैश्विक व्यापार के लिए खुल रहा है. हालांकि दोनों ही देशों ने सार्वजनिक तौर पर डील के जल्द होने का कोई संकेत नहीं दिया है.

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सोमवार को, नई दिल्ली उस समय हैरान रह गई, जब ट्रंप ने सोशल मीडिया पर डील को लेकर पोस्ट किया. विदेश और वाणिज्य मंत्रालयों के कई सीनियर अधिकारी, यहां तक ​​कि व्यापार वार्ता में सीधे तौर पर शामिल रहने वाले लोग भी इस बात से अनजान थे कि उस दिन दोनों नेताओं के बीच एक कॉल निर्धारित थी. इसी वजह से टैरिफ ऐलानों पर जानकारी की पुष्टि नहीं हो सकी. 
 

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