नीतीश कुमार के लिए भारत रत्न मांगने पर जेडीयू में क्यों मच गया घमासान?

पार्टी सूत्रों का दावा है कि केसी त्यागी ने जो कहा वह उनका निजी बयान था और उसकी वजह यह है कि त्यागी डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं . यह बात जग ज़ाहिर है कि पिछले सालों में के सी त्यागी ने कुछ ऐसे बयान दिए , जो पार्टी की घोषित स्टैंड से अलग रहा .

विज्ञापन
Read Time: 5 mins
नई दिल्ली:

के सी त्यागी की ओर से की गई इस मांग को लेकर जेडीयू ने जो प्रतिक्रिया दी , उससे कई सवाल उठ रहे हैं . पार्टी को लगता है कि भारत रत्न देने के नैरेटिव से नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बने रहने पर सवाल उठता है क्योंकि इससे ये संदेश जाता है कि भारत रत्न जैसी उपाधि मिलने के बाद नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने रहना मुश्किल हो जाएगा और उन्हें पद छोड़ना पड़ेगा . हालांकि कुर्सी छोड़ने की कोई संवैधानिक बाध्यता नहीं है. नीतीश कुमार को भारत रत्न दिए जाने की मांग पहले भी उठी थी , लेकिन अबकी बार इस मांग पर जितनी सियासी प्रतिक्रिया आई है उतनी पहले नहीं आई थी .

जेडीयू के वरिष्ठ नेता के सी त्यागी ने शुक्रवार को एनडीटीवी पर इस बात का खुलासा किया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर नीतीश कुमार को भारत रत्न की उपाधि से नवाजे जाने की मांग की है . उसके बाद शनिवार सुबह सुबह जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने औपचारिक तौर पर इस मांग से किनारा कर लिया और यहां तक कह डाला कि के सी त्यागी पार्टी में हैं या नहीं , उन्हें नहीं मालूम . 

आमतौर पर तो पार्टी इस बात का स्वागत करती कि उसके सबसे बड़े नेता के लिए भारत रत्न जैसी उपाधि दिए जाने की मांग की गई है लेकिन हुआ इसके ठीक उलट . आख़िर ऐसा क्यों हुआ ? इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं .पार्टी को लगता है कि भारत रत्न देने के नैरेटिव से नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बने रहने पर सवाल उठता है क्योंकि इससे ये संदेश जाता है कि भारत रत्न जैसी उपाधि मिलने के बाद नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने रहना मुश्किल हो जाएगा और उन्हें पद छोड़ना पड़ेगा , भले ही मुख्यमंत्री बने रहने में कोई क़ानूनी अड़चन नहीं है . अगर ऐसा होता है तो फिर ये तय है कि इसका जेडीयू और बिहार की आंतरिक राजनीति पर भी व्यापक प्रभाव पड़ेगा . शायद यही वजह है कि जब के सी त्यागी ने नीतीश कुमार के लिए भारत रत्न दिए जाने की मांग की तो पार्टी के भीतर घमासान मच गया . 

कई विश्लेषक मानते हैं कि पार्टी की ऐसी प्रतिक्रिया के पीछे पार्टी की अंदरूनी राजनीति भी एक बड़ी वजह हो सकती है . जेडीयू में नीतीश कुमार का उत्तराधिकारी आखि़र कौन होगा , इसको लेकर गाहे बगाहे चर्चा होती रही है . यही वजह है कि समय समय पर नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को भी राजनीति में लाने की मांग उठती रहती है . राजनीतिक गलियारों में ये बात भी तैरती रही है कि संजय झा के पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष बनने और ललन सिंह के केंद्र में मंत्री बनने के बाद पार्टी पर अगड़ी जाति के नेताओं का दबदबा हो गया है . खासकर तब जबकि नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को लेकर अटकलें लग रही हैं . लिहाज़ा पार्टी का एक तबका मानता है कि अगर नीतीश कुर्सी से हट गए तो पार्टी में उनकी स्थिति कमज़ोर हो जाएगी . 

हालांकि, पार्टी सूत्रों का दावा है कि केसी त्यागी ने जो कहा वह उनका निजी बयान था और उसकी वजह यह है कि त्यागी डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं . यह बात जग ज़ाहिर है कि पिछले सालों में के सी त्यागी ने कुछ ऐसे बयान दिए , जो पार्टी की घोषित स्टैंड से अलग रहा . अग्निवीर स्कीम पर पुनर्विचार करने से जुड़ा बयान हो , इंडिया गठबंधन की ओर से नीतीश कुमार की प्रधानमंत्री पद का प्रस्ताव देने का दावा करने वाला बयान या फिर हाल ही में बांग्लादेश क्रिकेटर को आईपीएल से बाहर करने पर दिया गया बयान , इन सभी बयानों ने पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी . पार्टी सूत्रों के मुताबिक़ इन बयानों से पार्टी नाराज़ थी और इसलिए नीतीश कुमार को भारत रत्न की मांग डैमेज कंट्रोल की कोशिश है . 

वैसे त्यागी की मांग से किनारा करते हुए पार्टी की ओर पार्टी में उनकी हैसियत को लेकर ही सवाल खड़ा कर दिया गया . हालांकि पार्टी की ओर से जनवरी 2024 और अगस्त 2024 में हो अधिसूचना जारी की गई उसके मुताबिक़ के सी त्यागी को राष्ट्रीय प्रवक्ता और पार्टी का सलाहकार बनाया गया था . पिछले साल अगस्त में फिलिस्तीन मसले पर कुछ विपक्षी नेताओं के साथ साझा बयान जारी करने से उठे विवाद के बाद उन्होंने राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफ़ा दे दिया था जिसके बाद राजीव रंजन प्रसाद को उनकी जगह ये पद दिया गया .

Featured Video Of The Day
Varanasi Dal Mandi Bulldozer Action: Yogi का 'ऑपरेशन सफाई', 186+ अतिक्रमण पर गरजा पीला पंजा? | UP
Topics mentioned in this article