- बिहार सरकार ने सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है.
- अब राज्य में कोई भी सरकारी डॉक्टर प्राइवेट क्लिनिक या प्राइवेट अस्पताल में कार्य नहीं कर सकेंगे.
- यह निर्णय 7 निश्चय-3 कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग के प्रस्ताव पर राज्य सरकार की सहमति से लिया गया है.
Govt Doctors Private Practice Banned: बिहार में अब सरकारी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे. यदि कोई सरकारी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस करता हुआ मिला तो उसपर नियमानुसार कार्रवाई होगी. बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने सरकारी डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. बिहार सरकार के सचिव लोकेश कुमार सिंह के हस्ताक्षर से संबंधित आदेश जारी किया गया है.
विस्तृत दिशा-निर्देश जल्द किया जाएगा जारी
बिहार सरकार के आदेश के अनुसार अब राज्य में कोई भी सरकारी डॉक्टर प्राइवेट क्लिनिक नहीं चला सकेंगे. साथ ही किसी प्राइवेट हॉस्पिटल में भी वो काम नहीं कर सकेंगे. राज्य सरकार ने सरकारी डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस पर प्रतिबंध लगाने संबंधी संकल्प जारी कर दिया है. सरकारी चिट्ठी में यह भी लिखा गया कि सरकार जल्द ही इस दिशा में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगी.
सात निश्चय-3 के कार्यक्रमों के आधार पर लिया गया फैसला
सरकारी डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाने संबंधी जारी सरकारी चिट्ठी में बताया गया कि यह फैसला राज्य सरकार के सात निश्चय- 3 के अंतर्गत घोषित कार्यक्रम के तहत लिया गया है. मालूम हो कि सात निश्चय-3 की कंडिका 5 (च) के तहत एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति अन्तर्गत कार्यरत् बिहार स्वास्थ्य सेवा संवर्ग, बिहार चिकित्सा शिक्षा सेवा संवर्ग तथा इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान चिकित्सा सेवा संवर्ग के चिकित्सकों / चिकित्सक शिक्षकों के निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने हेतु स्वास्थ्य विभाग के प्रस्ताव पर राज्य सरकार की सहमति बन गई है.
सरकारी आदेश में बताया गया कि इस संकल्प के क्रियान्वयन के लिए चिकित्सकों को गैर व्यावसायिक भत्ता (NPA) / प्रोत्साहन राशि दिए जाने के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश सक्षम प्राधिकार के अनुमोदन के उपरांत अलग से निर्गत किया जाएगा.
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