नई दिल्ली सीट का क्या है समीकरण? शीला दीक्षित को पछाड़कर केजरीवाल ने कायम की थी बादशाहत

नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र दिल्ली के केंद्र में स्थित है और इसमें वीआईपी इलाके शामिल हैं, जैसे कनॉट प्लेस, लुटियन्स दिल्ली, और सरकारी कार्यालयों वाले क्षेत्र.

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नई दिल्ली:

साल 1991 में, भारतीय संसद ने 69वां संविधान संशोधन अधिनियम पारित कर दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) का दर्जा मिला और दिल्ली में सीमित शक्ति वाली विधान सभा बनायी गयी. राज्य में पहला विधानसभा चुनाव साल 1993 में हुआ. 2025 की शुरुआत में एक बार फिर विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं.  दिल्ली में विधानसभा की 70 सीटें हैं.  आज हम बात कर रहे हैं दिल्ली की सबसे हॉट सीट मानी जानी वाली नई दिल्ली सीट की. यह सीट प्रतिष्ठित सीटों में से एक है, क्योंकि यह कई बार मुख्यमंत्री और प्रमुख राजनीतिक नेताओं का चुनाव क्षेत्र रही है. 

नई दिल्ली सीट का क्या है समीकरण? 
नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र दिल्ली के केंद्र में स्थित है और इसमें वीआईपी इलाके शामिल हैं, जैसे कनॉट प्लेस, लुटियन्स दिल्ली, और सरकारी कार्यालयों वाले क्षेत्र. इस विधानसभा क्षेत्र के अधिकतर मतदाता शिक्षित और आर्थिक रूप से संपन्न हैं, सरकारी अधिकारी, व्यवसायी जैसे वोटर्स की संख्या यहां अधिक है.

 बात अगर जातीय समीकरण की करें तो नई दिल्ली सीट पर ब्राह्मण समुदाय का प्रभावशाली वोट बैंक है.यह समुदाय भाजपा और कांग्रेस का परंपरागत समर्थक रहा है, लेकिन हाल के चुनावों में आम आदमी पार्टी ने भी इसमें पैठ बनाई है. पंजाबी और खत्री समुदाय का भी वोट इस सीट पर रहा है. सरकारी कर्मचारी और सेवा क्षेत्र में काम करने वाले दलित मतदाताओं की भी अच्छी संख्या है. 

नई दिल्ली सीट पर अब तक का चुनावी इतिहास
दिल्ली में अब तक हुए 7 विधानसभा चुनावों में से इस सीट पर एक बार भारतीय जनता पार्टी, 3 बार कांग्रेस और 3 बार आम आदमी पार्टी को जीत मिली है. 7 में से 6 चुनावों में जीतने वाले उम्मीदवार दिल्ली के सीएम भी बने हैं.  साल 1993 के पहले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के कुंवर सेन चुनाव जीतने में सफल रहे थे. हालांकि 1998,2003 और 2008 के चुनावों में कांग्रेस उम्मीदवार शीला दीक्षित चुनाव जीतने में सफल रही.  2013 में अन्ना आंदोलन के बाद हुए चुनाव में अरविंद केजरीवाल ने शीला दीक्षित को हराकर दिल्ली सीट पर अपनी बादशाहत कायम की थी. पिछले 3 चुनाव से उन्हें जीत मिल रही है.

सालविधायक का नामपार्टी
1993कुंवर सेनबीजेपी
1998शीला दीक्षितकांग्रेस
2003शीला दीक्षितकांग्रेस
2008शीला दीक्षितकांग्रेस
2013अरविंद केजरीवालआम आदमी पार्टी
2015अरविंद केजरीवालआम आदमी पार्टी
2020अरविंद केजरीवालआम आदमी पार्टी

नई दिल्ली सीट का क्या है प्रमुख चुनावी मुद्दा?
नई दिल्ली सीट पर राष्ट्रीय मुद्दों के साथ-साथ कुछ स्थानीय मुद्दे भी हावी रहते हैं. इस क्षेत्र में बिजली की उपलब्धता और मुफ्त बिजली योजना (आम आदमी पार्टी की पहल) बड़ा मुद्दा रहा है. पीने योग्य पानी की गुणवत्ता और पर्याप्त आपूर्ति भी चुनाव में मुद्दा बनता रहा है. नई दिल्ली सीट पर सफाई और कचरा प्रबंधन एक बड़ी समस्या है. नई दिल्ली के व्यस्त इलाकों, जैसे कनॉट प्लेस और लुटियंस जोन, में ट्रैफिक जाम और पार्किंग एक गंभीर समस्या है. चुनाव में यह मुद्दा बन सकता है. दिल्ली की वायु गुणवत्ता में गिरावट यहाँ के प्रमुख मुद्दों में से एक है. 

इस चुनाव में क्या है संभावना?
इस विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल एक बार फिर चुनावी मैदान में हैं. अरविंद केजरीवाल को टक्कर देने के लिए कांग्रेस की तरफ से शीला दीक्षित के पुत्र संदीप दीक्षित को मैदान में उतारा है. भारतीय जनता पार्टी की तरफ से अभी उम्मीदवार की घोषणा नहीं हुई है. आम आदमी पार्टी की तरफ से ऐलान किया जा चुका है कि इस चुनाव के बाद एक बार फिर अरविंद केजरीवाल ही मुख्यमंत्री बनेंगे. 

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