- राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों धड़े के बीच विलय को लेकर सहमति बन गयी थी
- अजीत पवार ने निधन से पहले शरद पवार के साथ पार्टी विलय का निर्णय ले लिया था
- शरद पवार और अजीत पवार के वरिष्ठ नेताओं ने विलय की पुष्टि की है तथा अंतिम बैठकें भी हो चुकी हैं
राष्ट्रवादी कांग्रेस के दोनों गुटों का विलय तय है और जिला परिषद चुनावों के बाद इसकी औपचारिक घोषणा हो सकती है. इस सिलसिले में एनसीपी (अजीत पवार) और एनसीपी (शरद पवार) के नेताओं के बीच हाल ही में अंतिम बैठकें भी हो चुकीं थीं. दोनों ही पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं ने महाराष्ट्र की सियासत में होने जा रहे इस बडे सियासी घटनाक्रम की पृष्टि की है.
एनसीपी के अध्यक्ष और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार का भले ही बुधवार को एक विमान हादसे में निधन हो गया हो लेकिन अपनी मृत्यु से पहले वे अपनी पार्टी का अपने चाचा शरद पवार की पार्टी के साथ विलय का रास्ता साफ कर चुके थे. इस सिलसिले में उन्होने दिसंबर और जनवरी के महीने में शरद पवार के साथ बैठकें भी की थीं जिनमें दोनों पार्टियों के विलय का फैसला लिया गया था. फरवरी के पहले हफ्ते में होने वाले जिला परिषद चुनाव के बाद एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिये विलय का औपचारिक ऐलान शरद पवार और अजीत पवार करने वाले थे.
तमाम दिग्गज नेता कर रहे हैं खबर की पुष्टि
राजेश टोपे, जो कि शरद पवार वाली एनसीपी के बडे नेता हैं और उद्धव ठाकरे की महाविकास आघाडी में स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं ने इस खबर की पृष्टि करते हुए कहा कि विलय का फैसला अजीत पवार की मौजूदगी में ले लिया गया था और वे खुद इसके गवाह हैं. इस सिलसिले में अंतिम बैठकें भी हो चुकीं थीं. शरद पवार की पार्टी के एक और बडे नेता जयंत पाटिल ने भी इस खबर पर मुहर लगाई कि दोनों पार्टियों के बीच विलय को लेकर बैठकें हुई थी और जल्द ही औपचारिक ऐलान होने वाला था.
शरद पवार से फैसला लेने की हो रही है मांग
अजीत पवार की एनसीपी के नेताओं ने भी इस खबर की तस्दीक की है कि दोनों पार्टियां साथ आ रहीं हैं. राज्य के एफडीए मंत्री नरहरि झिरवल ने कहा है कि शरद पवार इस बारे में जल्द से जल्द फैसला लें. उन्होने सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाने की मांग भी की है.
दोनों पार्टियां साथ आयेंगी इसके संकेत इसी महीने हुए महानगरपालिका के चुनाव के दौरान ही मिल गये थे जब पुणे और पिंपरी चिंचवड में दोनों दलों ने राज्य स्तर पर हुए अपने अपने गठबंधनों से बाहर निकल कर गठजोड़ कर लिया था. इसके अलावा फरवरी के पहले हफ्ते में होने जा रहे जिला परिषद चुनावों में सभी 12 सीटों पर दोनों पार्टियों ने गठबंधन कर लिया था. इस दौरान विलय की खबरों को और ज्यादा वजन तब मिला जब शरद पवार की एनसीपी ने कई जगहों पर अजीत पवार की एनसीपी के चुनाव चिन्ह्र पर अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला लिया था. बताते चलें कि शरद पवार की पार्टी का चुनाव चिन्ह्र तुरही है.
2023 में अजित पवार ने कर दी थी बगावत
1999 में कांग्रेस से टूट कर शरद पवार ने एनसीपी स्थापित की थी. उनके भतीजे अजीत पवार ने जुलाई 2023 में पार्टी में बगावत कर दी और उनका धडा सत्ताधारी महायुति के साथ जुडकर सरकार में शामिल हो गया. शरद पवार के कई खासमखास नेता जैसे प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और दिलीप वलसे पाटिल भी अजीत पवार के खेमें में चले गये. महानगरपालिका चुनाव में दोनों पार्टियों के खराब प्रदर्शन के बाद उनके विलय से जुडे घटनाक्रमों में तेजी आयी.
उम्मीद की जा रही है कि अगले हफ्ते तक दोनों पार्टियों के नेता फिर एक बार बैठेंगे और विलय पर अंतिम मुहर लगायी जायेगी. अगर सबकुछ ठीक रहा तो फरवरी के दूसरे हफ्ते में विलय की औपचारिक घोषणा हो सकती है. इस बात को लेकर फिलहाल सस्पेंस है कि विलय होने के बाद एक हुई पार्टी की कमान किसके हाथ होगी. इसको लेकर शरद पवार के अलावा सुप्रिया सुले, सुनेत्रा पवार और प्रफुल्ल पटेल के नामों की चर्चा हो रही है.
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