तेलंगाना में माओवाद को बड़ा झटका: 20 लाख के इनामी सोडी केशालु समेत 41 नक्सलियों का आत्मसमर्पण

Top Maoist Leader Surrender:तेलंगाना में नक्सल संगठन अब पूरी तरह से टूट चुका है. सोमवार को 20 लाख के इनामी कमांडर सोडी केशालु ने 40 साथियों के साथ सरेंडर किया है. सोड़ी केशालु सीनियर माओवादी नेता देवा के बाद इस इलाके का दूसरा सबसे ताकतवर कमांडर माना जाता था.

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Telangana Naxal Surrender:तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमा पर छिटपुट बचे नक्सलियों को फिर बड़ा झटका लगा है. पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) के टॉप कमांडर सोडी केशालु उर्फ सोडी केशा ने सोमवार को अपने 40 साथियों के साथ तेलंगाना पुलिस के सामने हथियार डाल दिए हैं. इसे बस्तर और उससे सटे सीमावर्ती इलाकों में माओवादी नेटवर्क के खात्मे की दिशा में एक और बड़ी कामयाबी माना जा रहा है. आत्मसमर्पण करने वाले इस समूह में सिर्फ आम कैडर ही नहीं, बल्कि डिवीजनल कमेटी मेंबर और एरिया कमेटी लीडर्स जैसे रसूखदार नाम भी शामिल हैं. इन सभी ने हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया है.

हथियारों का बड़ा जखीरा भी लाए साथ

नक्सलियों ने आत्मसमर्पण के दौरान पुलिस को भारी मात्रा में घातक हथियार भी सौंपे हैं. इनमें एके-47 राइफल्स, इंसास और एसएलआर जैसे अत्याधुनिक हथियार शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल सुरक्षाबलों के खिलाफ हमले में किया जाता था.

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, केशालु करीब 20 से 30 कैडर्स के उस दस्ते को लीड कर रहा था जो कर्रेगुट्टा की दुर्गम पहाड़ियों में छिपा हुआ था. केशालु पर करीब 20 लाख रुपये का इनाम घोषित था और उसे सीनियर माओवादी नेता देवा के बाद इस इलाके का दूसरा सबसे ताकतवर कमांडर माना जाता था.

पूरी तरह टूट चुका है नक्सल संगठन

तेलंगाना में इस साल बड़े कमांडरों के सरेंडर करने का सिलसिला लगातार जारी है. सबसे पहले 2 जनवरी को PLGA बटालियन-1 के कमांडर बरसा देवा उर्फ देवन्ना ने आत्मसमर्पण किया था. इसके बाद 22 फरवरी को संगठन को तब सबसे बड़ी चोट पहुंची जब 40 सालों से सक्रिय पोलित ब्यूरो सदस्य और सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के दिग्गज नेता थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी ने 20 कैडर्स के साथ सरेंडर कर दिया. देवजी के साथ मल्ला राजी रेड्डी जैसे बड़े चेहरों का मुख्यधारा में आना यह बताता है कि अब संगठन पूरी तरह से टूट चुका है.

बैकफुट पर माओवादी नेटवर्क

जानकारों का मानना है कि सोडी केशालु और देवजी जैसे बड़े नेताओं का एक के बाद एक सरेंडर करना यह संकेत है कि तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में अब माओवादी लगभग खत्म हो चुके हैं. पुलिस की बढ़ती दबिश और विकास की योजनाओं के कारण कैडर्स के बीच अलगाव बढ़ रहा है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन बड़े आत्मसमर्पणों से न केवल संगठन की खुफिया जानकारी हाथ लगी है, बल्कि इससे निचले स्तर के लड़ाकों का मनोबल भी बुरी तरह गिर गया है.
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