माइनस 40 डिग्री में गश्त करेंगे 'नागपुर के रोबोट', भारत के 'भार्गवास्त्र' से कांपेंगे दुश्मन के ड्रोन

नागपुर का सोलर ग्रुप अगले साल तक भारत का पहला रोबोट तैयार कर लेगा, जो माइनस 40 डिग्री में भी सीमा की रक्षा करेगा. साथ ही 'भार्गवास्त्र' नामक दुनिया का अनोखा एंटी-ड्रोन सिस्टम भी सेना में शामिल होने जा रहा है.

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  • अगले साल नागपुर में विकसित पहला रोबोट तैयार होगा जो माइनस 40 डिग्री की ठंड में सीमा पर गश्त करेगा
  • सोलर ग्रुप ने सोलर रोबोटिक्स और यूएवी यूनिट का भूमिपूजन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और नितिन गडकरी ने किया
  • भारत में भार्गवास्त्र नामक अनूठा एंटी-ड्रोन सिस्टम अगले कुछ महीनों में सक्रिय होगा
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माइनस 40 डिग्री की कड़ाके की ठंड में भी सीमा पर गश्त करने के लिए भारतीय रोबोट अगले साल नागपुर से आएंगे. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को नागपुर में यह बात कही थी. उसकी पुष्टी करते हुए नागपुर के सोलर ग्रुप के अध्यक्ष सत्यनारायण नुवाल ने बताया कि अगले वर्ष ऐसे पहले रोबोटिक जवान का प्रोटोटाइप बनकर तैयार हो जाएगा.

शनिवार को नागपुर के सोलर ग्रुप द्वारा 'सोलर रोबोटिक्स और यूएवी विनिर्माण परियोजना' (Solar Robotics and UAV Manufacturing Project) का भूमिपूजन किया गया. यह भूमिपूजन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के हाथों संपन्न हुआ. इसी परियोजना के माध्यम से अगले साल तक ऐसा पहला रोबोट तैयार होगा, जो भारत की सीमा पर माइनस 40 डिग्री की कड़ाके की ठंड में भी गश्त करने में सक्षम होगा.

एक साल में तैयार हो जाएगा प्रोजेक्ट
NDTV से एक खास बातचीत के दौरान सत्यनारायण नुवाल ने कहा कि एक साल में यह फैसिलिटी पूरी होगी और उसके बाद 2 महीने में प्रोटोटाइप रोबोट पूरा कर लेंगे. उत्तर पूर्वी सीमा पर जहां हमारे जवान माइनस 40 डिग्री कड़ाके की ठंड में गश्त देते हैं वहीं सीमापार रोबोट दिखाई देते हैं. जब कुछ महीने पहले हमने सुना कि चाइना ने रोबोट बनाया, वियतनाम ने बनाया और आज भी विपरीत परिस्थिति में हमारे जवान गस्त लगाते हैं, ये सोच के ये काम शुरु किया. उतनी ठंड में हमारे जांबाज जवानों के बजाय हमारा रोबोट वहां काम करे यह योजना है.

भारत बना रहा दुनिया का सबसे अनोखा एंट्री ड्रोन सिस्टम
इतना ही नहीं, दुनिया का सबसे अनोखा एंटी-ड्रोन सिस्टम अगले कुछ ही महीनों में चालू होने की संभावना है. उन्होंने बताया कि अगले चार-पांच महीनों में भारत में 'भार्गवास्त्र' नामक एक ऐसी पहला और अनूठा एंटी-ड्रोन सिस्टम सक्रिय होने जा रहा है, जो विकसित देशों के पास मौजूद सिस्टम से भी अलग और खास होगा. दुश्मन के ड्रोन हमलों को नाकाम करने के लिए इससे एक साथ साठ छोटी लेकिन अचूक मिसाइलें दागी जा सकेंगी.

उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत का यह पहला एंटी-ड्रोन सिस्टम 'भार्गवास्त्र' कई मायनों में दुनिया का पहला सिस्टम साबित होगा. इस सिस्टम के अब तक गोपालपुर और पोखरण में कुल चार सफल परीक्षण हो चुके हैं और आवश्यक रडार जल्द ही मिल जाएगा, जिसके चार महीने बाद यह एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनाती के लिए तैयार होगा.

देरी के कारणों की बात करते हुए उन्होंने बताया कि किसी कारण से एक रडार की प्रतीक्षा है. चार महीने में डिलीवरी की बात की थी लेकिन अब सोलह महीने हो गए. अब वो कह रहे हैं कि एक हफ्ते में डिलीवरी करेंगे. केवल उस रडार के लिए रुके हैं.पूरा भार्गवास्त्र तैयार है. रडार आनेके बाद 2 या 3 महीने लगेंगे. यह हमारे कंपनी के लिए ही नहीं पूरे देश के लिए बहुत बड़ी बात होगी.

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क्या है इसकी खासियत?
यह पूछे जाने पर कि दुनिया में इजरायल जैसे देशों के पास जो एंटी ड्रोन सिस्टम हैं, उससे ये कैसे अलग है? उन्होंने कहा कि इसमें जो रॉकेट और मिसाइल है उसकी लंबाई 700mm है और पौने चार किलो वजन है. इसी में गाइडिंग सिस्टम है, सीकर है. यानी जो एक बड़े से बड़े मिसाइल में होता है वो सभी सिस्टम इसमें हैं. इसकी सबसे खास बात यह है कि इससे एक साथ 64 मिसाइल फायर की जा सकती हैं. लेकिन अगर जरूरत केवल एक मिसाइल की हो, तो वो भी इससे फायर की जा सकती है. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि ऐसा सिस्टम अब तक कहीं नहीं बना है.

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उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सेना ने हमें 2.5 किलोमीटर की दूरी का लक्ष्य दिया था, लेकिन हमने 5 किलोमीटर की क्षमता वाला सिस्टम बनाया है, जिसे भविष्य में 30 किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है.

NDTV से बातचीत करते हुए उन्होंने अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच हुई जंग का हवाला देते हुए कहा कि उस जंग से यह साबित हो गया कि भविष्य में युद्ध मशीनें लड़ेंगी. फिर वे ड्रोन हों या रोबोट. ऐसे में हमें आगे आकर यह जिम्मेदारी संभालनी होगी. भारत के युवा वैज्ञानिक और उद्योग जगत से उन्होंने उम्मीद जताई है कि हमारे देश में इतना टैलेंट है जो विदेशों की कंपनियों में नए उत्पाद तैयार करता है, उसे अपने देश के विषय में सोचना चाहिए.

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उन्होंने कहा कि मसलन, मिसाइल्स में जो सॉफ्टवेयर होता है वह हम खुद बनाते हैं उसी तरह सेंसर और चिप्स की आवश्यकता होती है उन्हें भारत में ही बनाने के लिए कोई रास्ता ढूंढा जाए तो बेहतर होगा. दूसरी तरफ अन्य उद्योगों में जो रोबोट हैं, या सेंसर और चिप्स हैं उन्हें कहीं से भी पार्ट्स लाकर बना सकते लेकिन रक्षा क्षेत्र में हम दूसरों पर निर्भर नहीं रह सकते. आज पोलैंड और टर्की जैसे छोटे देश रक्षा के कुछ तकनीक क्षेत्र में आगे निकल चुके हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यही फोकस भी है. लेकिन, देश के बारे में सोचने का काम अकेले प्रधानमंत्री का नहीं बल्कि हम सबका है.

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