नगालैंड की इस संस्था ने किया लोकसभा चुनाव के बहिष्कार का फैसला, जानें क्या है वजह?

"सार्वजनिक आपातकाल" के दौरान, नगालैंड (Nagaland) की सात नागा जनजातियों की सर्वोच्च संस्था ईएनपीओ और इसके प्रमुख संगठन किसी भी चुनाव अभियान (LokSabha Elections 2024) की अनुमति नहीं दे रहे हैं.

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नगालैंड के ईएनपीओ ने किया लोकसभा चुनाव के बहिष्कार का फैसला.
नई दिल्ली:

लोकसभा चुनाव नजदीक हैं लेकिन नगालैंड (Nagaland) का एक समूह अब भी चुनावों के बहिष्कार के अपने फैसले पर अड़ा हुआ है. नगालैंड के एक समूह ने अग राज्य की मांग करते हुए लोकसभा चुनाव (Lok Sabha elections) के बहिष्कार का ऐलान किया है. दरअसल ईस्टर्न नागालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (ईएनपीओ) ENPO नगालैंड के छह जिलों को मिलाकर एक अलग प्रशासन या राज्य की मांग कर रहा है. उसका कहना है कि जब तक उसकी मांग पूरी नहीं होती वह राज्य की एकमात्र लोकसभा सीट के चुनाव में हिस्सा नहीं लेने के अपने फैसले पर अड़ा रहेगा.

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लोकसभा चनावों के बहिष्कार का ऐलान

गुरुवार को तुएनसांग में 20 विधायकों और विभिन्न अन्य संगठनों के साथ मैराथन क्लोज डोर कॉर्डिनेशन बैठक के बाद, ईएनपीओ नेताओं ने शुक्रवार को एक बार फिर राज्य में 19 अप्रैल को होने वाले लोकसभा चनावों के बहिष्कार का ऐलान किया. 20 विधायकों वाले पूर्वी नगालैंड विधायक संघ ने पहले ही ईएनपीओ से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की थी. नगालैंड के पूर्वी हिस्से में 8 मार्च से शुरू हुआ 'सार्वजनिक आपातकाल' जारी रहेगा.

"सार्वजनिक आपातकाल" के दौरान, क्षेत्र की सात नगा जनजातियों की सर्वोच्च संस्था ईएनपीओ और इसके प्रमुख संगठन किसी भी चुनाव अभियान की अनुमति नहीं दे रहे हैं. छह जिलों में शीर्ष नगा निकाय ENPO और उससे जुड़े संगठनों ने अपनी अलग राज्य की मांग के समर्थन में पिछले साल (27 फरवरी) को विधानसभा चुनावों के बहिष्कार का भी आह्वान किया था, लेकिन बाद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आश्वासन के बाद उन्हें अपने फैसले को वापस ले लिया था. 

विधानसभा चुनावों में भी मांग पर अड़ा था ईएनपीओ 

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ईएनपीओ की मांग पर पिछले साल पूर्वोत्तर के सलाहकार ए.के. मिश्रा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था. उनको नगा जनजातियों की मांगों को समझने के लिए कहा गया था. इस दौरान पैनल ने कई बार नगालैंड का दौरा कर सभी पक्षों से बात की थी.नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने हाल ही में कहा कि राज्य सरकार ने पहले ही केंद्र से सिफारिश की है कि पूर्वी क्षेत्र के लोगों के लिए एक स्वायत्त क्षेत्र स्थापित किया जाए. 

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बता दें कि ईएनपीओ ने पहले ही सार्वजनिक आपातकाल का ऐलान करते हुए कहा था कि लोकसभा चुनाव का प्रचार करने की परमिशन किसी भी दल को नहीं दी जाएगी. बता दें कि ईएनपीओ आदिवासी निकायों और दूसरे संगठनों के साथ मिलकर नगालैंड के पूर्वी हिस्से के 6 जिलों को मिलाकर एक अलग राज्य की मांग कर रहा है.
 

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