हिंदू और क्रिश्चियन के बीच अटका अंतिम संस्कार, मौत के 48 घंटे बाद भी घर में पड़ा शव, क्या है विवाद?

Odisha Hindi News: मृत महिला के परिवार ने हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपना लिया था. इस कारण गांव के कुछ लोग श्मशान घाट में अंतिम संस्कार नहीं करने दे रहे हैं. गांववालों का कहना है कि अंतिम संस्कार तभी होगा, जब वह हिंदू रीति-रिवाजों से किया जाएगा.

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Nabarangpur Funeral Controversy: प्रशासन की समझाइश के बाद भी नहीं मान रहे दोनों पक्ष.

Nabarangpur News: ओडिशा के नबरंगपुर जिले में एक परिवार को उनके मृत रिश्तेदार के अंतिम संस्कार की जगह नहीं दी गई. जिससे मौत के 48 घंटे बाद भी अंतिम संस्कार नहीं हो सका.  गांववालों ने स्थानीय श्मशान घाट में उसका अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया. यह पूरा विवाद हिंदू और ईसाई धर्म से जुड़ा है.   

जानकारी के अनुसार, जिले के उमरकोट ब्लॉक के कोपेना पंचायत के एंड्री गांव में 56 साल की मानिक सांता की सोमवार शाम करीब 7 बजे मौत हो गई. धर्म परिवर्तन के विवाद के कारण दो दिन से उनका शव घर में ही रखा हुआ है. ग्रामीण परिवार को अंतिम संस्कार नहीं करने दे रहे हैं. 

परिवार ने अपना लिया था ईसाई धर्म 

इसका सबसे बड़ा कारण यह बताया जा रहा है कि मृत महिला के परिवार ने हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपना लिया था. इस कारण गांव के कुछ लोग श्मशान घाट में अंतिम संस्कार नहीं करने दे रहे हैं. गांववालों का कहना है कि अंतिम संस्कार तभी होगा, जब वह हिंदू रीति-रिवाजों से किया जाएगा.

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दूसरे धर्म के लोगों के लिए शमशान घाट नहीं 

ग्रामीणों का कहना है कि "श्मशान घाट गांव का है और हम दूसरे धर्म को मानने वालों को इसका इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दे सकते." मामला संवेदनशील है, स्थानीय प्रशासन लगातार विवाद सुलझाने का प्रयास कर रहा है लेकिन, अब तक विवाद सुलझ नहीं सका है. उमरकोट पुलिस, तहसीलदार और ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर समेत अन्य अधिकारी मौके पर मौजूद है. दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन कोई भी अपनी बात से पीछे हटने को तैयार नहीं है.

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हम सिर्फ अंतिम संस्कार करना चाहते हैं 

पीड़ित परिवार का कहना है कि "हम सालों से इस गांव में रह रहे हैं. हमारे बुनियादी अधिकारों को दबाया जा रहा है. हम सिर्फ सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करना चाहते हैं."

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