मुंबई के मीरा रोड इलाके में हुए नयानगर स्टैबिंग केस में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाली बातें सामने आ रही हैं. महाराष्ट्र एटीएस की पूछताछ में यह बात सामने आई है कि आरोपी जुबैर अंसारी कथित तौर पर आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) से जुड़ना चाहता था, लेकिन जब उससे संपर्क नहीं हो पाया तो उसने खुद ही ‘लोन वुल्फ' हमला करने का फैसला कर लिया.
जांच एजेंसियों सूत्रों के मुताबिक, अंसारी पिछले करीब चार महीने से डार्क वेब और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म के जरिए ISIS तक पहुंचने की कोशिश कर रहा था. लेकिन बार-बार कोशिशों के बावजूद उसे कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद उसने सोचा कि अगर वो खुद हमला करेगा, तो शायद संगठन का ध्यान उसकी तरफ जाएगा.
घर से मिला खत, ISIS के समर्थन में लिखी बातें
एटीएस को आरोपी के घर से एक हस्तलिखित खत भी मिला है, जिसमें उसने ISIS के प्रति निष्ठा (बैअत) जताई थी और संगठन का झंडा भी बनाया था. इस नोट में भड़काऊ बातें लिखी गई थीं. नोट में गैर-मुस्लिमों को निशाना बनाने की चेतावनी दी गई थी और “लोन वुल्फ” हमलों का जिक्र किया गया था.
उसने अपने नोट में ‘गाजा', ‘खिलाफत' और ‘जिहाद' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए दूसरे युवाओं को भी इस रास्ते पर आने के लिए उकसाने की कोशिश की थी. साथ ही उसने खुद को “घुरबा” यानी समाज से अलग-थलग और अकेला बताया है.
मानसिक हालत भी थी अस्थिर
सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान वह डिप्रेशन में चला गया और धीरे-धीरे कट्टरपंथी ऑनलाइन कंटेंट की तरफ झुकाव बढ़ गया. वह खुद भी इस बात को लेकर उलझन में था कि आत्महत्या करे या फिर 'जिहादी' बनने की कोशिश करे.
हमला कैसे हुआ?
जांच एजेंसी सूत्रों का कहना है कि आरोपी ने घटना से कुछ समय पहले चाकू खरीदा था. वह खुद को नुकसान पहुंचाने और हमला करने के बीच झूल रहा था. आखिरकार उसने हमला करने का रास्ता चुना. बताया जा रहा है कि उसने दो सिक्योरिटी गार्ड्स से पहले उनका धर्म पूछा और फिर उन पर चाकू से हमला कर दिया.
ऑनलाइन कट्टरपंथ का असर
एटीएस सूत्रों के अनुसार, आरोपी तेजी से ऑनलाइन रेडिकलाइज हुआ था. उसके घर के दरवाजे पर कुरान की आयतों वाले स्टिकर भी लगाए गए थे, जिनमें घर में प्रवेश के नियम लिखे थे. इसे भी उसकी मानसिक और वैचारिक स्थिति के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है.
आरोपी का बैकग्राउंड
जांच में सामने आया है कि अंसारी का जीवन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है.उसका जन्म मुंबई के कुर्ला में हुआ था. वह 6 साल की उम्र में अमेरिका चला गया. फिर वहां उसने केमिस्ट्री में पढ़ाई की और स्पोर्ट्स टीचर के तौर पर काम किया. वीजा खत्म होने के बाद 2019 में भारत लौट आया,2023 में मीरा रोड में किराए पर रहने लगा. परिवार की आर्थिक हालत भी कमजोर बताई जा रही है. उसके पिता उबर ड्राइवर हैं, जबकि मां गृहिणी हैं.
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