- महाराष्ट्र महानगर पालिका चुनाव में 46 से 50 प्रतिशत मतदान हुआ और कई एजेंसियों ने एग्जिट पोल जारी किए हैं.
- सभी एग्जिट पोल में बीजेपी प्लस को स्पष्ट बहुमत मिलने और ठाकरे परिवार के दबदबे के खत्म होने का अनुमान है.
- NDTV पर एग्जिट पोल पर चर्चा के दौरान एक्सपर्ट ने बीएमसी चुनाव के नतीजों पर चर्चा की.
BMC Poll 2026 Exit Poll: महाराष्ट्र महानगर पालिका चुनाव के लिए गुरुवार को मतदान संपन्न हुआ. राज्य निर्वाचन आयोग के मुताबिक 46 से 50 प्रतिशत तक मतदान हुआ है. मतदान की समाप्ति के बाद Axis My India, JVC, सकाल और प्रजा पोल्स ने एग्जिट पोल जारी किए. इन सभी के एग्जिट पोल में एशिया की सबसे बड़ी और अमीर नगर निगम मुंबई BMC से 27 साल बाद ठाकरे का दबदबा खत्म होने की बात कही गई है. सभी एग्जिट पोल में BJP प्लस को स्पष्ट बहुमत से सत्ता में आने की बात कही गई है. इस एग्जिट पोल पर चर्चा के लिए NDTV पर मुंबई की राजनीति को समझने वाले कई एक्सपर्ट बैठें. इन लोगों ने बताया कि इस बार के मतदान के क्या सियासी मायने हैं?
BJP को महिलाओं का ज्यादा वोट, एक्सपर्ट बोले- ऐसा क्यों?
एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल के अनुसार 44 फीसदी महिलाओं ने बीजेपी प्लस को वोट दिया है. उद्धव ठाकरे प्लस को 31 फीसदी, कांग्रेस को 13 फीसदी और अन्य को 12 फीसदी महिलाओं को मत मिलने का अनुमान जताया गया.
बीजेपी के लिए महिलाओं की बंपर वोटिंग पर वरिष्ठ पत्रकार समीर चौगांवकर ने कहा कि यह बात तय थी कि महायुति को महिलाओं का वोट ज्यादा मिलेगा. एग्जिट पोल बताता है कि महिलाओं में लाडकी बहिण योजना की अभी भी लोकप्रियता है. साथ ही पीएम मोदी और देवेंद्र फडणवीस की लोकप्रियता भी महिलाओं में काफी ज्यादा है. उन्होंने बताया कि डायरेक्ट बेनिफिट स्कीम से महिलाओं को मिलने वाले फायदे का असर है.
मयूर पारिख बोले- मैंने जो महसूस किया वही एग्जिट पोल में दिख रहा
बीएमसी एग्जिट पोल पर NDTV पर चर्चा कर रहे वरिष्ठ पत्रकार मयूर पारिख ने कहा, "मैं इस डाटा से पूरी तरह से सहमत हूं. आज सुबह से मैं खुद आज करीब 50 से 55 बूथों पर घूमा हूं. मुझे जो महसूस हुआ वहीं इस एग्जिट पोल के डाटा में नजर आ रहा है." उन्होंने बताया कि शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ताओं को मैंने चैनलाइज वे में वोटरों को बूथ तक भेजते देखा. मुस्लिम, ईसाई सहित अन्य अल्पसंख्यक भी जमकर वोट करते दिखे. कई लोगों के नाम कट गए थे, वो खोज-खोज कर वोटिंग करते दिखे. उन्होंने बारिश का उदाहरण देते हुए कहा कि पूरे दिन बीजेपी के वोटर बूथों पर मतदान करते रहे.
मयूर पारिख ने कहा कि टैक्स देते वाले लोगों ने बीजेपी और शिंदे गुट को वोट किया है. लेकिन स्लम एरिया में कांग्रेस, उद्धव ठाकरे को वोट किया है. साथ ही अल्पसंख्यक इलाकों में कांग्रेस को जमकर वोट पड़े हैं. लेकिन बहुलता में बीजेपी प्लस के लिए बड़े समर्थन की झलक मिलती नजर आई है.
मराठी और गैर मराठी का मुद्दा
एक्सपर्ट का मानना है कि इस चुनाव में ठाकरे भाइयों के साथ आने से मराठी और गैर-मराठी का मुद्दा बड़ा बना. दोनों भाई एकजुट होकर एक सीमित वोट बैंक के पीछे गई. लेकिन राजनीति में यह कारगर नहीं होता. भाजपा के पास भी एकनाथ शिंदे के गुट वाली शिवसेना है. जिससे बीजेपी प्लस को गैर मराठियों के साथ-साथ मराठियों का भी वोट मिला. जिससे बीएमसी चुनाव में बड़ा बदलाव होने की संभावना है.
शिवसेना शिंदे गुट की नेता बोली- महायुति का झंडा लहराएगा
शिवसेना शिंदे गुट की नेता कि हर वर्ग, हर क्षेत्र के लोगों ने बीजेपी-शिवसेना को वोट किया है. मराठा मानुषों ने भी हमें जमकर वोट किया. हम साथ में लड़ रहे हैं, महायुति साथ में लड़ रहे हैं. कल जब नतीजे आएंगे तो आप देखेंगे कि हमारी जीत होगी. शिवेसना नेता एनडीटीवी पर स्वीकार किया कि बीजेपी को ज्यादा सीटों पर जीत मिले तो मेयर उनका बने. हम बस महायुति का झंडा लहराते देखना चाहते हैं.
एक्सपर्ट बोले- राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के साथ आने का फायदा बीजेपी को मिला
बीएमसी चुनाव के एग्जिट पोल पर वरिष्ठ पत्रकार रोहित चंद्रावकर ने कहा- राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे का साथ आने का कोई फायदा उन दोनों को नहीं मिला है. इसका फायदा बीजेपी प्लस को मिला है. क्योंकि राज ठाकरे के कारण सभी उत्तर भारतीय बीजेपी के तरह हो गए. दूसरी ओर राज ठाकरे के उद्धव ठाकरे के साथ आने से कांग्रेस गठबंधन से निकल गई. इससे यह हुआ कि एंटी बीजेपी प्लस भी बंटे.
एक्सपर्ट बोले- उद्धव ने राज ठाकरे से हाथ मिलाकर बड़ी गलती कर दी
वरिष्ठ पत्रकार समीर चौगांवकर कहते हैं, उद्धव ठाकरे ने राज ठाकरे की मनसे के साथ बड़ी भूल की है. विधानसभा और लोकसभा चुनाव उद्धव कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ते रहे हैं, लेकिन बीएमसी चुनाव में उन्होंने राज को साथी बनाया. यह बड़ी भूल है. उनके मुताबिक बीएमसी चुनाव में राज ठाकरे का पास खास कुछ था नहीं. मनसे की तुलना में मुंबई के अंदर कांग्रेस के बड़ी ताकत है. ऐसे में उद्धव ने कांग्रेस का हाथ छोड़कर बहुत बड़ी गलती की है. मनसे को लेने के कारण उद्धव ठाकरे से उत्तर भारतीयों का बड़ा वोट छिटक गया.
उद्धव को लग रहा था कि मुस्लिम वोट उनके पास आएगा, लेकिन एग्जिट पोल के नतीजे दिखा रहे हैं कि ऐसा नहीं हुआ. मुस्लिम वोट कांग्रेस ले गई. मराठी और मुस्लिम वोट पूरी तरह उन्हें नहीं मिला. चौंगावकर के मुताबिक अगर ये नतीजों में तब्दील होते हैं, तो फिर उद्धव ठाकरे की पार्टी में बड़ी टूट हो सकती है.
BJP प्लस को 131 से 151 सीटें मिल सकती है
सामने आए अगर एग्जिट पोल्स के नतीजों पर यकीन करें तो मायानगरी में बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिल रहा है. 227 वॉर्ड में बहुमत का आंकड़ा 114 का है. एक्सिस माई इंडिया के अनुसार BJP प्लस को 131 से 151 सीटें मिल सकती है. जेवीसी के एग्जिट पोल के मुताबिक बीजेपी 138 सीटें जीत सकती है.
एग्जिट पोल में उद्धव ठाकरे की शिवसेना वाला खेमा महज 59 सीटों पर सिमटता दिखाई दे रहा है. कांग्रेस को सिर्फ 23 सीटें मिलने का अनुमान जाहिर किया गया है.
एग्जिट पोल सच हुए तो सालों बाद ठाकरे का दबदबा होगा खत्म
यदि एग्जिट पोल के अनुमान सही हुए तो 74,000 करोड़ रुपए के बजट वाली एशिया की सबसे बड़ी सिविक बॉडी से सालों बाद ठाकरे का दबदबा खत्म होगा. एक्सपर्ट का कहना है कि यदि नतीजे एग्जिट पोल जैसे रहे, कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ तो यह उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा झटका होगा. रिजल्ट के बाद संभव है कि उद्धव ठाकरे गुट में बड़ी टूट भी हो.
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