अर्से बाद बंगाल में सबसे शांतिपूर्ण चुनाव, इस बार बड़े स्तर पर हिंसा क्यों नहीं हुई?

पश्चिम बंगाल में पहले चुनावों के दौरान बड़े स्तर पर हिंसा होना बहुत ही आम था लेकिन इस बार यहां पहले चरण का चुनाव गुरुवार को संपन्न हो गया जिसमें छिटपुट झड़प की खबरों के अलावा कोई बड़ी हिंसा नहीं हुई है. क्या है इसकी वजह?

विज्ञापन
Read Time: 6 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • कुछ उम्मीदवारों पर हमलों समेत छिटपुट हिंसा की घटनाओं के अलावा इस बार बंगाल का चुनाव अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहा.
  • 2023 का पंचायत चुनाव हो या 2021 का विधानसभा चुनाव, यहां काफी हिंसा देखने को मिली थी.
  • इस बार हिंसा न के बराबर होने के पीछे अहम वजहों में केंद्रीय सुरक्षा बलों की व्यापक तैनाती बताई जा रही है.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में लगभग 91.35 फीसद वोटिंग हुई है. कुल 152 निर्वाचन क्षेत्रों पर हुए मतदान के दौरान गुरुवार कुछ इलाकों से छिटपुट घटनाओं की रिपोर्ट आई हैं लेकिन इस बार मतदान का दिन अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहा है. पहले की तरह इस बार यहां बड़े स्तर पर हिंसा की घटनाएं न के बराबर हुईं. कुछ इलाकों से मतदाताओं को डराने-धमकाने जैसी खबरें और हमले की छिटपुट घटनाएं भी हुईं, पर शाम 6 बजे जब मतदान समाप्त हुए तो यह दोहरी खुशी लेकर आया. पहला तो यह कि यह अर्से बाद बंगाल में सबसे शांतिपूर्ण चुनाव रहा. वहीं दूसरा यह कि राज्य के हालिया चुनावी इतिहास में यहां रिकॉर्ड मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया.

बता दें कि पहले चरण में राज्य के 16 जिलों में मतदान से 294 सदस्यीय राज्य विधानसभा के 152 निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावी भाग्य का फैसला होगा. भीषण गर्मी और उमस के बावजूद सुबह से मतदान केंद्रों के बाहर बड़ी संख्या में लोगों की कतार देखी गई और उसका असर मतदान के प्रतिशत पर भी देखने को मिला. दोपहर 1 बजे तक ही राज्य में औसत मतदान प्रतिशत 60 से ऊपर चला गया, तो दोपहर तीन बजे तक यह 78% और शाम छह बजे तक करीब 90% हो गया.

हिंसा रोकने के लिए क्या उपाय किए गए? 

इसकी सबसे बड़ी वजह यहां केंद्रीय सुरक्षा बलों की व्यापक तैनाती की गई है. शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए बड़ी संख्या में केंद्रीय बलों को तैनात किया गया. 

राज्य में चुनाव के पहले चरण के मतदान के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की कुल 2,407 कंपनियां तैनात की गईं. इन कंपनियों में लगभग 2.4 लाख से 2.5 लाख जवान शामिल हैं, जो किसी भी राज्य के चुनाव में अब तक की सबसे बड़ी सुरक्षा तैनाती है. सबसे ज्यादा सुरक्षा बल मुर्शिदाबाद जिले में तैनात किए गए, जहां अकेले 316 कंपनियां लगाई गई हैं.

Advertisement

इससे मतदाताओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और हिंसक तत्वों पर लगाम लगी. 

इसके अलावा इस बार विशेष प्रशासनिक और न्यायिक सख्ती देखने को मिली. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने संवेदनशील क्षेत्रों में व्यवस्था बहाल करने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश दिया था. साथ ही, पुलिस ने हिंसक झड़पों के बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए कई गिरफ्तारियां भी की हैं.

साथ ही डिजिटल निगरानी और रिपोर्टिंग बढ़ गई है. इसमें सोशल मीडिया और आधुनिक संचार साधनों का उपयोग किया जा रहा है. इससे वहां स्थानीय लोग अब हिंसा की घटनाओं को तुरंत रिकॉर्ड और रिपोर्ट कर पा रहे हैं, जिससे हिंसा फैलाने पर पकड़े जाने का डर बढ़ा है.

इसके अलावा विपक्ष और जनता की जागरूकता भी इसकी एक अहम वजह रही. राजनीतिक दलों ने सुरक्षा की मांग की और जनता डरी नहीं और बढ़चढ़ कर मतदान करने बाहर निकली. हालांकि जमीनी स्तर पर हिंसा को सीमित करने में सबसे बड़ा किरदार केंद्रीय बलों की रिकॉर्ड तैनाती रही.

Featured Video Of The Day
Syed Suhail | Iran Israel War: ईरानी हमले, जहाजों पर भारतीय फंसे! |Trump |Bharat Ki Baat Batata Hoon