Monsoon Latest Update: मॉनसून के भारत में दस्तक देने में अभी और देरी हो सकती है. मौसम विभाग ने शुरुआती पूर्वानुमान में 26 मई की तारीख दी थी, जो अब बढ़कर 4 जून हो गई है, यानी मॉनसून आने में 10 दिन की देरी हो सकती है. भारत मौसम विभाग के ताजा अनुमानों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 4 जून के आसपास केरल पहुंच सकता है. अगर मॉनसून की बारिश केरल पहुंचने में देरी हुई तो दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा जैसे उत्तर भारत के इलाकों में भी बरसात आने का इंतजार और बढ़ जाएगा.
मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के जून के पहले हफ्ते में केरल और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों के अलावा साउथ वेस्ट और साउथ ईस्ट अरब सागर के कुछ और हिस्सों, लक्षद्वीप, बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों और बंगाल की खाड़ी के शेष हिस्सों में आगे बढ़ रहा है. इससे पहले 15 मई को IMD ने मॉनसून के आगमन पर पूर्वानुमान में कहा था कि ये 26 मई को केरल पहुंच सकता है.
मॉनसून सीजन 1 जून के आसपास आता है. पिछले साल मॉनसून 1 जून 2025 से 8 दिन पहले ही 24 मई को ही केरल तट पर पहुंच गया था. मॉनसून ने औसत से 9 दिन पहले 29 जून तक पूरे देश को कवर भी कर लिया था. भारत मौसम विभाग ने इस साल जून से सितंबर के बीच दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सीजन के दौरान देश के अधिकतर हिस्सों में औसत से कम बारिश होने का पूर्वानुमान जारी किया है.
Monsoon Alert
29 मई को जारी मॉनसून के पूर्वानुमान में मौसम विभाग ने कहा कि इस साल मॉनसून सीजन के दौरान देशभर में औसत के 90 फ़ीसदी बारिश होने की संभावना है. बारिश में कमी आने की संभावना भी 60 फीसदी जाहिर की थी. भारत में उत्तर भारत और मध्य भारत के साथ पश्चिम भारत का बड़ा हिस्सा मॉनसून की बारिश पर निर्भर करता है. इसका सीधा असर खरीफ सीजन के दौरान फसलों की बुआई पर पड़ता है.
मॉनसून मिशन जलवायु पूर्वानुमान के (MMCFS) के आकलन के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सीजन के दौरान अल नीनो (El Nino) विकसित हो सकता है. मॉनसून सीजन 2026 के दौरान औसत से कम बारिश के पूर्वानुमान की वजह अल नीनो का जुलाई के आसपास सक्रिय होना है.
मॉनसून आने का अनुमान
आईएमडी के ताजा अनुमान के अनुसार, मजबूत मॉनसून 5-6 जून के बाद ही सक्रिय हो सकता है. इससे केरल में शुरुआत में बारिश की तीव्रता कम रहने की संभावना है. इससे धीरे-धीरे बारिश तेज होगी. मजबूत मॉनसून के लिए आवश्यक तेज हवाओं का स्तर दक्षिण भारत में 5-6 जून के बाद ही सक्रिय होने की संभावना है. केरल में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून का आगाज हल्का या कमजोर रहेगा. मौसमी मॉनसून धीरे-धीरे जोर पकडे़गा.
मॉनसून क्या है
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून भारत में बारिश और खेती के लिए लाइफलाइन है. यह मॉनसून सिस्टम हिंद महासागर से गर्म और नमी भरी हवाएं लाती है. ये जून से सितंबर के बीच देश में 70 फीसदी से ज्यादा वर्षा लाती है. कृषि को सहारा मिलता है. नदी, तालाब और नहरें भरने के साथ भूजल स्तर भी बढ़ता है. शहरों में पेयजल आपूर्ति के साथ गांवों में सिंचाई के लिए पानी मिलता है.
मॉनसून आने की तारीख
केरल के कुछ हिस्सों में मॉनसून से पहले की बारिश हो चुकी है, लेकिन मॉनसून के लिए आवश्यक परिस्थितियां अभी भी विकसित हो रही हैं. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग मॉनसून आने के लिए तीन शर्तों पर गौर करता है. इसमें केरल के कम से कम 60% निर्धारित मौसम केंद्रों पर लगातार वर्षा, अरब सागर पर एक निश्चित गति की पश्चिमी हवाएं और पर्याप्त बादल छाए रहना शामिल है. फिलहाल बारिश और बादल तो पर्याप्त हैं, लेकिन केरल में पश्चिमी हवाएं कमज़ोर पड़ रही हैं. हवाएं कमजोर होने से बंगाल की खाड़ी में हुई चक्रवात के हालात बन रहे हैं. इसने मॉनसूनी हवाओं के प्रवाह को कमजोर कर दिया है. अनुमान है कि सोमवार 1 जून से हवाएं तेज होने लगेंगी.











