- उदयपुर के मेवाड़ शाही परिवार का संपत्ति विवाद अरविंद सिंह मेवाड़ की वसीयत को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहा
- वसीयत में संपत्तियों को स्वअर्जित और पारंपरिक शाही विरासत की श्रेणियों में रखा, जिसमें नियंत्रण पुत्र को मिला
- विवादित संपत्तियों में उदयपुर का सिटी पैलेस, हेरिटेज होटल, ट्रस्ट, जमीनें और व्यवसायिक संस्थान शामिल हैं
उदयपुर के ऐतिहासिक मेवाड़ शाही परिवार का संपत्ति विवाद अब दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है. यह मामला दिवंगत अरविंद सिंह मेवाड़ की वसीयत को लेकर है जिसे लेकर उनके बेटे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ और बेटी पद्मजा कुमारी और भार्गवी आमने सामने हैं. विवाद हजारों करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों से जुड़ा है जिनमें ऐतिहासिक महल, हेरिटेज होटल, ट्रस्ट, जमीनें और व्यवसायिक संस्थान शामिल हैं.दरअसल अरविंद सिंह मेवाड़ का निधन 16 मार्च 2023 को हुआ था. फरवरी 2025 में उनकी वसीयत सामने आई. इसी वसीयत को मौजूदा विवाद की जड़ माना जा रहा है.
मेवाड़ शाही परिवार का संपत्ति विवाद
अदालत में रखे गए दस्तावेजों के अनुसार अरविंद सिंह मेवाड़ ने इस वसीयत में अपनी संपत्तियों को दो श्रेणियों में विभाजित किया था. पहली श्रेणी उनकी स्वअर्जित संपत्तियों की बताई गई है जबकि दूसरी श्रेणी पारंपरिक पारिवारिक और शाही विरासत से जुड़ी संपत्तियों की मानी जा रही है.बताया जाता है कि वसीयत के अनुसार, अरविंद सिंह मेवाड़ ने अपनी अधिकांश स्वअर्जित संपत्तियों का प्रबंधन और नियंत्रण अपने बेटे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ को सौंप दिया था.
उदयपुर सिटी पैलेस की संपत्तियां
इन संपत्तियों में उदयपुर का सिटी पैलेस परिसर से जुड़ी निजी संपत्तियां, एचआरएच ग्रुप ऑफ होटल्स से जुड़े अधिकार, होटल व्यवसाय से होने वाली आय और उससे संबंधित प्रशासनिक फैसलों का अधिकार शामिल बताया जा रहा है. इसी आधार पर लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने खुद को इन संपत्तियों का वैध उत्तराधिकारी बताया और वर्ष 2025 में राजस्थान हाईकोर्ट में लेटर्स ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया.
वसीयत का विवाद
वसीयत में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की संपत्तियों को ट्रस्ट के माध्यम से संचालित किया जाएगा. सिटी पैलेस, संग्रहालय, ऐतिहासिक धरोहरों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी संपत्तियों को ट्रस्ट संरचना के तहत सुरक्षित रखने की मंशा वसीयत में दर्ज मानी जा रही है. इसका उद्देश्य यह बताया गया है कि इन संपत्तियों का व्यावसायिक दोहन न हो और मेवाड़ की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक स्वरूप बना रहे.
पद्मजा कुमारी और भार्गवी ने वसीयत को अदालत में चुनौती
दूसरी ओर अरविंद सिंह मेवाड़ की बेटी पद्मजा कुमारी और भार्गवी ने इस वसीयत को अदालत में चुनौती दी है. उनका कहना है कि जिन संपत्तियों को स्वअर्जित बताया जा रहा है वे वास्तव में पीढ़ियों से चली आ रही मेवाड़ राजघराने की साझा विरासत हैं. उनके अनुसार सिटी पैलेस, महल, होटल और उनसे जुड़ी जमीनें किसी एक व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं हो सकतीं. उन्होंने अदालत में यह दलील भी दी है कि वसीयत बनाते समय अरविंद सिंह मेवाड़ की स्वास्थ्य स्थिति और निर्णय क्षमता पूरी तरह ठीक नहीं थी इसलिए वसीयत की वैधता पर भी सवाल उठते हैं.
Mewar Royal Family
पद्मजा कुमारी परमार का यह भी कहना है कि पारिवारिक और शाही विरासत वाली संपत्तियों का बंटवारा सभी उत्तराधिकारियों के बीच समान रूप से होना चाहिए. इसी आधार पर उन्होंने वसीयत को पहले बॉम्बे हाईकोर्ट और फिर अन्य अदालतों में चुनौती दी. बाद में मामलों के स्थानांतरण के बाद यह विवाद दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंचा है.
उदयपुर का सिटी पैलेस
मेवाड़ शाही परिवार की जिन संपत्तियों को लेकर विवाद है उनमें उदयपुर का सिटी पैलेस सबसे प्रमुख माना जा रहा है. यह महल न सिर्फ मेवाड़ राजवंश की सत्ता और परंपरा का प्रतीक रहा है, बल्कि आज भी शाही विरासत का केंद्र है. इसी परिसर में शंभू निवास जैसे निजी रिहायशी भवन, दरबार हॉल, संग्रहालय और कई ऐतिहासिक संरचनाएं शामिल हैं. इसके अलावा शिव निवास पैलेस और फतेह प्रकाश पैलेस जैसे ऐतिहासिक महल भी विवाद का हिस्सा बताए जा रहे हैं जिन्हें हेरिटेज होटल के रूप में विकसित किया गया है.
पिछोला झील के बीच जग निवास
लेक पिछोला के बीच स्थित जग निवास जिसे लेक पैलेस के नाम से जाना जाता है भी मेवाड़ राजघराने की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा रहा है हालांकि इसका संचालन होटल प्रबंधन व्यवस्था के तहत होता है. इन अचल संपत्तियों के साथ मेवाड़ परिवार की बड़ी चल संपत्ति होटल व्यवसाय से जुड़ी है. एचआरएच ग्रुप ऑफ होटल्स के तहत कई लक्ज़री और हेरिटेज होटल संचालित होते हैं जिनसे हर साल करोड़ों रुपये का राजस्व आने का दावा किया जाता है. इसके अलावा ट्रस्टों के नाम पर दर्ज जमीनें, रिहायशी भवन, संग्रहालय और सांस्कृतिक संस्थान भी इस विवाद से जुड़े हुए हैं.
10 हजार करोड़ की अनुमानित संपत्ति
सूत्रों के अनुसार मेवाड़ शाही परिवार की कुल चल और अचल संपत्तियों का अनुमानित मूल्य हजारों करोड़ रुपये बताया जाता है. कुछ आकलनों में यह आंकड़ा दस हजार करोड़ रुपये से भी अधिक बताया गया है हालांकि ऐतिहासिक और विरासत से जुड़ी संपत्तियों के कारण इनका सटीक बाजार मूल्य तय करना आसान नहीं है और कोई आधिकारिक सरकारी आंकड़ा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है.
असल में यह विवाद पूरी तरह नया नहीं है. मेवाड़ राजघराने में संपत्ति को लेकर कानूनी लड़ाई का इतिहास दशकों पुराना बताया जाता है. वर्ष 1980 के दशक में भी तत्कालीन महाराणा भगवत सिंह मेवाड़ की वसीयत को लेकर परिवार में बड़ा विवाद हुआ था. उस समय संपत्ति के प्रबंधन को लेकर मामला अदालत तक पहुंचा था.
20 जनवरी को सुनवाई
वर्ष 2020 में उदयपुर की जिला अदालत ने पुराने संपत्ति विवाद में संपत्तियों को चार हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था. हालांकि यह आदेश बाद में हाईकोर्ट और अन्य उच्च अदालतों में अपील और स्थगन आदेशों के कारण पूरी तरह लागू नहीं हो सका. ताजा घटनाक्रम में जनवरी 2026 में सभी संबंधित याचिकाओं को दिल्ली हाईकोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया. अब दिल्ली हाईकोर्ट में वसीयत की वैधता, संपत्तियों की प्रकृति और ट्रस्ट व्यवस्था की भूमिका पर एक साथ सुनवाई हो रही है. अगली सुनवाई की तारीख 20 जनवरी 2026 बताई जा रही है.
कानूनी तौर पर इस पूरे मामले का सबसे अहम सवाल यही है कि विवादित संपत्तियां वास्तव में अरविंद सिंह मेवाड़ की व्यक्तिगत कमाई और निवेश से बनी थीं या फिर वे पारंपरिक शाही और पारिवारिक विरासत हैं जिन पर सभी उत्तराधिकारियों का समान अधिकार बनता है. इसी सवाल के जवाब पर मेवाड़ शाही परिवार की हजारों करोड़ की संपत्ति और सदियों पुरानी विरासत का भविष्य तय होना है.














