गांधी जी ने बांहों में उठाकर कहा था, ये मेरे सूरज‑चांद हैं! मणिशंकर अय्यर का खुलासा, बताया क्यों खुद को मानते हैं असली गांधीवादी?

मणिशंकर अय्यर ने कहा कि वह गांधीवादी, नेहरूवादी और राजीववादी हैं, लेकिन राहुल गांधी को लेकर “राहुलवादी” नहीं हैं क्योंकि उनकी उम्र और राजनीतिक यात्रा उनसे बिलकुल अलग है.

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  • अय्यर ने खुद को गांधीवादी, नेहरूवादी और राजीववादी बताया लेकिन राहुलवादी मानने से इनकार कर दिया
  • अय्यर ने इंदिरावाद को अस्वीकार किया क्योंकि वे इंदिरा गांधी के आपातकाल के तानाशाही कदम से पूरी तरह असहमत थे
  • अय्यर ने कहा कि राजीव गांधी ने उन्हें PMO में काम करने का मौका दिया था, इसलिए वे राजीववादी कहलाते हैं
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नई दिल्ली:

 कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने बुधवार को कहा कि वह ‘‘गांधीवादी'', ‘‘नेहरूवादी' और 'राजीववादी' हैं लेकिन 'राहुलवादी' नहीं हैं क्योंकि राहुल गांधी उनसे उम्र में बहुत छोटे हैं और राजनीतिक जीवन में भी उनसे बहुत दूर हैं. अय्यर ने कहा कि उन्होंने खुद को ‘इंदिरावादी' नहीं कहा क्योंकि वह इंदिरा गांधी द्वारा आपातकाल की घोषणा करके 'हमारे लोकतंत्र को तानाशाही में बदलने' के कदम से 'पूरी तरह असहमत' थे, भले ही यह आपातकाल केवल 18 महीनों के लिए ही क्यों न रहा हो.

हाल ही में राहुल गांधी पर की गई उनकी टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर अय्यर ने ‘पीटीआई-भाषा' से कहा, ‘‘कोई मुझसे 'राहुलियन' (राहुलवादी) होने की उम्मीद कैसे कर सकता है, जब वह मुझसे लगभग 30 साल छोटे हैं और मुझे उसके साथ काम करने का मौका नहीं मिला है?'

महात्मा गांधी ने क्या कहा था? 

अय्यर के मुताबिक, उन्होंने हाल में कहा था कि ‘‘ मैं गांधीवादी हूं, मैं नेहरूवादी हूं, मैं राजीववादी हूं, लेकिन मैं राहुलवादी नहीं हूं.'' अपने बयान के बारे में विस्तार से बताते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘ मैं उस वक्त छह साल का था और मेरा भाई चार साल का था जब महात्मा गांधी ने हमें अपनी बाहों में उठाया और कहा, 'ये मेरे सूरज और चांद हैं.''

उन्होंने कहा, ‘‘वहीं से, मैं 'गांधीवादी' बन गया. जहां तक ​​नेहरू की बात है, जब वह प्रधानमंत्री बने तो मैं छह साल का था और जब वह विदा हुए तो मैं 23 साल का था, इसलिए मेरे बड़े होने के पूरे वर्ष नेहरूवादी विचार में डूबे हुए थे, यही कारण है कि मैं भी खुद को नेहरूवादी मानता हूं.'

अय्यर ने खुद को बताया राजीववादी

अय्यर ने कहा, 'मैं खुद को ‘राजीवियन' (राजीववादी) कहता हूं क्योंकि वह भले ही मुझसे दो साल छोटे थे, लेकिन वह मुझे प्रधानमंत्री कार्यालय में लाए और अपने इस काम से मुझे आश्चर्यचकित कर दिया... मुझे इस पर विश्वास नहीं हो रहा था. इस तरह मैं राजीववादी बन गया.'उन्होंने मंगलवार को कांग्रेस नेतृत्व पर हमला बोलने के एक दिन बाद यह बयान दिया है.

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मणिशंकर अय्यर क्यों हैं चर्चा में?

अय्यर ने मंगलवार को पार्टी नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए कहा था कि यदि इस पार्टी के कर्ताधर्ता असहमति के स्वर का सामना नहीं कर सकते तो यह मुख्य विपक्षी दल के लिए ‘विनाशकारी है' तथा पार्टी को शासन करने का कोई अधिकार नहीं है. पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस आलाकमान को यह चुनौती भी दी थी कि वह राहुल गांधी के मुंह से राजीव गांधी का 1989 में दिया वह बयान फिर से दिलवाएं कि ‘‘सिर्फ धर्मनिरपेक्ष भारत ही कायम रह सकता है.''

अय्यर ने पार्टी के खिलाफ मोर्चा उस वक्त खोला, जब उन्होंने बीते रविवार को केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की तारीफ की और उनके फिर से मुख्यमंत्री बनने की संभावना जताई, जिसके बाद कांग्रेस ने उनकी टिप्पणी को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी से उनका कोई संबंध नहीं है.

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