- बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाने के विवाद पर टीएमसी चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर लगातार हमला कर रही है
- ममता बनर्जी अगले सप्ताह दिल्ली जाकर चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट में SIR प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे को उठाएंगी
- टीएमसी ने दिल्ली में ऐसे लोगों को लाया है जिनके नाम मतदाता सूची से गैर कानूनी तरीके से हटाए गए हैं
पश्चिम बंगाल में एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया जारी है और उसके साथ राजनीति भी. राज्य में सत्तारूढ़ टीएमसी लागतार इस मुद्दे पर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर हमला कर रही है. इस लड़ाई को अब दिल्ली लाने की तैयारी हो रही है. इसी सिलसिले में अगले सप्ताह खुद ममता बनर्जी दिल्ली आएंगी. सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट और जंतर-मंतर तक ममता चौंकाने वाला कदम उठा सकती हैं.
ममता दीदी का दिल्ली कूच
किसी मुद्दे को कैसे लोगों के बीच ले जाकर उसे एक बड़ा मुद्दा बनाना है, ये ममता बनर्जी से ज़्यादा कम ही नेता समझते हैं. बंगाल में SIR के मुद्दे पर ममता बनर्जी अगले सप्ताह दिल्ली में कुछ ऐसा ही करने की तैयारी कर रही हैं. 2 फरवरी को शाम 4 बजे मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने दोनों सहयोगियों के साथ ममता बनर्जी को मिलने का समय दिया है. खबर है कि SIR के मुद्दे का राजनीतिक फायदा लेने के लिए ममता बनर्जी इस मौके का भरपूर इस्तेमाल कर सकती हैं. ममता 1 फरवरी को देर शाम या 2 फरवरी की सुबह दिल्ली पहुंच सकती हैं.
दिल्ली में खेला करेंगी ममता बनर्जी!
टीएमसी बंगाल से कई ऐसे लोगों को दिल्ली लेकर आ रही है, जिनके बारे में पार्टी का दावा है कि मतदाता सूची से उनका नाम गैर कानूनी तरीके से काट दिया गया है. इनमें से कुछ लोग दिल्ली पहुंच चुके हैं और बाकी पहुंचने वाले हैं. पार्टी सूत्रों का दावा है कि उनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिन्हें मृत घोषित कर मतदाता सूची से हटा दिया गया, लेकिन वो अभी भी जीवित हैं. इसी तरह कुछ ऐसे लोगों को भी दिल्ली लाने का दावा किया जा रहा है, जिनके परिवार के मुखिया की मौत हो गई और पार्टी का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया से परेशान होकर ही उनकी मृत्यु हुई है.
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SIR पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई शामिल होंगी ममता
चुनाव आयोग के अलावा अगले हफ्ते SIR के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने की संभावना है. अटकलें हैं कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ख़ुद ममता बनर्जी भी मौजूद रह सकती हैं. यहां ये बताना जरूरी है कि ममता बनर्जी खुद एक वकील हैं. हालांकि, राजनीति में व्यस्तता के चलते अदालतों से उनका कम ही लेना-देना रहा है.
जंतर-मंतर पर धरना, बंगाल तक राजनीतिक संदेश
इतना ही नहीं, पार्टी की ओर से लाए गए पीड़ित लोगों के साथ ममता बनर्जी जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन कर सकती हैं. पार्टी का कोई भी नेता या पदाधिकारी इस मुद्दे पर औपचारिक बात करने को तैयार नहीं है. लेकिन सूत्रों का साफ-साफ कहना है कि ऐसा करने ममता सीधे-सीधे चुनाव आयोग और उसके बहाने प्रधानमंत्र नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को घेरना चाहती हैं, ताकि बंगाल तक राजनीतिक संदेश दिया जा सके.
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