महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन के बाद महायुति के तीन शीर्ष नेताओं की तिकड़ी में पैदा हुए शून्य ने कई सवाल खड़े किए हैं.सवाल है कि बीजेपी से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, शिवसेना से डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और अजित पवार के बीच जो तालमेल था, उसकी भरपाई कैसी होगी. क्या एनसीपी की ओर अजित पवार की पत्नी और राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार या वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल का नाम आगे आएगा. क्या एकनाथ शिंदे की सियासी मोलभाव की ताकत और बढ़ जाएगी. बीएमसी मेयर पद को लेकर बीजेपी और शिवसेना शिंदे के बीच फडणवीस के दावोस दौरे से लौटने के बाद बातचीत आगे बढ़ने की उम्मीद थी. लेकिन अजित पवार के असमय निधन से ये मामला आगे और खिसकता नजर आ रहा है.
महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन की सबसे बड़ी परीक्षा बीएमसी चुनाव को लेकर होनी है. शिवसेना की ओर से एकनाथ शिंदे ने अभी तक अपना रुख साफ नहीं किया है. ढाई-ढाई साल मेयर होने की जो अंदरूनी खबर में कितनी सच्चाई है, इस पर तस्वीर साफ होनी बाकी है. हालांकि अजित पवार गुट पहले ही समर्थन का ऐलान कर चुका है.
BMC चुनाव के नतीजे
बीएमसी चुनाव में बीजेपी और शिवसेना शिंदे गुट ने साझेदारी की थी. भाजपा को 89 और शिवसेना शिंदे गुट को 29 सीटें मिली थीं. जबकि शिवसेना यूबीटी को 65 सीटें मिली थीं. 227 पार्षदों वाली बृहन्मुंबई महानगरपालिका में मेयर बनाने के लिए 114 का आंकड़ा चाहिए. कांग्रेस को 24, असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM को 8 और मनसे को छह सीटें मिली हैं. एनसीपी अजित पवार की 3 सीटें और समाजवादी पार्टी के खाते में दो सीटें हैं.
नगरसेवकों का पंजीकरण कब होगा
बृहन्मुंबई महानगरपालिका के महापौर पद के चुनाव के पहले बीजेपी और शिवसेना शिंदे के कारपोरेटर्स का पंजीकरण पूरा होना है. आरक्षण की घोषणा के बाद 31 जनवरी तक ऐसा होना था, लेकिन अभी यह कवायद पूरी नहीं हो पाई है. फरवरी के पहले हफ्ते में गुट पंजीकरण संभव है. जबकि शिवसेना उद्धव ठाकरे और मनसे के नगरसेवकों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है. लेकिन सभी पार्षदों के प्रमाणपत्र बीएमसी सचिव ऑफिस में जमा होने तक मेयर चुनाव आगे नहीं बढ़ पाएगा. बीजेपी और शिवसेना शिंदे एक गुट बनाकर साझा तौर रजिस्ट्रेशन कराएंगे या अलग-अलग, यह भी तय होना बाकी है.
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गौरतलब है कि बीजेपी शिवसेना शिंदे ने 25 सालों से बीएमसी पर ठाकरे परिवार के कब्जे को खत्म किया है. 2022 से बीएमसी में प्रशासक ही जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.
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