अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर M3M Foundation ने देशभर में महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के अपने संकल्प को दोहराते हुए कहा कि भारत के विकास की असली शक्ति उसकी महिलाएं हैं. शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता और आजीविका के अवसरों के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना ही स्थायी सामाजिक परिवर्तन का आधार है.
M3M Foundation की अध्यक्ष और ट्रस्टी डॉ. पायल कनोड़िया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में “Weaving Change - विरासत की बुनावट” अभियान के शुभारंभ के अवसर पर बोल रही थीं. यह अभियान भले ही वाराणसी से शुरू किया गया है, लेकिन इसका उद्देश्य देशभर में 40,000 महिलाओं को पारंपरिक भारतीय कला और शिल्प के माध्यम से कौशल, उद्यमिता और स्थायी ग्रामीण आजीविका से जोड़ना है. इस पहल के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के पारंपरिक कौशल को आधुनिक बाजार, डिज़ाइन और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर “रूरल टू ग्लोबल” की अवधारणा को साकार करने का प्रयास किया जाएगा.
वाराणसी मे महिला स्वरोजगार समिति के सहयोग से उद्घाटन कार्यक्रम का आयोजन वाराणसी जनपद के आराजीलाइन ब्लॉक की बैरवन पंचायत में किया गया, जिसमें आसपास के गांवों से आई 500 से अधिक महिलाओं ने भाग लिया.
डॉ. पायल के अनुसार जब महिलाओं को अवसर, कौशल और संसाधन मिलते हैं, तो वे केवल अपने परिवार को ही नहीं बल्कि पूरे समाज को सशक्त बनाती हैं. उन्होंने कहा कि फाउंडेशन के विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से देश के अनेक राज्यों में महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण, उद्यमिता और आजीविका से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है.
M3M Foundation के ‘कौशल सम्बल' और अन्य सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से हजारों महिलाओं को कौशल विकास, उद्यमिता प्रशिक्षण और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वे अपने परिवार की आर्थिक मजबूती में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.
इस अवसर पर M3M Foundation के मैनेजिंग ट्रस्टी डॉ. ऐश्वर्य महाजन, प्रवीण सिंह गौतम (भाजपा जिला महामंत्री), अरविंद सिंह (भाजपा उपाध्यक्ष), प्रशांत (विश्व हिंदू परिषद), वैशाली ताई जोशी और अनंत प्रभा (विश्व मांगल्य सभा) सहित कई सामाजिक और जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे. कार्यक्रम में वाराणसी ग्रामीण के एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा तथा जिला परिषद वाराणसी की अध्यक्ष पूनम मौर्य की उपस्थिति में डॉ. पायल कनोड़िया और महिला स्वरोजगार समिति की संस्थापक रेखा चौहान के बीच इस परियोजना के लिए एमओयू का आदान-प्रदान किया गया.
इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. पायल कनोड़िया ने कहा कि भारत की पारंपरिक कला और शिल्प को जीवित रखने में ग्रामीण महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि “Weaving Change – विरासत की बुनावट” केवल एक परियोजना नहीं बल्कि एक आंदोलन है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं के कौशल को उद्यमिता से जोड़ते हुए भारत की विरासत को ‘रूरल टू ग्लोबल' के रूप में दुनिया तक पहुँचाना है.
उन्होंने यह भी बताया कि M3M Foundation वाराणसी में केवल आजीविका और महिला सशक्तिकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है. काशी के ऐतिहासिक दुर्गा घाट स्थित एकनाथ भवन के विकास के अंतर्गत विठ्ठल मंदिर के गर्भगृह और सभाकक्ष का पुनर्निर्माण, अन्नक्षेत्र का विकास तथा यात्रियों और साधकों के लिए धर्मशाला का निर्माण किया गया है. इसके साथ ही सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए एक सामुदायिक सभागार भी विकसित किया गया है. यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “वोकल फॉर लोकल” और “विरासत से विकास” के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इस अभियान के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के कौशल को नई पहचान देने के साथ-साथ भारत की समृद्ध कला परंपरा को वैश्विक मंच तक पहुँचाने का प्रयास किया जाएगा.
महिला स्वरोजगार समिति की संस्थापक रेखा चौहान ने कहा कि इस साझेदारी से वाराणसी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की हजारों महिलाओं को अपने पारंपरिक कौशल को उद्यम में बदलने का अवसर मिलेगा, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकेंगी.
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर M3M Foundation ने यह संकल्प दोहराया कि महिलाओं के कौशल, नेतृत्व और उद्यमिता को बढ़ावा देकर उन्हें देश के विकास की मुख्यधारा में और सशक्त रूप से जोड़ा जाएगा. हर हाथ में हुनर, हर घर में सम्मान - यही महिला सशक्तिकरण की सच्ची दिशा है.














