- भारतीय रेलवे लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन का रीडेवलपमेंट कर रहा है. जिसमें सुविधाएं बढ़ेगी.
- अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 400 करोड़ से स्टेशन का संवारा जा रहा है.
- चारबाग रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं मिलेगी.
लखनऊ के रेलवे स्टेशन पर अब यात्रियों को एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं मिलने वाली हैं. अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत लखनऊ की चारबाग रेलवे स्टेशन का भी रीडेवलपमेंट किया जा रहा है. रेल भूमि विकास प्राधिकरण और भारतीय रेलवे देश के सबसे पुराने स्टेशनों में शामिल चारबाग स्टेशन को वर्ल्ड-क्लास ट्रांजिट हब बनाने वाला है. इसके लिए 400 करोड़ रुपए का बजट पास हुआ है. इस मेगा प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य यात्रियों को रेलवे स्टेशन पर ही एयरपोर्ट जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं यात्रियों को उपलब्ध कराई जाएगी. एसी लाउंज, एस्केलेटर समेत स्टेशन के सभी प्लेटफॉर्म में बदलाव किया जाएगा.
7-मंजिला नई आधुनिक इमारत बन रही
लखनऊ रेलवे स्टेशन पर एक शानदार 7-मंजिला नई आधुनिक इमारत का निर्माण किया जा रहा है, यह इमारत पूरी तरह से स्मार्ट होगी. हालांकि लखनऊ का चारबाग रेलवे स्टेशन अपनी खास अवधी और ब्रिटिश कालीन वास्तुकला के लिए पूरी दुनिया में फेमस है. ऐसे में इसके मूल रूप से छेड़छाड़ नहीं की जाएगी. ऐसे में नए भवन का निर्माण पीछे के हिस्से में किया जा जा रहा है. रेलवे प्रशासन ने साफ किया है कि रीडेवलपमेंट के दौरा पुरानी बिल्डिंग से किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं होगी. पीछे तरफ बिल्कुल नया भवन बनाया जा रहा है. ताकि स्टेशन को भव्य रूप के साथ यात्रियों को सुविधा भी दी जा सकेगी. जबकि विरासत भी संभाला जा सकेगा.
शानदार एयर कॉनकोर्स बनेगा
लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर शानदार एयर कॉनकोर्स बनेगा जो 115 मीटर लंबा और 120 मीटर चौड़ा एक आधुनिक पैसेंजर कॉनकोर्स बनाया जा रहा है. यह कॉनकोर्स प्लेटफॉर्म नंबर 1 से लेकर 7 के ऊपर से गुजरेगा. स्टेशन के पहले और दूसरे एंट्री गेट को आपस में जोड़ेगा. प्लेटफॉर्म से पुराने टीन शेड हटाकर हटाया जा रहा है. इस कॉनकोर्स पर एयरकंडीशनर के साथ यात्रियों के बैठने की एयरपोर्ट जैसी व्यवस्था, लाउंज और फूड कोर्ट जैसी सुविधाएं होंगी. चारबाग के मुख्य भवन के दबाव को कम करने के लिए दूसरी एंट्री का काम पूरा कर लिया गया है. अब सेकंड एंट्री के तौर पर स्टेशन बिल्डिंग की फिनिशिंग का काम चल रहा है.
चारबाग स्टेशन की खासियत
- चारबाग स्टेशन में 9 प्लेटफॉर्म और 26 ब्रॉड गेज ट्रैक का एक विशाल नेटवर्क है.
- हर दिन 80 हजार से 1 लाख यात्री सफर करते हैं.
- चारबाग स्टेशन से रोजाना 220 से अधिक ट्रेनें चलती हैं, इसमें राजधानी, शताब्दी, वंदे भारत, मेल/एक्सप्रेस और पैसेंजर शामिल हैं.
- बगल में लखनऊ जंक्शन (NER) भी है, जिसमें 8 ट्रैक हैं.
- यह स्टेशन दिल्ली, हावड़ा, मुंबई, चेन्नई और जम्मू जैसे देश के कोनों-कोनों को जोड़ता है.
- यहां से चौधरी चरण सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट और हजरतगंजस मुंशीपुलिया तक मेट्रो कनेक्टिविटी है.
- यहां लखनऊ मेट्रो की रेड लाइन का चारबाग मेट्रो स्टेशन भी है.
छह लेन साइड, प्लेटफॉर्म चौड़े होंगे
चारबाग में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्लेटफॉर्म 9 से बढ़ाकर 11 होंगे. इससे यहां अभी 300 की क्षमता से अधिक ट्रेनें संचालित हो पाएंगे. प्लेटफॉर्म नंबर 10 और 11 का काम चल रहा है. नए चौड़े फुट ओवर ब्रिज बनाए जा रहे हैं ताकि यात्रियों को एक से दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाने में दिक्कत न हो. हर प्लेटफॉर्म पर लिफ्ट और नए एस्केलेटर का काम हो रहा है.
लखनऊ स्टेशन पर मिलेगी यह सुविधाएं
- लखनऊ स्टेशन पर एसी वेटिंग लाउंज और फूड कोर्ट बनेगा. यहां वेटिंग एरिया, मशहूर ब्रांड्स के फूड कोर्ट रहेंगे.
- चारबाग स्टेशन पर दर्जनों नई लिफ्ट, एस्केलेटर भी यहां लगाए जाएंगे. जिससे बुजुर्ग और दिव्यांग यात्रियों को आने जाने में आसानी होगी.
- आधुनिक फुट ओवरब्रिज भी बन रहे हैं. जो आपस में सभी प्लेटफॉर्म्स को जोड़ेंगे, ताकि यात्रियों को आसानी हो सकेगी.
- वाहनों के सुचारू रूप से रखने के लिए आधुनिक मल्टी-लेवल पार्किंग बनाई जा रही है. जिसमें 900 कारें और 900 ही बाइक भी लग सकेगी.
लखनऊ स्टेशन पर भीड़ होगी कंट्रोल
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत लखनऊ रेलवे स्टेशन को यात्रियों की बढ़ती भीड़ आने वाले भविष्य के हिसाब से तैयार किया जा रहा है. ये ठीक वैसे ही काम करेगा जैसे एयरपोर्ट्स पर होता है. स्टेशन पर आने वाले और ट्रेन पकड़कर जाने वाले यात्रियों के रास्ते पूरी तरह अलग होंगे. इसके लिए प्लेटफॉर्म्स के ऊपर एक बड़ा 'एयर कॉनकोर्स' या रूफ प्लाजा बनाया जा रहा ह. यात्री सीधे इस कॉनकोर्स से एस्केलेटर के जरिए अपने प्लेटफॉर्म पर उतर सकेंगे, जिससे प्लेटफॉर्म पर बेवजह की भीड़ नहीं होगी.
कब तक होगा तैयार
चारबाग रेलवे स्टेशन के पीछे के हिस्से का ढांचा बनाने का काम पूरा होने वाला है. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, निर्माण कार्य को इस तरह से प्लान किया गया है ताकि ट्रेनों के आवागमन और यात्रियों को कम से कम परेशानी हो. इस पूरे प्रोजेक्ट को 2026 के अंत से लेकर जून 2027 तक पूरी तरह से जनता के लिए खोलने का लक्ष्य रखा गया है. आने वाले समय में यह स्टेशन लखनऊ के विकास की नई पहचान बनेगा.
चारबाग रेलवे स्टेशन का इतिहास
इस स्टेशन की आलीशान इमारत का खाका अंग्रेज आर्किटेक्ट जेएच हॉर्नीमैन ने तैयार किया था.इसमें कंसल्टिंग इंजीनियर चौबे मुक्ता प्रसाद ने भी मदद की थी. यह इमारत राजपूताना (राजस्थानी), मुगल और अवधी स्थापत्य कला का मिश्रण है. बाहर से देखने पर यह राजपूत राजाओं के महल या अवध के किसी भव्य इमामबाड़े जैसा लगता है. इसके गुंबद, मेहराब और मीनारें इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं. आसमान से ये शतरंज की बिसात जैसे दिखता है.लखनऊ कांग्रेस अधिवेशन के दौरान 26 दिसंबर 1916 को महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू की पहली मुलाकात इसी चारबाग रेलवे स्टेशन पर हुई थी.
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