- महाराष्ट्र के सोलापुर के माढा में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति बंद होने से सभी पेट्रोल पंप बंद हो गए हैं.
- वहीं माढा में सिर्फ एक पेट्रोल पंप ही चालू है, जिस पर भारी भीड़ नजर आ रही है और लंबी कतारें लगी है.
- छत्रपति संभाजीनगर में औद्योगिक गैस की सप्लाई बंद होने से करीब 70 फीसदी लघु और मध्यम उद्योग बंद हो गए हैं.
देश भर में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की आपूर्ति को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है. महाराष्ट्र में एलपीजी किल्लत की आशंका ने आम लोगों से लेकर उद्योग जगत तक की चिंता बढ़ा दी है. सोलापुर जिले के माढा इलाके में पेट्रोल-डीजल खत्म होने की आशंका के बाद हड़कंप की स्थिति बन गई है. माढा शहर के सभी पेट्रोल पंप बंद कर दिए गए हैं. यहां सिर्फ एक ही पेट्रोल पंप चालू है, जिसके कारण यहां पर वाहनों की लंबी कतारें लग गई. उधर, छत्रपति संभाजीनगर में औद्योगिक गैस की सप्लाई बंद होने से उद्योगों पर गहरा असर पड़ा है. इसके चलते करीब 70 फीसदी एमएसएमई प्रभावित हुए हैं.
सोलापुर जिले के माढा इलाके में पेट्रोल और डीजल की किल्लत की आशंका ने लोगों में हड़कंप मचा दिया है. माढा शहर के सभी पेट्रोल पंप बंद कर दिए गए हैं. बताया जा रहा है कि ऊपर से सप्लाई बंद होने के कारण यह फैसला लिया गया है.
पेट्रोल पंप पर दिख रही लंबी कतार
वहीं, केवड गांव का एकमात्र पेट्रोल पंप अभी चालू है, जहां पेट्रोल और डीजल भरवाने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है. शनिवार दोपहर से ही यहां वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं. स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई है कि कुछ लोग पंप कर्मचारियों से बहस करते हुए भी नजर आ रहे हैं. देर रात, करीब डेढ़ बजे तक भी पंप पर भारी भीड़ बनी रही.
लोगों में डर है कि कहीं पेट्रोल-डीजल पूरी तरह खत्म न हो जाए, इसी वजह से वे बड़ी संख्या में पंप की ओर रुख कर रहे हैं. इसके बाद प्रशासन से अब स्थिति स्पष्ट करने और आपूर्ति बहाल करने की मांग तेज हो गई है.
गैस संकट से उद्योग ठप, 70% MSME प्रभावित
उधर, छत्रपति संभाजीनगर में औद्योगिक गैस की सप्लाई बंद होने से उद्योगों पर गहरा असर पड़ा है. ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के चलते केंद्र सरकार ने 5 मार्च से कमर्शियल गैस की सप्लाई रोक दी है. इसका सीधा असर यहां के विभिन्न MIDC क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है, जहां करीब 70 प्रतिशत लघु और मध्यम उद्योग पूरी तरह ठप हो गए हैं.
वालूज, चिकलठाणा, शेंद्रा, पैठण, रेलवे स्टेशन और औरिक जैसे औद्योगिक इलाकों में चार हजार से अधिक कंपनियां हैं, जिनमें से 40 से 50 प्रतिशत कंपनियां उत्पादन के लिए LPG गैस पर निर्भर हैं.
हालांकि, इस मुश्किल हालात के बावजूद कंपनियों ने अपने कुशल कामगारों को नहीं हटाया है. उन्हें रोज बुलाकर मशीनों की सर्विसिंग और रखरखाव जैसे काम कराए जा रहे हैं, ताकि उत्पादन शुरू होने पर काम तुरंत शुरू किया जा सके. कुछ बड़ी कंपनियां अपने वेंडर्स को अस्थायी तौर पर गैस उपलब्ध करा रही हैं, जिससे सीमित स्तर पर काम जारी है.
फिलहाल, उद्योग जगत सरकार से जल्द से जल्द गैस सप्लाई बहाल करने की मांग कर रहा है, ताकि उत्पादन फिर से पटरी पर लौट सके.
ये कदम उठा रही है सरकार
उधर, केंद्र सरकार आपूर्ति पर दबाव कम करने के लिए पीएनजी के उपयोग को बढ़ावा दे रही है, खासकर वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के लिए, और राज्यों से शहरी गैस वितरण नेटवर्क के अनुमोदन में तेजी लाने को कहा है. इसके साथ ही, सभी रिफाइनरियां पर्याप्त कच्चे तेल भंडार के साथ पूरी क्षमता पर काम कर रही हैं, ताकि पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित हो सके.
केंद्र सरकार ने कहा कि खुदरा दुकानों पर ईंधन की कमी की कोई सूचना नहीं मिली है और जनता को घबराकर खरीदारी न करने की सलाह दी गई है.
सरकार ने अतिरिक्त उपायों के तहत घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाया है, बुकिंग अंतराल बढ़ाए हैं और राज्यों को अतिरिक्त केरोसिन आपूर्ति आवंटित की है ताकि वैकल्पिक ईंधन विकल्प उपलब्ध हो सकें.
साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं. अब तक देशभर में 3,500 से अधिक छापेमारी की गई, जिससे लगभग 1,400 एलपीजी सिलेंडर जब्त किए गए.














