Bullet train Delhi to Varanasi: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के बाद सरकार ने अब दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की तैयारी तेज कर दी है. कोशिश है कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के अनुभवों से सीखते हुए दिल्ली-वाराणसी-सिलिगुड़ी बुलेट ट्रेन को आगे बढ़ाया जाए.पहले दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन रूट तैयार होगा और फिर इसे वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी रूट के तौर पर विस्तार दिया जाएगा. दिल्ली-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन यूपी, बिहार और बंगाल समेत चार राज्यों को जोड़ेगी. यह देश का सबसे लंबा बुलेट ट्रेन रूट होगा. लक्ष्य है कि दो साल के भीतर बुलेट ट्रेन काम शुरू हो जाए. इसमें दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर सबसे बड़ी प्राथमिकता है.
दिल्ली से प्रस्तावित 4 प्रमुख बुलेट ट्रेन कॉरिडोर
नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) और रेल मंत्रालय भविष्य में दिल्ली को एक विशाल हाई स्पीड रेल (HSR) हब बनाने पर विचार कर रहा है. इसमें दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड कॉरिडोर के अलावा दिल्ली -अहमदाबाद हाई-स्पीड कॉरिडोर, दिल्ली-अमृतसर-जम्मू कॉरिडोर शामिल है.
दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन रूट और स्टेशन
दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन रूट की लंबाई 865 किलोमीटर है. यह ट्रेन दिल्ली (हजरत निजामुद्दीन), नोएडा, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज (इलाहाबाद), न्यू भदोही से होकर वाराणसी तक पहुंचेगी. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) पर अंडरग्राउंड (भूमिगत) स्टेशन बनेगा. इसमें अयोध्या और लखनऊ का 135 किमी का लिंक रूट भी होगा.
दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर
(Delhi-Varanasi High-Speed Rail Corridor)
दिल्ली से लखनऊ का सफर महज 2 घंटे 10 मिनट में होगा
नोएडा एयरपोर्ट से लखनऊ 1 घंटे 40 मिनट
दिल्ली से वाराणसी सिर्फ 3 घंटे 50 मिनट में, अभी 11-12 घंटे
7 नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर देश में बनाए जा रहे
दिल्ली से कितनी बुलेट ट्रेन का प्लान
- दिल्ली - वाराणसी (वाया अयोध्या)
- दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन
- दिल्ली - अहमदाबाद
- दिल्ली -अमृतसर-जम्मू कॉरिडोर
दिल्ली-वाराणसी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर
दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन रूट की लागत लगभग 1.21 लाख करोड़ रुपये है. इसमें एलिवेटेड ट्रैक, नोएडा एयरपोर्ट के पास 9.4 किलोमीटर लंबी सुरंग और नदी पर प्रस्तावित पुल शामिल होंगे.दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर को आगे चलकर वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा.
देश के बुलेट ट्रेन रूट की लंबाई
1. दिल्ली - सिलिगुड़ी कॉरिडोर (Delhi–Siliguri Corridor)
लंबाई: लगभग 1705 किलोमीटर
यह भारत का सबसे लंबा प्रस्तावित हाईस्पीड बुलेट ट्रेन रूट है
2. दिल्ली - अहमदाबाद कॉरिडोर (Delhi–Ahmedabad Corridor)
लंबाई: 886 किलोमीटर
प्रमुख स्टेशन: दिल्ली, गुरुग्राम, जयपुर, उदयपुर, अहमदाबाद
इसकी डीपीआर (DPR) को मंजूरी मिल चुकी है।
3. दिल्ली - वाराणसी कॉरिडोर (Delhi–Varanasi Corridor)
लंबाई: 865 किलोमीटर
मुख्य शहर: दिल्ली, नोएडा, आगरा, कानपुर, लखनऊ, वाराणसी
डीपीआर बनी, अयोध्या के लिए एक अलग से कनेक्टिंग रूट होगा
4. वाराणसी - हावड़ा-कोलकाता कॉरिडोर (Varanasi–Howrah/Kolkata Corridor)
लंबाई: 760 किलोमीटर
मुख्य स्टेशन: वाराणसी, पटना, गया, धनबाद, हावड़ा (कोलकाता)
अपडेट: इस रूट के लिए सर्वे और शुरुआती तैयारी की जा रही है
5. मुंबई - नागपुर कॉरिडोर (Mumbai–Nagpur Corridor)
लंबाई: 736 से 753 किलोमीटर
मुख्य शहर: मुंबई, नासिक, औरंगाबाद, नागपुर
डीपीआर तैयार है और इसे आगामी चरणों में शुरू किया जाएगा
6. मुंबई - हैदराबाद कॉरिडोर (Mumbai–Hyderabad Corridor)
लंबाई: 709 किलोमीटर (पुणे-हैदराबाद रूट से 671 किमी)
प्रमुख स्टेशन: मुंबई, पुणे, सोलापुर, हैदराबाद
इस रूट के लिए भी डीपीआर बनाने की प्रक्रिया जारी है
7. मुंबई - अहमदाबाद कॉरिडोर (Mumbai–Ahmedabad Corridor)
लंबाई: 508 किलोमीटर
शहर: मुंबई, ठाणे, वापी, सूरत, वडोदरा, अहमदाबाद
भारत की पहली बुलेट ट्रेन रूट अगस्त 2027 तक शुरू होगी
8. चेन्नई - बेंगलुरु - मैसूर कॉरिडोर (Chennai–Bengaluru–Mysuru Corridor)
लंबाई: 435 किलोमीटर (केवल चेन्नई-बेंगलुरु हिस्सा करीब 306 किमी)
मुख्य स्टेशन: चेन्नई, बेंगलुरु, मैसूर।
अपडेट: इस रूट का शुरुआती सर्वे पूरा हो गया
9. दिल्ली- अहमदाबाद हाई-स्पीड कॉरिडोर
लंबाई: 886 किमी
स्टेशन- दिल्ली (द्वारका), गुरुग्राम, रेवाड़ी, अलवर, जयपुर, अजमेर, उदयपुर से साबरमती (अहमदाबाद)
दिल्ली, राजस्थान और गुजरात के शहरों को जोड़ेगी, आगे अहमदाबाद- मुंबई से जोड़ा जा सकेगा
10. दिल्ली -अमृतसर-जम्मू कॉरिडोर
लंबाई: 450-500 किमी, 2 घंटे में दिल्ली से अमृतसर
स्टेशन: दिल्ली, रोहतक, जींद, कैथल, चंडीगढ़ (मोहाली), लुधियाना, जालंधर से अमृतसर
(भविष्य में इसे पठानकोट के रास्ते जम्मू/कटरा तक विस्तार देने की योजना है
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दिल्ली-सिलीगुड़ी हाईस्पीड कॉरिडोर
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को नोएडा में कहा था कि इस हाई स्पीड लाइन से पश्चिम बंगाल उत्तर भारत के प्रमुख केंद्रों से सीधे जुड़ जाएगा. इस बुलेट ट्रेन परियोजना से यात्रा का समय 15 से 16 घंटे कम हो जाएगा. रेल मंत्री ने कहा कि दिल्ली और बंगाल (सिलीगुड़ी) की दूरी अभी 20 घंटे ले सिर्फ 6 घंटे रह जाएगी. वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर को भविष्य में असम के गुवाहाटी तक बढ़ाने की भी योजना है. चार राज्यों को जोड़े वाली ये बुलेट ट्रेन सबसे लंबी होगी. दिल्ली-सिलीगुड़ी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर नोएडा, इटावा, आगरा, मथुरा, लखनऊ, वाराणसी और पटना से होकर गुजरेगा.
- 16 लाख करोड़ खर्च होंगे 7 बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर
- रेलवे हर साल 250 किमी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर बनाएगा
- मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर 2027 अगस्त तक पूरा होगा
दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन की डीपीआर
दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) की समीक्षा हो रही है. इसके बाद वाराणसी-सिलीगुड़ी रूट के लिए डीपीआर पर काम आगे बढ़ेगा. दिल्ली, नोएडा, वाराणसी, आगरा, मथुरा, वाराणसी, सिलीगुड़ी और अहमदाबाद से मुंबई, पुणे, हैदराबाद, वाराणसी, पटना, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे शहरों के बीच बुलेट ट्रेन का नेटवर्क होगा.
स्वदेशी बुलेट ट्रेन B35 पर काम
भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन B35 का निर्माण BEML कर रही है. इस ट्रेन को 280 किमी प्रति घंटे तक की गति से चलाने के हिसाब से डिजाइन किया जा रहा है. यह स्वदेशी बुलेट ट्रेन अगस्त 2027 में अहमदाबाद-मुंबई कॉरिडोर पर सूरत और बिलिमोरा के बीच 100 किलोमीटर के रूट पर अपना पहला ट्रायल शुरू करेगी.तकनीक के विकास के सात इसे 350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक बढ़ाया जाएगा.
Delhi Varanasi Siliguri High Speed Rail Corridor
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हवाई यात्रा बनाम बुलेट ट्रेन
अभी दिल्ली से सिलीगुड़ी फ्लाइट की बात करें तो घर से एयरपोर्ट, चेक इन, बोर्डिंग और एयरपोर्ट से शहर पहुंचने में 5 घंटे लगते हैं. फ्लाइट में भी एक घंटा जाता है. राजधानी एक्सप्रेस जैसे ट्रेन भी दिल्ली से कोलकाता तक 18 से 20 घंटे का वक्त लेती हैं. बुलेट ट्रेन में ये 6 घंटे में होगा, जो हवाई यात्रा के मुकाबले बेहतर होगी. बुलेट ट्रेन में एयरपोर्ट घंटों पहले पहुंचने या सिक्योरिटी चेकिंग का झंझट नहीं होता. स्टेशन शहर के भीतर होता है. इससे समय और पैसा दोनों बचेगा.
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बुलेट ट्रेन की स्पीड
भारत की आने वाली बुलेट ट्रेनें जापान की शिनकान्सेन ई5 (Shinkansen E5) सीरीज की तकनीक पर चलेंगी. ये ट्रेनें 320 किमी प्रति घंटे की गति से दौड़ेंगी. इसका आगे का हिस्सा पक्षी की चोंच जैसा लंबा होगा, जो हवा के दबाव को कम करता है. साथ ही टनल में प्रवेश के समय तेज धमाके की आवाज को रोकता है. इन ट्रेनों को 50 डिग्री तक गर्मी और उमस झेलने के लिए खास कूलिंग और भारी-भरकम एयर फिल्टर सिस्टम के साथ बनाया जाएगा, ताकि धूल और नमी के कण मैकेनिकल रूम या पैसेंजर केबिन तक न पहुंचे.