- लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद आज सदन में बोला
- ओम बिरला ने कहा कि सदन नियम और परंपराओं से ही चलता रहा है
- उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को किसी भी विषय पर विशेषाधिकार नहीं है
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने अपने खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के निचले सदन में गिरने के बाद आज सदन की कार्यवाही का संचालन किया. इस दौरान बिरला ने अविश्वास प्रस्ताव के दौरान विपक्षी सांसदों द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब दिया. उन्होंने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को नहीं बोलने देने के विपक्षी सासंदों के आरोपों पर कहा कि चाहे सदन में कोई भी नेता हो उन्हें सदन के अंदर नियमों और प्रक्रिया के तहत ही बोलने दिया जाता है. प्रतिपक्ष के नेता किसी भी विषय पर नहीं बोल सकते हैं ये उनका विशेषाधिकार नहीं है. उन्होंने कहा कि सदन नियमों से ही चलता है. सदन के कार्य संचालन का नियम सदन द्वारा ही बनाए गए हैं.
सदन नियमों से ही चलेगा
ओम बिरला ने कहा कि ये सदन 140 करोड़ नागरिकों के संप्रभु इच्छा का प्रतिनिधत्व करता है. उन्होंने कहा कि मैंने हमेशा ये प्रयास किया है कि सदन के अंदर प्रत्येक सदस्य नियमों और प्रक्रियाओं के तहत अपने विचार व्यक्त करें. ओम बिरला ने कहा कि सदन में जब भी लोकमत के किसी विषय का मुद्दा होता है तो चाहे पीएम हों या मंत्रीगण हों तो उन्हें नियम 370 के तहत अध्यक्ष से पूर्व अनुमति प्राप्त करनी होती है. बिरला ने कहा कि किसी सदस्य को नियमों से परे जाकर बोलने का अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा कि हमारे देश में नियमों का सम्मान की समृद्ध परंपरा रही है. उन्होंने कहा कि भविष्य में भी सदन नियम और प्रक्रिया से ही चलेगा. चाहे कोई सहमत हो या असहमत हो.
सहमति और असहमति की परंपरा रही है
बिरला ने कहा कि उन्होंने सभी सदस्यों को समय देने का प्रयास किया. उन्होंने कहा कि ये सदन समाज के अंतिम व्यक्ति में खड़े हर व्यक्ति की आवाज बने. उन्होंने कहा कि वो ऐसे सदस्यों को सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करूं जो संकोच करते हैं या नहीं बोलते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे सदस्यों को मैं अपने चैंबर में बुलाकर उन्हें बात रखने की अपील करता रहा हूं. उन्होंने कहा कि सदन में बोलने से सदन मजबूत होता है. ये सदन विचारों के चर्चा का जीवंत मंच रहा है. उन्होंने कहा कि सहमति और असहमति की परंपरा रही है.
सदन का किया धन्यवाद
बिरला ने कहा कि 10 फरवरी 2026 को प्रतिपक्ष के कुछ माननीय सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया. उन्होंने कहा कि उनकी संविधान द्वारा स्थापित संसदीय लोकतंत्र की व्यवस्था में हमारी अटूट आस्था रही है. बिरला ने कहा कि विपक्ष के इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए मैंने खुद को सदन की कार्यवाही से अलग कर लिया. इस चर्चा के दौरान अनेक विचार अनेक भावनाएं सदन के सामने आईं. उन्होंने कहा कि वो सदन के अंदर सदस्यों की बात को गंभीरता और ध्यान से सुना. चाहे सदस्यों ने समर्थन में विचार रखे हों या आलोचना के रूप में अपने विचार दिए हों सबको धन्यवाद करता हूं. ये आसन किसी व्यक्ति का नहीं ये भारत की लोकतांत्रिक परंपरा, संविधान की भावना और महान परंपरा का प्रतीक है. मैंने उस मर्यादा और परंपरा को मजबूत किया है. संस्थाएं मर्यादा और परंपराएं स्थायी रहती हैं. बिरला ने कहा कि सदन द्वारा मेरे ऊपर व्यक्त किए गए विश्वास के लिए सभी का आभार व्यक्त करता हूं. लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि आपके विश्वास को मेरी जिम्मेदारी मानते हुए पूरी शिद्दत के साथ निभाने की कोशिश करता हूं.













