- LIC के पास लगभग 55 लाख करोड़ रुपये की बचत का प्रबंधन करने वाला व्यापक वित्तीय पोर्टफोलियो है
- इंफ्रास्ट्रक्चर में LIC का निवेश दीर्घकालिक स्थिरता और फिक्स्ड इनकम प्रदान करता है
- LIC पर दबाव पड़ने से भारत के बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास में जरूरी लंबे समय के निवेश में बाधा आ सकती है
LIC को लगातार टारगेट किया जा रहा है. अदाणी ग्रुप में पैसा क्यों लगाया? रिलायंस ग्रुप में निवेश क्यों किया? जवाब सीधा है - मुनाफे के लिए. LIC में पैसा लगाने वाले आम भारतीयों के फायदे के लिए. देश की तरक्की के लिए. LIC को कठघरे में खड़ा करने वाले अपने आरोपों को साबित करने के लिए कोई डेटा शेयर नहीं करते. सिर्फ हवा-हवाई आरोप लगाते हैं. जबकि सच कुछ और है.
सच क्या है?
- सच ये है कि पिछले 11 साल में शेयर बाजार में LIC का पैसा 10 गुना बढ़ा है. LIC का इक्विटी पोर्टफोलियो 2014 में ₹1.5 लाख करोड़ से बढ़कर आज ₹15.5 लाख करोड़ हो गया है.
- सच ये है कि LIC का निवेश एक दो कंपनियों में नहीं है बल्कि 300 से ज्यादा भारतीय कंपनियों में है. इनमें अदाणी भी है, रिलायंस भी है और टाटा, बिड़ला भी है.
- सच ये है कि इस साल जिस वक्त LIC ने अदाणी ग्रुप में 5000 करोड़ लगाए लगभग उसी समय अमेरिका की दिग्गज बीमा कंपनियों ने इससे ज्यादा पैसा इस ग्रुप में लगाया. दुनिया भर के बैंकों ने पैसा लगाया. LIC के निवेश पर सवाल खड़ा करने वाली इन देशी-विदेशी ताकतों की मंशा पर सवाल इसलिए खड़े हो जाते हैं क्योंकि वो ये बातें छिपा जाती हैं.
- सच ये है कि SBI लाइफ, HDFC लाइफ, ICICI, कोटक और कई निजी म्यूचुअल फंड का भी इन्हीं कंपनियों में बराबर या कहीं-कहीं इससे ज्यादा निवेश है. लेकिन सवाल सिर्फ LIC पर क्यों उठाए जाते हैं. आखिर मंशा क्या है?
बीमा कंपनियों इंफ्रा में पैसा क्यों लगाती हैं?
दुनिया की दिग्गज निवेश कंपनियां इंफ्रा सेक्टर में पैसे लगाती हैं ताकि लंबे समय तक आमदनी होती रहे. वॉरेन बफे की कंपनी बर्कशायर हाथवे के निवेश और कामयाबी की सब तारीफ करते हैं. इस कंपनी ने अमेरिका की इंफ्रा कंपनियों में बड़ा निवेश किया हुआ् है. इस कंपनी का 20% मुनाफा इंफ्रा सेक्टर से ही आता है. यही काम lIC कर रही है तो सवाल उठाए जाते हैं. बल्कि LIC को तो इंफ्रा में ज्यादा पैसा लगाने की जरूरत है क्योंकि LIC ही नहीं SBI LIFE, ICICI Prudential जैसी भारत की दूसरी बड़ी बीमा कंपिनियों का बड़ा निवेश आईटी और बैंकिंग सेक्टर में है. ये वैसे सेक्टर हैं जिनमें तकनीकी और भू-राजनीतिक बदलावों के कारण नियमित और निश्चित आमदनी की गारंटी नहीं.
अभी हाल ही में अमेरिका ने वीजा पर एक लाख डॉलर की फीस लगा दी. इससे आईटी सेक्टर में हंगामा मच गया. जाहिर है इन कंपनियों के शेयरों पर भी असर पड़ा. कल्पना कीजिए कि आज से 15 साल बाद अगर कोई बड़ी आपदा आ जाए, अर्थव्यवस्था अस्थिर हो जाए तो कौन सी बीमा कंपनी अपनी देनदारी बेहतर तरीके से चुका पाएगी. वो जिसने इंफ्रा जैसे दीर्घकालीक सेक्टरों में निवेश किया हो.
LIC पर सवाल, भारत के भरोसे पर सवाल
LIC सिर्फ एक कंपनी नहीं है. यह लगभग हर भारतीय परिवार से जुड़ी है. LIC के भरोसे पर हमला भारत के संस्थानों में लोगों के भरोसे पर असर करता है. LIC निवेश करने से पहले सख्त नियमों का पालन करती है. खास बात यह है कि एलआईसी अपने कुल फंड का 1% से ज्यादा किसी भी कॉर्पोरेट ग्रुप में नहीं लगा सकती. हर निवेश से पहले कई स्तर की जांच होती है, बीमा संबंधी कानूनों का पालन होता है. बोर्ड की मंजूरी लगती है और बाहरी सलाहकारों की भी राय ली जाती है. कोई भी अधिकारी या राजनेता यह तय नहीं कर सकता कि एलआईसी कहां निवेश करे. एलआईसी का पैसा पूरी अर्थव्यवस्था में फैला हुआ है.
तो फिर LIC पर आरोपों के पीछे क्या है?
ऐसा लगता है कि कुछ विदेशी और देशी ताकतें नहीं चाहती हैं कि LIC अपना काम आजादी से करे. उस पर इतना दबाव बना दो कि वो फैसले करने में डरने लगे. चूंकि LIC भारत में सबसे बड़ी वित्त कंपनी है इसलिए उसे डिरेल करके पूरी भारतीय अर्थव्यवस्था को निशाना बनाने की कोशिश है.
और ऐसा पहली बार नहीं हुआ है.
याद कीजिए 2010 से 2013 का दौर. तब जानबूझकर कोयला, ऊर्जा और रक्षा सेक्टरों के खिलाफ अभियान चलाए गए. नतीजा ये हुआ कि नीतिगत फैसले अटक गए. अर्थव्यवस्था को मानो लकवा मार गया. बैकों का NPA बढ़ गया.
आज इन ताकतों के आगे LIC झुकी तो न सिर्फ उसने निवेशकों का नुकसान होगा, बल्कि भारत के इंफ्रा सेक्टर और पूंजी बाजार को बड़ा नुकसान होगा. कुल मिलाकर हमारी अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा.
(Disclaimer: New Delhi Television is a subsidiary of AMG Media Networks Limited, an Adani Group Company.)














