लेफ्ट Vs राइट: JNU में मिडनाइट ‘फाइट’, VC के खिलाफ मार्च से शुरू हुआ विवाद, जानिए कैसे हिंसा में बदल गया

दिल्ली के JNU कैंपस में देर रात लेफ्ट और ABVP छात्रों के बीच भिड़ंत हो गई, जिसमें मारपीट और पत्थरबाज़ी की घटनाएं हुई. दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमले का आरोप लगा रहे हैं.

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  • जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में छात्र संगठनों लेफ्ट और ABVP के बीच हिंसक झड़प रविवार की आधी रात हुई
  • लेफ्ट संगठनों ने कुलपति के खिलाफ मार्च निकाला था जिसके बाद हिंसा की घटना हुई
  • झड़प में पथराव और मारपीट हुई, कई छात्र घायल हुए, दोनों पक्ष के छात्रों को चोट लगी है
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नई दिल्ली:

दिल्ली का जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर वैचारिक टकराव का मैदान बन गया. रविवार की आधी रात कैंपस उस समय अफरा-तफरी में बदल गया जब दो छात्र संगठनों लेफ्ट और ABVP के बीच जोरदार झड़प हुई. विवाद इतना बढ़ा कि कैंपस के कई हिस्सों में मारपीट, पथराव और भगदड़ मच गई. देर रात की ये घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर गई है कि देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में आखिर क्यों बार-बार वैचारिक लड़ाई हिंसा की शक्ल ले लेती है.

घटना की शुरुआत रविवार को हुए एक मार्च से बताई जा रही है. JNU के कुलपति पर कथित जातिवादी टिप्पणियों के विरोध में लेफ्ट छात्र संगठनों ने “समानता मार्च” निकाला था. इस मार्च में छात्रों ने वीसी के इस्तीफे की मांग की. लेफ्ट संगठनों का आरोप है कि इसी दौरान ABVP के कार्यकर्ताओं ने उनका रास्ता रोकने की कोशिश की, जिसके चलते तनाव बढ़ा और फिर बात हाथापाई तक पहुंच गई. वहीं ABVP का दावा है कि हमला लेफ्ट संगठनों ने किया और उनके शांतिपूर्वक पढ़ाई कर रहे छात्रों को टारगेट बनाया गया.

घटना की शुरुआत कैसे हुई?

रात करीब 1:30 बजे स्थिति पूरी तरह बेकाबू हो गई. पथराव हुआ, डंडे चले और कई छात्र घायल हुए. ABVP मीडिया संयोजक विजय जायसवाल गंभीर रूप से घायल बताए गए. उनका कहना है कि लेफ्ट गुट के 300–400 नकाबपोश लोग कैंपस में घुसे और स्कूल एरिया, लाइब्रेरी व स्टडी रूम में मौजूद छात्रों पर हमला किया. कुछ छात्रों को सुरक्षा के लिए खुद को कमरे और बाथरूम में बंद करना पड़ा.

ABVP ने सुनियोजित हिंसा का लगाया आरोप

ABVP ने सोशल मीडिया पर कई पोस्ट करते हुए कहा कि यह “छात्र राजनीति नहीं बल्कि सुनियोजित हिंसा” थी. उनका आरोप है कि लेफ्ट गुटों ने विचारधारा से असहमत छात्रों को निशाना बनाया. ABVP के एक घायल छात्र प्रतीक भारद्वाज ने बताया कि खुद को बचाने के लिए वह एक बाथरूम में छिप गए, लेकिन कथित तौर पर 150 लोगों का समूह वहां पहुंचा और उन्होंने दरवाजा तोड़ने की कोशिश की. हमलावरों ने फायर एक्सटिंग्विशर का धुआं बाथरूम में भर दिया. प्रतीक ने बताया कि पुलिस और JNU सिक्योरिटी समय पर नहीं पहुंची और बाद में उनके साथियों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया.

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दूसरी ओर, लेफ्ट छात्र संगठन इन आरोपों से इनकार कर रहे हैं. उनका कहना है कि उनकी यात्रा शांतिपूर्ण थी, लेकिन ABVP के छात्रों ने जानबूझकर तनाव बढ़ाया और उन पर पथराव कर हंगामा खड़ा किया. लेफ्ट गुटों ने कहा कि वे सिर्फ VC की कथित टिप्पणियों के विरोध में मार्च निकाल रहे थे, और ABVP ने उन पर बेवजह हमला किया.

हिंसा के बाद JNSU के कैंप की तस्वीर जहां वो प्रदर्शन कर रहे थे


ABVP जेएनयू यूनिट के वाइस प्रेसिडेंट मनीष चौधरी का आरोप है कि लेफ्ट संगठनों ने कैंपस में कई जगह ताले लगाए और क्लास में जा रहे छात्रों को धमकाया. मनीष के मुताबिक प्रदर्शन की औपचारिक सूचना प्रशासन को 48 घंटे पहले नहीं दी गई थी, इसलिए यह मार्च नियमों के खिलाफ था.

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घायल छात्रों को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करवाया गया

झड़प में शामिल कई छात्रों को सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया और कुछ को वहीं प्राथमिक उपचार दिया गया. कैंपस में देर रात तक तनाव रहा, हालांकि सुबह होते-होते स्थिति सामान्य करने की कोशिशें जारी रहीं. JNU में वैचारिक मतभेद नई बात नहीं है, लेकिन हाल के वर्षों में ये टकराव लगातार हिंसा में बदलते दिख रहे हैं. हर घटना के बाद दूसरे पक्ष पर आरोप लगते हैं, पुलिस की भूमिका पर सवाल उठते हैं और प्रशासन पर कार्रवाई न करने का आरोप लगता है. इस बार भी वही हुआ.

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