कुंभ मेला भगदड़ मामले में हाईकोर्ट का सख्त रुख, पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए 30 दिन की डेडलाइन तय

कुंभ मेला भगदड़ मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुआवजे के भुगतान में और देरी से इनकार कर दिया है. अदालत ने मेला प्राधिकरण और जांच आयोग को 30 दिनों के भीतर पीड़ित के दावे को अंतिम रूप देने का निर्देश दिया है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
कुंभ मेला भगदड़ मामले में हाईकोर्ट का सख्त रुख
प्रयागराज:

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राज्य जांच आयोग की अंतिम रिपोर्ट लंबित रहने के कारण कुंभ मेला भगदड़ के एक पीड़ित व्यक्ति के मुआवजे के दावे का भुगतान करने के लिए और मोहलत देने से इनकार कर दिया है. उच्च न्यायालय ने मेला प्राधिकरण और जांच आयोग को मृतक महिला के पति द्वारा किए गए दावे को 30 दिनों के भीतर अंतिम रूप देने का निर्देश दिया है. इस महिला की भगदड़ में कुचलकर मृत्यु हो गई थी.

उदय प्रताप सिंह नाम के एक व्यक्ति द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने चेतावनी दी, कि इस आदेश का अनुपालन नहीं करने पर अदालत इस मामले पर गंभीर रुख अपनाने को बाध्य होगी.

उल्लेखनीय है कि 29 जनवरी, 2025 को मौनी अमावस्या को तड़के हुई इस भगदड़ में कथित तौर पर 30 से 39 लोग मारे गए थे. भगदड़ की यह घटना संगम नोज के पास हुई थी. इस मामले पर पिछले वर्ष छह जून को सुनवाई करते हुए एक अवकाश पीठ ने भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवजा देने में विलंब को लेकर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी.

अब, 8 जनवरी को सुनवाई को दौरान राज्य सरकार ने दलील दी कि जांच आयोग 17 दिसंबर, 2025 को याचिकाकर्ता का बयान पहले ही दर्ज कर चुका है और भगदड़ के दौरान मृत्यु के मुद्दे की मेला प्राधिकरण के साथ समन्वय में समीक्षा की जा रही है. राज्य सरकार ने कहा, कि व्यापक जनहित में जांच आयोग का कार्यकाल बढ़ाया गया है क्योंकि पीड़ितों के कई आश्रित और अभिभावक देरी से आयोग से संपर्क कर रहे हैं और उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं.

हालांकि, पीठ मुआवजे के भुगतान में और विलंब को लेकर राजी नहीं हुई. कोर्ट ने कहा, 'यद्यपि इस अदालत ने 6 जून, 2025 को एक विस्तृत आदेश पारित किया जिसके तहत अधिकारियों को इस चरण में अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने की आवश्यकता थी. हम यह आवश्यक पाते हैं कि याचिकाकर्ता के मुआवजे के दावे का मुद्दा जल्द से जल्द निपटाया जाए.'

इसके परिणाम स्वरूप, अदालत ने आयोग और मेला प्राधिकरण को 30 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता के मुआवजे के दावे को अंतिम रूप देने का निर्देश दिया. साथ ही राज्य सरकार और मेला प्राधिकरण का प्रतिनिधित्व कर रहे अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी को सुनवाई की अगली तिथि तक प्राधिकरण द्वारा किए गए निर्णय से अदालत को अवगत कराने को कहा.

Advertisement

अदालत ने 8 जनवरी के अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि अनुपालन हलफनामा दाखिल नहीं किया जाता है तो यह कोर्ट इस मामले पर गंभीर रुख अपनाने को बाध्य होगी. अदालत ने सुनवाई की अगली तिथि 18 फरवरी, 2026 निर्धारित की.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
Featured Video Of The Day
J&K News: Sonmarg में आया भयंकर एवलांच, CCTV दिल दहला देगा | BREAKING NEWS