भाषाओं की रक्षा से कला और परंपरा तक, AI कैसे भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण को बना रहा सशक्त?

संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल ने कहा कि एआई बाधाओं को तोड़ने का एक बहुत ही शक्तिशाली साधन है. इसके जरिए भाषा, भूगोल और पहुंच की बाधाएं भी टूट रही हैं. एआई का सही इस्तेमाल, देश की विशाल सांस्कृतिक और ज्ञान प्रणालियों को उन रूपों और भाषाओं में लोगों तक पहुंचाने में आसान बनाता है, जिनसे वे बहुत ही सहज महसूस करते हैं.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया.
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग सांस्कृतिक पुनर्जागरण और विरासत संरक्षण में किया जा रहा है
  • एआई तकनीक से प्राचीन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण और भाषाओं का रियल टाइम अनुवाद संभव हो रहा है
  • एआई मंदिरों, आदिवासी बस्तियों और संग्रहालयों जैसे कम तकनीकी क्षेत्रों में सांस्कृतिक ब्रिज का काम कर रहा है
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
नई दिल्ली:

भारत की सिलिकॉन कंप्यूटिंग क्षमता अब भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण को भी शक्ति दे रही है. एआई को दशकों से ठंडी मशीनों, सर्वरों के रैक, चमकते जीपीयू, एल्गोरिथम ट्रेडिंग फ्लोर और फेसलेस डेटा सेंटर्स के क्षेत्र के रूप में देखा जाता रहा है. दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में, एआई की चर्चा प्रोडक्टिविटी, प्रोफिट और पावर के संदर्भ में की जाती है. हालांकि, भारत की राह बिल्कुल अलग है. हमारे देश में एआई का इस्तेमाल न सिर्फ ऑप्टिमिस्ट सिस्टम में हो रहा है, बल्कि सभ्यता को संरक्षित करने, भाषाओं की रक्षा करने, प्राचीन पांडुलिपियों को पुनर्जीवित करने, सांस्कृतिक स्मृति को बढ़ाने और आध्यात्मिकता, कला और परंपरा तक पहुंच को गहरा करने के लिए भी हो रहा है. 

ये भी पढ़ें- 7 RCR हुआ लोक कल्याण मार्ग, PMO बना सेवा तीर्थ... PM मोदी खुद रखते हैं ये नाम, आज इन नए नामों की वजह भी बताई

भारतीय विरासत से कैसे जोड़ा रहा AI?

ताड़ के पत्तों पर अंकित पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण से लेकर भारत की असाधारण भाषाई विविधता में रियल टाइम ट्रांसलेशन तक, एआई धीरे से इसे नया आकार दे रही है कि भारतीय अपनी विरासत से कैसे जुड़ते हैं और दुनिया भारत को कैसे समझती है. जिन जगहों पर जहां, उन्नत कंप्यूटिंग की उम्मीद कम से कम होती है, जैसे मंदिर, आक्राइव ट्राइबल हेमलेट, आदिवासी बस्तियां, संग्रहालय और सांस्कृतिक भंडार,  एआई अतीत और भविष्य के बीच एक अनदेखे ब्रिज के रूप में काम कर रहा है. इस कोशिश के पीछे एक सरल लेकिन शक्तिशाली विचार यह है कि टेक्नोलॉजी को लोगों, संस्कृति और ज्ञान की सेवा करनी चाहिए, न कि उन्हें अभिभूत करना चाहिए.

बाधाओं को तोड़ने में AI की अहम भूमिका

संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल ने कहा कि एआई बाधाओं को तोड़ने का एक बहुत ही शक्तिशाली साधन है. इसके जरिए भाषा, भूगोल और पहुंच की बाधाएं भी टूट रही हैं. एआई का सही इस्तेमाल, देश की विशाल सांस्कृतिक और ज्ञान प्रणालियों को उन रूपों और भाषाओं में लोगों तक पहुंचाने में आसान बनाता है, जिनसे वे बहुत ही सहज महसूस करते हैं. उन्होंने कहा कि एआई द्वारा भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने में मदद करने वाले कई उपयोगों को आगामी इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में एक खास एग्जीबिशन में प्रदर्शित किया जाएगा.

Featured Video Of The Day
Ranveer Singh Threat Case Update: 'धुरंधर' को Harry Boxer की धमकी? | Lawrence Bishnoi | NDTV India