'नाराज फूफा' कौन? 'दिमागी नक्सल' से लेकर Gen-Z तक... NDTV पर किरेन रिजिजू का बेबाक इंटरव्यू

रिजिजू ने "दिमागी नक्सल" को देश की संस्थाओं और युवाओं के मन में अविश्वास फैलाने वाली मानसिकता बताया, वहीं Gen-Z की असली मांग पारदर्शिता, निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था और अवसरों की समानता को बताया.

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किरेन रिजिजू ने कहा कि आज का युवा न तो बहकावे में आता है और न ही खोखले नारों पर भरोसा करता है.
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केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने NDTV के खास कार्यक्रम 'People's Sansad' में राजनीति, संसद की गतिरोध, युवाओं की अपेक्षाओं और विपक्ष को लेकर खुलकर अपनी बात रखी. उन्होंने 'नाराज फूफा' के सियासी तंज से लेकर 'दिमागी नक्सल' के खतरे, Gen-Z की वास्तविक मांग और अपनी फिटनेस की जीवनशैली तक सारे सवालों के जवाब दिए.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द 'नाराज फूफा' को लेकर जब सवाल पूछा गया कि आखिर राजनीति में यह तमगा किसे दिया गया है, तो रिजिजू ने भारतीय परंपरा का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय परिवारों की शादियों में अक्सर एक फूफा होते हैं, जो हर बात पर मुंह फुलाए रहते हैं और जिन्हें खुश करना असंभव सा होता है. राजनीति में भी यही मिजाज विपक्ष का बन चुका है. 

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि साल 2014 के बाद से देश की जनता लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर पूरा भरोसा जता रही है. जब जनता विपक्ष को वोट नहीं दे रही और वे बार-बार चुनाव हार रहे हैं, तो इसके लिए सत्ता पक्ष कैसे जिम्मेदार हो सकता है. चुनाव हारने के बाद हर समय नाराज रहना, संसद में सिर्फ हंगामा खड़ा करना और देश के खिलाफ बयानबाजी करना इसी नाराज रिश्तेदार जैसा बर्ताव है, जो हर अच्छे काम में केवल बुराई ढूंढता रहता है.

स्विमिंग के वायरल वीडियो पर क्या बोले रिजिजू?

राजनीतिक चर्चा के बीच किरेन रिजिजू के एक वायरल वीडियो पर भी बात हुई. इसमें वह अरुणाचल प्रदेश की एक उफनती, तेज बहाव वाली पहाड़ी नदी में छलांग लगाकर तैरते नजर आए थे.

जब उनसे उनकी फिटनेस और इस खतरनाक स्टंट के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि यह कोई दिखावा या सोशल मीडिया का स्टंट नहीं है. वे पूर्वोत्तर के पहाड़ों, जंगलों और नदियों के बीच पले-बढ़े हैं, इसलिए प्रकृति की इन चुनौतियों से निपटना, उफनती नदियों में तैरना और कठिन परिस्थितियों में रहना उनकी जीवनशैली का स्वाभाविक हिस्सा है. 

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उन्होंने यह संदेश भी दिया कि शारीरिक और मानसिक फिटनेस केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के हर नागरिक, खासकर युवाओं को अपने स्वास्थ्य और अनुशासन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए.

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