जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की कोर्ट का बहिष्कार, अब मनोज जैन की अदालत में पेश होंगे केजरीवाल-सिसोदिया

दिल्ली शराब नीति मामले में पूर्व CM अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया ने अब न्यायमूर्ति मनोज जैन की अदालत के समक्ष पेश होने का निर्णय लिया है.

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अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया
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  • अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक आबकारी नीति मामले में नई अदालत के समक्ष पेश होंगे.
  • जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सुनवाई से खुद को अलग करने से इनकार किया और उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर आरोप लगे.
  • हाईकोर्ट ने अवमानना मामले की सुनवाई के लिए जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की अलग बेंच गठित की.
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दिल्ली शराब नीति मामले में नया मोड़ आया है. दिल्ली के पूर्व CM अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने अब न्यायमूर्ति मनोज जैन की अदालत के समक्ष आबकारी नीति मामले की कार्यवाही में भाग लेने का निर्णय लिया है. इससे पहले ये तीनों नेता न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में चल रही सुनवाई का बहिष्कार कर रहे थे. लेकिन अब उन्होंने नई अदालत में पेश होने का फैसला किया है.

14 मई को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने एक विस्तृत आदेश जारी करते हुए कहा कि जब उन्होंने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने से इनकार कर दिया, तो उनके खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और सार्वजनिक बयान दिए गए, जो निष्पक्ष आलोचना और आपराधिक अवमानना ​​के बीच की सीमा को पार कर गए. जस्टिस शर्मा ने कहा कि अवमानना ​​करने वालों ने न केवल असहमति व्यक्त की, बल्कि इस मौजूदा जज के खिलाफ ही नहीं, बल्कि पूरी न्यायपालिका के खिलाफ बदनामी का अभियान चलाया.

वहीं, इस प्रकरण से जुड़े एक अन्य मामले, जिसमें अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और सौरभ भारद्वाज समेत अन्य नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना का मामला चल रहा है, उसकी सुनवाई के लिए भी हाईकोर्ट ने अलग बेंच गठित की है. इस अवमानना मामले की सुनवाई जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की खंडपीठ करेगी. बताया जा रहा है कि इन दोनों महत्वपूर्ण मामलों पर दिल्ली हाईकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई होगी, जिस पर हर किसी की नजरें टिकी हुई हैं.

आकबारी नीति से जुड़े सीबीआई के मामले में ट्रायल कोर्ट ने 1,100 से ज्यादा पैराग्राफ वाले अपने फैसले में केजरीवाल और सिसोदिया समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों से पता चलता है कि अब रद्द हो चुकी आबकारी नीति एक सलाह-मशविरे और सोच-विचार वाली प्रक्रिया का नतीजा थी और अभियोजन पक्ष कोई बड़ी साजिश साबित करने में नाकाम रहा.

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दिल्ली हाईकोर्ट में अपनी पुनर्विचार याचिका में सीबीआई ने आरोप लगाया है कि उस समय की आप नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार द्वारा बनाई गई आबकारी नीति में कुछ चुनिंदा शराब व्यापारियों को फायदा पहुंचाने के लिए हेर-फेर किया गया था, जिसके बदले में उन्हें रिश्वत मिली थी.

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