- कर्नाटक के परिवहन मंत्री बायराथी सुरेश ने बीती रात नायक स्टाइल में कार्रवाई की.
- मुंह पर मास्क लगाए मंत्री बिना किसी तामझाम के सरकारी बस में सवार हुए.
- दो घंटे तक 10 से अधिक बसों में यात्रा की, और लापरवाही मिलने पर एक ड्राइवर और कंडक्टर को सस्पेंड भी किया.
अनिल कपूर की सुपरहिट फिल्म 'नायक' की तरह एक्शन हो तो सिस्टम में सुधार जरूर होगा... कई लोगों का ऐसा मामला है. सरप्राइज विजिट और क्विक एक्शन से न केवल सिस्टम की खामियां उजागर होती है बल्कि यह संदेश भी जाता है कि लापरवाही की तो कार्रवाई होगी. ऐसा ही एक मामला कर्नाटक से सामने आया है. कर्नाटक के परिवहन मंत्री बायराथी सुरेश ने बीती रात नायक स्टाइल में कार्रवाई की. मुंह पर मास्क लगाए मंत्री बिना किसी तामझाम के सरकारी बस में सवार हुए, दो घंटे तक 10 से अधिक बसों में यात्रा की, और लापरवाही मिलने पर एक ड्राइवर और कंडक्टर को सस्पेंड भी किया.
मंत्री के इस सरप्राइज विजिट के वीडियो भी सामने आए हैं, जिसमें वो आम यात्री की तरह बस में सवार नजर आ रहे हैं. मंत्री बायराथी सुरेश ने बेंगलुरु में BMTC बस सर्विस के यात्रियों के अनुभव को समझने के लिए ऐसी यात्रा की.
दो घंटे तक 10 से अधिक बसों की यात्रा
मिली जानकारी के अनुसार मंत्री शनिवार शाम 7:10 बजे से 9:10 बजे के बीच 10 से ज़्यादा BMTC बसों में सफ़र किया और जयामहल, RT नगर, हेब्बल, नागावारा, हेन्नूर और गेद्दालाहल्ली जैसे इलाकों से गुजरे. इस दौरान एक आम यात्री की तरह उन्होंने टिकट खरीदे, यात्रियों से बातचीत की और बस सर्विस की क्वालिटी के बारे में फीडबैक लिया.
बस ड्राइवर और कंडक्टर को किया सस्पेंड
निरीक्षण के दौरान, बायराथी सुरेश ने BMTC बस KA-57-F-3372 के ड्राइवर और कंडक्टर को सस्पेंड करने का आदेश दिया. आरोप है कि एक यात्री के उतरने का इशारा करने के बावजूद उन्होंने फन वर्ल्ड बस स्टॉप पर बस नहीं रोकी थी.
मिनिस्टर को यात्रियों की एक आम परेशानी का भी सामना करना पड़ा. हेब्बल-नागाशेट्टीहल्ली रूट की एक बस में जब उन्होंने 100 रुपये का नोट दिया, तो कंडक्टर ने उनसे उतरने को कहा क्योंकि उसके पास छुट्टे पैसे नहीं थे.
मंत्री बोले- बेहतर व्यवस्था के लिए किया दौरा
निरीक्षण का दायरा BMTC सर्विस से आगे भी बढ़ा, जब मिनिस्टर ने नागाशेट्टीहल्ली में एक ऑटो-रिक्शा ड्राइवर से जुड़े विवाद में दखल दिया. उन्होंने ड्राइवर को फटकार लगाई क्योंकि मीटर पर किराया 30 रुपए दिखा रहा था, जबकि ड्राइवर 36 रुपये मांग रहा था.
बायराथी सुरेश ने कहा कि यह औचक दौरा जवाबदेही बढ़ाने, ट्रांसपोर्ट स्टाफ में अनुशासन बनाए रखने और यह पक्का करने की कोशिशों का हिस्सा हैं कि बेंगलुरु के यात्रियों को भरोसेमंद और बिना किसी परेशानी वाली पब्लिक ट्रांसपोर्ट सर्विस मिले.
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