कर्नाटक हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, SC-ST के लिए बढ़ाया गया आरक्षण हटाया, क्या है इसकी वजह

Karnataka Reservation: कर्नाटक हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला किया है. SC-ST के लिए बढ़ाया गया आरक्षण निरस्त कर दिया गया है. कोर्ट ने 50 प्रतिशत का हवाला देते हुए यह फैसला किया है.

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कर्नाटक हाईकोर्ट ने SC-ST के लिए बढ़ाया आरक्षण हटाया (फाइल फोटो)
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  • कर्नाटक हाईकोर्ट ने SC-ST वर्ग के लिए बढ़ाया गया आरक्षण हटा दिया है.
  • हाईकोर्ट ने बताया कि यह फैसला 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा का उल्लंघन करता है.
  • संकेत हैं कि राज्य सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जा सकती है.

कर्नाटक हाई कोर्ट ने अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए बढ़ाया गया आरक्षण निरस्त कर दिया है. इस फैसले के पीछे अदालत का कहना है कि राज्य में आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकती है, जबकि राज्य सरकार की तरफ से बढ़ाया गया आरक्षण सुप्रीम कोर्ट की तरफ से तय 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा का उल्लंघन करता है. इसलिए यह फैसला लिया गया. मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू और जस्टिस के.एस. हेमलेखा की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया है. बता दें कि तत्कालीन बीजेपी की सरकार ने 2022 में यह कोटा बढ़ाया था. 

कर्नाटक में 56 प्रतिशत हो गया था आरक्षण 

कर्नाटक सरकार ने 'कर्नाटक अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आरक्षण अधिनियम-2022' के जरिए SC कोटा को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 17 प्रतिशत और ST कोटा को 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया था. सरकार के इस फैसले के बाद कर्नाटक में कुल आरक्षण 56 प्रतिशत हो गया था. चीफ जस्टिस विभु बखरू और जस्टिस के.एस. हेमलेखा की बेंच ने कहा कि इस अधिनियम की धारा-3, जिसके तहत कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा हो गया था. यह पूरी तरह ससे असंवैधानिक है और संविधान के अनुच्छेद-14 और 15 का उल्लंघन करती है. 

आरक्षण के फैसले को मिली थी चुनौती

हाईकोर्ट ने अधिनियम की धारा 4 को भी रद्द कर दिया. कोर्ट ने कहा कि यह अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है, जो कानून के सामने समानता और सरकारी नौकरी में समान अवसर की गारंटी देते हैं. बेंच ने कहा कि 50 प्रतिशत की सीमा से ज्यादा आरक्षण संविधान में दी गई समानता की व्यवस्था का उल्लंघन करेगा. दरअसल, राज्य सरकार के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी. जिसमें 1992 के ऐतिहासिक इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ के मामले का हवाला दिया गया था. जिसमें बताया गया था कि राज्य सरकार का आरक्षण बढ़ाने का फैसला 50 प्रतिशत की सीमा का उल्लंघन करता है.  

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सुप्रीम कोर्ट जा सकती है सरकार

कर्नाटक हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य सरकार अब सुप्रीम कोर्ट जा सकती है. कांग्रेस सरकार के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने इस बात के संकेत दिए हैं. उन्होंने कहा कि इस फैसले से सामाजिक न्याय और शिक्षा वा रोजगार पर असर हो सकता है. उन्होंने कहा वह इस मामले में राज्य सरकार कानून के जानकारों से बातचीत कर रही है. उसके बाद ही आगे का फैसला हो सकता है. 

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