- PM मोदी 13-14 मार्च को असम दौरे पर 47,800 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे.
- कामाख्या मंदिर तक रेलवे स्टेशन से रोपवे बनाया जाएगा जिसकी क्षमता रोज 17,000 यात्रियों को ले जाने की होगी.
- असम माला, शिलांग-सिलचर हाई-स्पीड कॉरिडोर, गैस ग्रिड, रेलवे और PM-किसान 22वीं किस्त जैसी कई योजनाओं की घोषणा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 और 14 मार्च 2026 को असम के दौरे पर रहने वाले हैं. इस दौरान वे कोकराझार, गुवाहाटी और सिलचर में 47,800 करोड़ रुपये से ज्यादा की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और भूमि पूजन करेंगे. इन परियोजनाओं में सड़क, रेल, ऊर्जा, जलमार्ग और पर्यटन से जुड़ी बड़ी योजनाएं शामिल हैं. इनमें एक सबसे खास घोषणा कामाख्या मंदिर तक पहुंच आसान बनाने वाली रोपवे परियोजना है.
प्रधानमंत्री कामाख्या रेलवे स्टेशन को सीधे मंदिर से जोड़ने वाले इस रोपवे का शिलान्यास करेंगे. इस रोपवे में आधुनिक मोनोकेबल डिटैचेबल गोंडोला तकनीक का इस्तेमाल होगा और यह रोजाना करीब 17 हजार यात्रियों को ले जाने की क्षमता रखेगा. इससे तीर्थयात्रियों का समय बचेगा, यात्रा ज्यादा आरामदायक होगी और गुवाहाटी की सड़कों पर भीड़ भी कम होगी.
कामाख्या मंदिर
सबसे बड़ी सड़क परियोजना असम माला 3.0 का भूमि पूजन
प्रधानमंत्री का कार्यक्रम तीन प्रमुख शहरों में होगा. आज दोपहर करीब 1.30 बजे वे कोकराझार में 4,570 करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाओं का भूमि पूजन और शुभारंभ करेंगे. आज ही शाम करीब 5 बजे गुवाहाटी में लगभग 19,680 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास होगा. शनिवार यानी 14 मार्च को सुबह 10.45 बजे प्रधानमंत्री सिलचर में करीब 23,550 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का भूमि पूजन और उद्घाटन करेंगे. कोकराझार में प्रधानमंत्री असम माला 3.0 का भूमि पूजन करेंगे. यह राज्य की बड़ी सड़क परियोजना है जिसके तहत पूरे असम में 900 किलोमीटर से ज्यादा सड़कों का निर्माण किया जाएगा. इस योजना से राष्ट्रीय राजमार्ग और ग्रामीण सड़कों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा और अंतरराज्यीय संपर्क मजबूत होगा.
इसके अलावा प्रधानमंत्री बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद क्षेत्र में लगभग 1,100 करोड़ रुपये की छह सड़क परियोजनाओं का भी भूमि पूजन करेंगे. इनमें चार फ्लाईओवर और दो बड़े पुल शामिल हैं. इनसे कोकराझार में ट्रैफिक जाम कम होगा और पर्यटन, कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं और ग्रामीण कनेक्टिविटी को बड़ा फायदा मिलेगा.
Photo Credit: PIB
तीन नई रेल सेवाओं को हरी झंडी
रेलवे क्षेत्र में भी कई बड़े कदम उठाए जाएंगे. प्रधानमंत्री कोकराझार जिले के बाशबारी में रेलवे की पीओएच वर्कशॉप की आधारशिला रखेंगे. यह कार्यशाला रेलवे के रखरखाव ढांचे को मजबूत करेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा करेगी. इसके साथ ही प्रधानमंत्री तीन नई रेल सेवाओं को हरी झंडी दिखाएंगे. इन ट्रेनों से पूर्वोत्तर भारत का संपर्क दक्षिण भारत और अन्य राज्यों से और मजबूत होगा. इनमें शामिल हैं-
कामाख्या-चारलापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस, यह पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के बीच सीधी रेल कनेक्टिविटी प्रदान करेगी.
गुवाहाटी-न्यू जलपाईगुड़ी एक्सप्रेस, यह असम और पश्चिम बंगाल के बीच संपर्क को बेहतर बनाएगी.
नारंगी-अगरतला एक्सप्रेस, जो असम और त्रिपुरा के बीच संपर्क को सुधारते हुए यात्रियों, व्यापारियों और पर्यटकों के लिए अंतर-राज्यीय यात्रा को सुगम बनाएगी.
Photo Credit: NDTV
पीएम-किसान योजना की 22वीं किस्त
गुवाहाटी में प्रधानमंत्री एक ऐतिहासिक पहल के तहत चाय बागान श्रमिकों को भूमि पट्टे वितरित करेंगे. इससे हजारों परिवारों को पहली बार अपनी जमीन का कानूनी अधिकार मिलेगा. इससे उन्हें आवास सुरक्षा, बैंक ऋण और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होगी.
प्रधानमंत्री पीएम-किसान योजना की 22वीं किस्त भी जारी करेंगे. इसके तहत देश भर के 9.3 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में सीधे 2,000 रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे.
पूर्वोत्तर भारत में गैस ग्रिड के पहले चरण का उद्घाटन
ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़ा निवेश किया जा रहा है. प्रधानमंत्री कोपिली जलविद्युत परियोजना को राष्ट्र को समर्पित करेंगे. लगभग 2,300 करोड़ रुपये की इस परियोजना से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा और क्षेत्र में बिजली आपूर्ति मजबूत होगी.
इसके अलावा प्रधानमंत्री नुमालीगढ़-सिलीगुड़ी पाइपलाइन क्षमता वृद्धि परियोजना को भी राष्ट्र को समर्पित करेंगे. इससे नुमालीगढ़ रिफाइनरी की क्षमता 3 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष से बढ़कर 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष हो जाएगी.
प्रधानमंत्री पूर्वोत्तर भारत गैस ग्रिड के पहले चरण का उद्घाटन भी करेंगे, जो गुवाहाटी को नुमालीगढ़, गोहपुर और ईटानगर से जोड़ेगा. इसकी एक शाखा दीमापुर तक जाएगी. साथ ही वे पंचग्राम में रेल-आधारित पेट्रोलियम टर्मिनल की आधारशिला भी रखेंगे.
रेलवे विद्युतीकरण के क्षेत्र में भी बड़ी परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित की जाएंगी. इनमें रंगिया-मुरकोंगसेलेक रेल लाइन, चापरमुख-डिब्रूगढ़ रेल लाइन, और बदरपुर-सिलचर तथा बदरपुर-चुराईबारी रेल लाइन शामिल हैं. इनसे ट्रेनों का संचालन तेज, ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण के अनुकूल होगा.
पीएम एकता मॉल का उद्घाटन करेंगे
प्रधानमंत्री फुरकटिंग-तिनसुकिया रेल लाइन दोहरीकरण परियोजना की भी आधारशिला रखेंगे जिसकी लागत 3,600 करोड़ रुपये से अधिक है. इससे अतिरिक्त यात्री और मालगाड़ियां चलाने में मदद मिलेगी.
जलमार्ग क्षेत्र में प्रधानमंत्री बिश्वनाथ घाट और नेमाटी में क्रूज टर्मिनल का शिलान्यास करेंगे. साथ ही डिब्रूगढ़ के बोगीबील में रीजनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की शुरुआत करेंगे, जो समुद्री प्रशिक्षण और अनुसंधान का बड़ा केंद्र बनेगा.
गुवाहाटी में प्रधानमंत्री पीएम एकता मॉल का उद्घाटन भी करेंगे. इस मॉल में ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट', जीआई टैग वाले उत्पाद, हस्तशिल्प और हथकरघा वस्तुओं के स्थायी स्टॉल होंगे. यहां बड़े ब्रांड के शोरूम, फूड कोर्ट, पार्किंग और डिजिटल सुविधाएं भी होंगी. इससे स्थानीय कारीगरों को बाजार मिलेगा और क्षेत्रीय संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा.
असम-मेघालय के बीच हाई स्पीड कॉरिडोर
सिलचर में प्रधानमंत्री शिलांग-सिलचर हाई-स्पीड कॉरिडोर का भूमि पूजन करेंगे. यह पूर्वोत्तर भारत का पहला एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड चार-लेन हाई-स्पीड कॉरिडोर होगा. लगभग 22,860 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह 166 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर मेघालय और असम के बीच कनेक्टिविटी को नया आयाम देगा. इससे गुवाहाटी से सिलचर की यात्रा का समय 8.5 घंटे से घटकर लगभग 5 घंटे रह जाएगा.
इसके अलावा प्रधानमंत्री एनएच-306 पर एलिवेटेड कॉरिडोर का भी भूमि पूजन करेंगे, जिससे सिलचर शहर की सबसे व्यस्त सड़कों में ट्रैफिक कम होगा और मिजोरम, त्रिपुरा और मणिपुर जैसे राज्यों से संपर्क बेहतर होगा.
प्रधानमंत्री करीमगंज जिले के पथारकंडी में नए कृषि महाविद्यालय की भी आधारशिला रखेंगे. इससे असम में कृषि शिक्षा और अनुसंधान को नई ताकत मिलेगी और बराक घाटी के छात्रों को अपने क्षेत्र में ही उच्च गुणवत्ता की पढ़ाई का मौका मिलेगा.
प्रधानमंत्री के इस दो दिवसीय दौरे को पूर्वोत्तर भारत के विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सड़क, रेल, ऊर्जा, कृषि, पर्यटन और उद्योग से जुड़ी ये परियोजनाएं असम और पूरे पूर्वोत्तर भारत क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदलने की क्षमता रखती हैं.
असम चुनाव से पहले विकास की दिशा में बड़ा कदम
हाल के वर्षों में केंद्र सरकार लगातार ब्रह्मपुत्र पर पुल, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा संस्थान और परिवहन परियोजनाओं के जरिए क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश कर रही है. इन पहलों का उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों के साथ बेहतर तरीके से जोड़ना और इसे दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए व्यापारिक गेटवे के रूप में विकसित करना भी है.
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, चुनावी वर्ष में ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स का संदेश यह होता है कि सरकार विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश करना चाहती है. इससे मतदाताओं के बीच यह धारणा मजबूत करने की कोशिश होती है कि राज्य में निवेश और विकास की गति तेज हुई है.
कामाख्या रोपवे, हाई-स्पीड कॉरिडोर, गैस ग्रिड और सड़क-रेल परियोजनाओं जैसी योजनाओं को सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर भारत में आर्थिक विकास, पर्यटन, व्यापार और राजनीतिक संदेश के मिश्रण के रूप में देखा जा रहा है. ऐसे में अगर ये परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं, तो इससे असम ही नहीं बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों में बड़ा बदलाव आ सकता है.













