झारखंड : क्षतिपूर्ति अवकाश फिर से लागू होने पर पुलिस कर्मी खुश, सीएम हेमंत सोरेन के घर पहुंचकर मनाया जश्न

हेमंत सोरेन ने बीजेपी को निशाना बनाते हुए कहा- संवैधानिक संस्थानों को तो खरीद लोगे, जनसमर्थन कैसे खरीद पाओगे? झारखंड के हमारे हजारों मेहनती पुलिस कर्मियों का यह स्नेह और यहां की जनता का समर्थन ही मेरी ताकत है

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झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास में जश्न मनाते हुए पुलिस कर्मी.
रांची:

झारखंड (Jharkhand) के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने कहा कि राज्य के पुलिस कर्मियों का उत्साह देखते बन रहा है. आज होली नहीं है, फिर भी हमारे पुलिसकर्मी भाइयों ने सड़कों पर होली जैसा माहौल बना दिया है. मुख्यमंत्री ने यह बातें रांची में मुख्यमंत्री आवास में आए झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन (Jharkhand Police Mens Association) के पुलिसकर्मियों से कही. 

पुलिस मेंस एसोसिएशन ने आज राज्य में क्षतिपूर्ति अवकाश को पूर्व की भांति लागू करने के लिए पुलिस कर्मियों की ओर से मुख्यमंत्री को धन्यवाद ज्ञापित किया. बैंड बाजे के साथ मुख्यमंत्री आवास पहुंची पुलिस मेंस एसोसिएशन की टीम ने मुख्यमंत्री को मिठाई खिलाकर एवं रंग गुलाल उड़ाकर अपनी खुशी जाहिर की.

मुख्यमंत्री सोरेन ने इस अवसर का का एक वीडियो ट्वीट किया. उन्होंने केंद्र सरकार और बीजेपी पर प्रहार करते हुए लिखा- ''संवैधानिक संस्थानों को तो खरीद लोगे, जनसमर्थन कैसे खरीद पाओगे? झारखंड के हमारे हजारों मेहनती पुलिस कर्मियों का यह स्नेह और यहां की जनता का समर्थन ही मेरी ताकत है. हैं तैयार हम! जय झारखण्ड!''  

हेमंत सोरेन से जुड़े खनन पट्टा मामले में आज चुनाव आयोग ने झारखंड के राज्यपाल को अपनी राय भेजी है. आयोग ने झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस को उस याचिका पर अपनी राय भेजी है, जिसमें दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक खनन पट्टे का विस्तार अपने लिए करके चुनावी कानून का उल्लंघन किया है. याचिका में सोरेन को एक विधायक के तौर पर अयोग्य घोषित किए जाने की मांग की गई है. 

सूत्रों के अनुसार आयोग ने अपनी राय आज सुबह सीलबंद लिफाफे में झारखंड के राजभवन को भेज दी. झारखंड के राज्यपाल ने इस मामले को आयोग को भेजा था. मामले में याचिकाकर्ता भारतीय जनता पार्टी (BJP) है जिसने जन प्रतिनिधि कानून की धारा 9-ए का उल्लंघन करने के लिए सोरेन को अयोग्य ठहराने की मांग की है.

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संविधान के अनुच्छेद 192 के तहत, किसी राज्य के विधानमंडल के किसी सदन के किसी सदस्य की अयोग्यता से संबंधित कोई मामला आता है तो इसे राज्यपाल के पास भेजा जाएगा और उनका फैसला अंतिम होगा. उसमें कहा गया है, “ऐसे किसी भी मामले पर कोई निर्णय देने से पहले राज्यपाल चुनाव आयोग की राय लेंगे और उस राय के अनुसार कार्य करेंगे.” ऐसे मामलों में चुनाव आयोग की भूमिका अर्द्धन्यायिक निकाय की तरह होती है.

उधर, झारखंड अवैध खनन मामले में ईडी ने एक बिचौलिए प्रेम प्रकाश को गिरफ्तार किया है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अवैध खनन मामले को लेकर मनी लॉन्डरिंग की जांच के संबंध में प्रेम प्रकाश नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया है. प्रकाश को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की आपराधिक धाराओं के तहत बुधवार को देर रात करीब दो बजे हिरासत में लिया गया और उसे रांची की एक अदालत में पेश किया जाएगा. 

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इस मामले में यह तीसरी गिरफ्तारी है. इससे पहले, ईडी ने इस मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के राजनीतिक सहयोगी पंकज मिश्रा और मिश्रा के सहयोगी एवं बाहुबली बच्चू यादव को गिरफ्तार किया था.

ईडी ने इस मामले की जांच के लिए बुधवार को रांची में स्थित प्रेम प्रकाश के परिसरों समेत झारखंड, बिहार, तमिलनाडु और दिल्ली- एनसीआर में कुछ स्थानों पर छापेमारी की और दो एके-47 राइफल तथा 60 कारतूस बरामद किए. बरामद हथियार झारखंड के दो पुलिस कांस्टेबलों के थे जिन्हें बाद में निलंबित कर दिया गया.

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