- झारखंड के धुर्वा के जगन्नाथपुर में लापता हुए अंश और अंशिका सकुशल वापस अपने घर लौट आए हैं
- दोनों बच्चों को रामगढ़ जिले के स्थानीय युवकों की सजगता से खोजकर परिवार के हवाले किया गया
- बच्चों के घर वापस लौटने से परिवार और गांव में खुशी का माहौल है. लोगों ने एक दूसरे को गुलाल लगाया.
झारखंड के धुर्वा के जगन्नाथपुर में 12 पहले किडनैप हुए अंश और अंशिका के सकुशल वापस लौटने से सिर्फ परिवार में ही नहीं बल्कि पूरे गांव में खुशी का माहौल है. मानो फागुन से पहले ही यहां होली आ गई है. बच्चों के वापस लौटने की खुशी में गांव के लोग क दूसरे को अबीर-गुलाल मनाकर खुशी मना रहे और बधाई दे रहे हैं. जगन्नाथपुर में जश्न का माहौल है. अंश और अंशिका के घर के बाहर लोग खुशी से झूम रहे हैं. हो भी क्यों ना, आखिरकार लंबे इंतजार के बाद बच्चे घर वापस जो आ गए हैं. इस पल ने पूरे इलाके को भावुक कर दिया है.
सचिन-डब्लू की मुस्तैदी से मिले लापता बच्चे
बता दें कि दोनों बच्चे 2 जनवरी को लापता हुए थे. उनको ढूंढना झारखंड पुलिस के चुनौती बना हुआ था. रांची पुलिस के साथ ही कई राज्यों की पुलिस दोनों मासूमों की तलाश में जुटी थी. लेकिन कुछ भी पता नहीं चल पा रहा था. दोनों बच्चे रामगढ़ जिले के रजरप्पा थाना क्षेत्र के अहमद नगर में मिले. यहां के स्थानीय युवकों की सजगता की वजह से बच्चे अपने घर सकुशल पहुंच सके. जो कई राज्यों की पुलिस नहीं कर सकी वह दोनों युवकों ने कर दिखाया.
अंश-अंशिका के परिवार में जश्न का माहौल
अंश-अंशिका का परिवार दोनों युवकों को धन्यवाद देते नहीं थक रहा है. दरअसल सचिन और डब्लू ने एक महिला और पुरुष के साथ दो मासूम बच्चों को देखा था. उनकी गतिविधियां उन्हें संदिग्ध लगीं. बिना देर किए उन्होंने बच्चों की तस्वीर ली और सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दीं. वायरल लापता पोस्टर और बैनरों से मिलान करने पर पुष्टि होते ही उन्होंने सीधे उनके परिजनों से संपर्क किया और तुरंत रजरप्पा पुलिस को भी मामले की सूचना दी. बच्चों के परिवार में जश्न का माहौल है.
बच्चों को पकड़ने वाले भी पकड़े गए
मामले की खबर मिलते ही रजरप्पा थाना पुलिस महज 10 मिनट के भीतर टीम के साथ मौके पर पहुंची और दोनों मासूम बच्चों अंश और अंशिका को सकुशल बरामद कर लिया. इन बच्चों की बरामदगी के साथ एक ही आरोपी महिला और पुरुष को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया. बाद में उनको गिरफ्तार कर पूछताछ के लिए रामगढ़ एसपी कार्यालय भेज दिया गया.
बच्चों को ढूंढ रही थी 17000 थानों की पुलिस
बता दें कि बिहार, बंगाल समेत देश के 18 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अंश-अंशिका की तलाश के लिए कई राज्यों में एसआईटी की टीम ने छापेमारी की थी. देश की 17000 थानों की पुलिस को इसकी सूचना भेजी गयी थी. सीआईडी एडीजी मनोज कौशिक ने ह्यू एंड क्राइ नोटिस (शोर शराबा नोटिस) जारी किया था . इस नोटिस के तहत देश के दूसरे राज्यों की पुलिस की किसी मामले के जांच अभियान में सहायता ली जाती है. बचपन बचाओ आंदोलन व अन्य संगठनों के सदस्य देशभर के 439 जिलों में बच्चों की तलाश में जुटे थे. देश भर के सभी लीगल वॉलिंटियर्स भी अंश-अंशिका का पता लगाने के लिए सक्रिय हो गये थे. बच्चों की तलाश में SIT, झालसा, बचपन बचाओ आंदोलन और कई राज्यों की पुलिस जुटी थी.
घटना से गुस्से में थे स्थानीय लोग, जुलूस निकाले
इस घटना से लोगों में जबरदस्त आक्रोश था. 11 दिनों बीत जाने के बाद भी बच्चों का कोई सुराग नहीं मिलने की वजह से परिवार और बस्ती में पुलिस के प्रति जबरदस्त आक्रोश था. लोगों ने कहा था कि अगर पुलिस ने सही समय पर बच्चों की तलाश शुरू की होती तो ऐसी स्थिति नहीं बनती. लोगों ने इसको लेकर मशाल जुलुस निकाले, बंद बुलाया. वहीं हर दिन वहां पर नेताओं का जमावड़ा लगा रहता था.














