कैबिनेट विस्तार की तैयारी या कुछ और... दिल्ली में अमित शाह से मिले जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा

सूत्रों के अनुसार जेडीयू संभावित कैबिनेट विस्तार के जरिए जातीय, सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की रणनीति पर काम कर रही है. वर्तमान कैबिनेट में राजपूत, दलित, भूमिहार और कुशवाहा-कुर्मी समाज को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिला हुआ है.

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अमित शाह से मिले संजय झा
NDTV
नई दिल्ली:

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा जैसे ही दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिले वैसे ही तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं. राजनीति के जानकार इस बैठक को नीतीश सरकार में अगले कुछ दिनों में होने वाले संभावित कैबिनेट विस्तार से जोड़कर देख रहें हैं तो कुछ लोग इसे भविष्य की संभावनाओं को लेकर एक शिष्टाचार भेंट बता रहे हैं. सूत्रों के अनुसार नीतीश कैबिनेट का विस्तार इसी महीने हो सकता है. अमित शाह से मुलाकात की जानकारी खुद संजय झा ने सोशल मीडिया पोस्ट करके दी है. 

संजय झा ने इस पोस्ट में लिखा है कि आज दिल्ली में गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह जी से शिष्टाचार भेंट कर देशहित एवं बिहार से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा का अवसर मिला. इस मुलाकात के बाद अब बिहार में कैबिनेट विस्तार की बात को और बल मिलता दिख रहा है. वर्तमान में बिहार कैबिनेट में मुख्यमंत्री सहित कुल 26 मंत्री हैं, जबकि नियमों के अनुसार यह संख्या अधिकतम 36 तक हो सकती है. एनडीए के फॉर्मूले के तहत रिक्त 10 पदों में से 6 जेडीयू और 4 बीजेपी के कोटे में जाने की उम्मीद है.

सूत्रों के अनुसार, जेडीयू इस विस्तार के जरिए जातीय, सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की रणनीति पर काम कर रही है. वर्तमान कैबिनेट में राजपूत, दलित, भूमिहार और कुशवाहा-कुर्मी समाज को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिला हुआ है, इसलिए अब जेडीयू का फोकस उन वर्गों पर है जिन्हें जगह नहीं मिल सकी है. चर्चा है कि इस बार अति-पिछड़े, निषाद, धानुक और वैश्य समुदाय के साथ-साथ महिलाओं को भी मंत्रिपरिषद में स्थान दिया जा सकता है.जेडीयू नए चेहरों को मौका देकर आगामी चुनावों के मद्देनजर एक समावेशी राजनीतिक संदेश देने की तैयारी में है.

मंत्रिमंडल विस्तार की आवश्यकता प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वर्तमान में कई मंत्रियों पर विभागों का अतिरिक्त बोझ है. जेडीयू कोटे के बिजेंद्र प्रसाद यादव के पास 5 और विजय चौधरी के पास चार विभाग हैं. वहीं, बीजेपी के भी कई मंत्रियों के पास दो-दो विभाग हैं. इसके अतिरिक्त, नितिन नवीन के बीजेपी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद इस्तीफा देने से भी पद रिक्त हुआ है.

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