बिहार में अगर मुख्यमंत्री पद भाजपा के पास जाता है तो उसके बाद सबसे बड़ा सवाल मंत्रिमंडल में सीटों के बंटवारे और जेडीयू की भूमिका को लेकर उठेगा. यह केवल पदों का मामला नहीं होगा, बल्कि गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन का भी सवाल होगा. लंबे समय तक नीतीश कुमार मुख्यमंत्री रहे हैं, इसलिए अगर यह पद भाजपा के पास जाता है तो राज्य की राजनीति का संतुलन बदल सकता है.सबसे पहले मंत्रिमंडल में सीटों के बंटवारे की बात करें तो आमतौर पर गठबंधन सरकारों में सीटों का बंटवारा विधायकों की संख्या के आधार पर होता है. अगर भाजपा के पास विधानसभा में ज्यादा विधायक हैं तो स्वाभाविक रूप से उसे ज्यादा मंत्री पद मिलेंगे.
माना जा रहा है कि भाजपा अपने कोटे से प्रमुख विभाग जैसे गृह, वित्त, सड़क निर्माण और ऊर्जा अपने पास रखना चाहेगी. वहीं जेडीयू को भी कुछ अहम विभाग दिए जा सकते हैं ताकि गठबंधन में संतुलन बना रहे. भाजपा के साथ लोजपा (रामविलास), हम और अन्य छोटे सहयोगी दल भी मंत्री पद की मांग कर सकते हैं. ऐसे में भाजपा को संतुलन बनाते हुए सबको प्रतिनिधित्व देना होगा. सामाजिक समीकरण भी ध्यान में रखा जाएगा, जैसे पिछड़ा वर्ग, दलित, अति पिछड़ा और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व.
जेडीयू के सामने असली चुनौती
जेडीयू के सामने असली चुनौती होगी. पिछले लगभग दो दशकों से बिहार की राजनीति में जेडीयू की पहचान मुख्यमंत्री की पार्टी के रूप में रही है. अगर मुख्यमंत्री पद भाजपा के पास चला जाता है तो जेडीयू के लिए अपनी राजनीतिक पहचान और दबदबा बनाए रखना आसान नहीं होगा. पार्टी को यह साबित करना होगा कि वह सिर्फ गठबंधन की सहयोगी नहीं बल्कि बिहार की राजनीति में स्वतंत्र ताकत भी है.
जदयू को भाजपा से तालमेल बनाए रखना होगा
जेडीयू के सामने दोहरी चुनौती होगी. एक तरफ उसे भाजपा के साथ तालमेल बनाए रखना होगा, वहीं दूसरी तरफ अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को यह भरोसा दिलाना होगा कि पार्टी अभी भी मजबूत है. अगर जेडीयू के पास मुख्यमंत्री पद नहीं रहेगा, तो संगठन और सरकार में उसकी पकड़ कम होने का खतरा भी रहेगा.
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बीजेपी पर प्रशासनिक बड़ी जिम्मेदारी
भाजपा के लिए भी यह स्थिति पूरी तरह आसान नहीं होगी. मुख्यमंत्री पद मिलने के बाद भाजपा पर राज्य की पूरी प्रशासनिक जिम्मेदारी होगी. अगर सरकार का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा तो उसका राजनीतिक नुकसान भी भाजपा को ही उठाना पड़ेगा। इसलिए भाजपा भी चाहेगी कि जेडीयू गठबंधन में मजबूती से बना रहे.
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बिहार की सियासी समीकरण बदलेगा
कुल मिलाकर अगर मुख्यमंत्री पद भाजपा के पास जाता है तो बिहार की राजनीति का समीकरण बदल जाएगा. मंत्रिमंडल के बंटवारे से लेकर राजनीतिक संतुलन तक हर कदम बहुत सोच-समझकर उठाना होगा. जेडीयू के लिए यह समय अपनी राजनीतिक जमीन बचाने और नई भूमिका तय करने का होगा, जबकि भाजपा के लिए यह मौका होगा कि वह पहली बार पूरी ताकत के साथ बिहार की सत्ता का नेतृत्व करे.














