बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग को लेकर जेडीयू में हलचल मच गई है. पार्टी के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर यह मांग की थी. लेकिन जेडीयू ने इस पर आधिकारिक तौर पर दूरी बना ली है.
पार्टी प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा, 'यह त्यागी जी का निजी बयान है. पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं है.' उन्होंने यह भी जोड़ा कि 'त्यागी जी का जेडीयू के मामलों से अधिक संबंध नहीं है. वे पार्टी में हैं भी या नहीं, यह कार्यकर्ताओं को नहीं पता है.'
त्यागी की चिट्ठी से खड़ा हुआ विवाद
केसी त्यागी ने अपने पत्र में लिखा था कि जैसे पिछले साल चौधरी चरण सिंह और कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न दिया गया था, उसी तरह नीतीश कुमार भी इस सम्मान के हकदार हैं. उन्होंने NDTV से बातचीत में कहा, 'बिहार और देश के प्रति नीतीश कुमार की सेवाओं को सम्मान देने का इससे अच्छा कदम नहीं हो सकता.'
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त्यागी ने यह भी तर्क दिया कि जीवित व्यक्ति को भारत रत्न देने के कई उदाहरण हैं. जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, लता मंगेशकर और प्रणब मुखर्जी को यह सम्मान मिला है.
10वीं बार सीएम बने हैं नीतीश कुमार
नीतीश कुमार ने पिछले साल नवंबर में दसवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. वे 2005 से लगातार मुख्यमंत्री रहे हैं, सिर्फ 10 महीनों को छोड़कर. इस तरह वे देश के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेताओं में शामिल हो गए हैं.
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त्यागी का विवादित इतिहास
राजनीतिक गलियारों में त्यागी की चिट्ठी के अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं. माना जा रहा है कि यह कदम डैमेज कंट्रोल के लिए उठाया गया है. दरअसल, त्यागी हाल ही में कई विवादों में रहे हैं. उन्होंने आईपीएल में बांग्लादेशी खिलाड़ी को हटाने के फैसले का विरोध किया था. इसके अलावा, 2024 में फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत सरकार से अलग स्टैंड लिया था. इन विवादों के चलते उन्हें सितंबर 2024 में राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा देना पड़ा था.
पार्टी की नाराजगी
जेडीयू सूत्रों ने त्यागी के हालिया बयान पर नाराज़गी जताई है. उनका कहना है कि पार्टी का इस मामले पर कोई स्टैंड नहीं है.














