भारत में ‘स्टूडेंट लोन वुल्फ’ नेटवर्क बनाने की साजिश! जैश-ए-मोहम्मद का नया प्लान हुआ एक्सपोज

जैश-ए-मोहम्मद भारत में स्कूलों और कॉलेजों में घुसपैठ कर छात्रों को धीरे-धीरे कट्टरपंथी बनाकर लोन-वुल्फ नेटवर्क तैयार करने की कोशिश में है. महाराष्ट्र ATS ने मुंबई से एक छात्र को गिरफ्तार कर यह साजिश नाकाम की है.

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  • जैश-ए-मोहम्मद संगठन भारत के स्कूल और कॉलेजों में घुसपैठ कर युवाओं को कट्टरपंथ की ओर ले जा रहा है.
  • फरीदाबाद मॉड्यूल केस में जैश ने मेडिकल संस्थान तक अपनी पैठ बना कर दिल्ली-एनसीआर में हमलों की योजना बनाई थी.
  • मुंबई से एक छात्र को गिरफ्तार किया गया जो युवाओं को भर्ती कर आतंकी ट्रेनिंग के लिए भेजने की साजिश रच रहा था.
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भारत में आतंकी संगठन Jaish-e-Mohammad (JeM) अब छात्रों के बीच अपना नेटवर्क बनाने की साजिश रच रहा है. खुफिया एजेंसियों को इनपुट मिला है कि संगठन स्कूल और कॉलेजों में घुसपैठ कर युवाओं को कट्टरपंथी बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि आने वाले वर्षों में ‘लोन वुल्फ' आतंकियों की एक नई फौज तैयार की जा सके.

दरअसल हाल ही में सामने आए फरीदाबाद मॉड्यूल केस की जांच के दौरान यह खुलासा हुआ था कि जैश ने एक मेडिकल इंस्टीट्यूट तक में अपनी पैठ बना ली थी. इस तथाकथित ‘व्हाइट कॉलर मॉड्यूल' में डॉक्टरों को भी शामिल किया गया था. जांच में यह भी सामने आया कि मॉड्यूल ने करीब 2500 किलो अमोनियम नाइट्रेट जुटा लिया था और दिल्ली-एनसीआर में कई हमलों की योजना बना रहा था.

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छात्रों को निशाना बना रहा आतंकी संगठन

खुफिया एजेंसियों के मुताबिक जैश अब लंबी रणनीति के तहत स्कूल और कॉलेज के छात्रों को निशाना बना रहा है. संगठन अपने प्रचार कंटेंट के जरिए कुछ युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलता है, और फिर वही युवक अपने दोस्तों और परिचितों के बीच इस विचारधारा को फैलाने लगते हैं.

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अधिकारियों के अनुसार यह रणनीति पहले पाकिस्तान में Lashkar-e-Taiba और जैश दोनों अपनाते रहे हैं और अब भारत में भी इसे लागू करने की कोशिश हो रही है.

एजेंसियों का कहना है कि कम उम्र में कट्टरपंथी बनाए गए छात्र जब 20–25 साल के होते हैं, तब तक वे पूरी तरह ब्रेनवॉश हो चुके होते हैं और आतंकी हमलों के लिए तैयार हो जाते हैं.

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मुंबई से छात्र की गिरफ्तारी

इसी सिलसिले में इस हफ्ते Maharashtra Anti Terrorism Squad (ATS) ने मुंबई से अयान शेख नाम के एक छात्र को गिरफ्तार किया है. जांच में सामने आया कि वह पिछले छह महीनों से कई युवाओं के संपर्क में था और उन्हें जैश के लिए भर्ती करने की कोशिश कर रहा था.

जांच एजेंसियों के मुताबिक उसने दो छात्रों को कट्टरपंथी बनाने में कामयाबी भी हासिल कर ली थी और उन्हें आतंकी ट्रेनिंग के लिए देश से बाहर भेजने की योजना बनाई थी. हालांकि ATS ने समय रहते इस साजिश को नाकाम कर दिया.

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‘लोन वुल्फ' मॉडल पर काम

खुफिया अधिकारियों के अनुसार जैश की नई रणनीति बड़े मॉड्यूल बनाने की नहीं है. संगठन चाहता है कि युवा अकेले या दो-दो के छोटे समूह में काम करें, ताकि सुरक्षा एजेंसियों के लिए उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाए.

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फरीदाबाद मॉड्यूल के उजागर होने के बाद संगठन को एहसास हुआ कि बड़े नेटवर्क जल्दी पकड़ में आ जाते हैं. इसलिए अब वह ‘लोन वुल्फ' मॉडल को बढ़ावा दे रहा है, जिसमें हमलावर अकेले ही टारगेट चुनकर हमला करता है या फिर किसी हैंडलर के निर्देश पर कार्रवाई करता है.

एजेंसियों की चिंता क्यों बढ़ी

खुफिया एजेंसियों का कहना है कि यह रणनीति बेहद खतरनाक हो सकती है. अगर आतंकी संगठन कई सालों तक युवाओं को धीरे-धीरे कट्टरपंथी बनाने में सफल हो जाता है, तो भविष्य में देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे हमलावर तैयार हो सकते हैं जिन्हें पहचानना मुश्किल होगा.

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अधिकारियों के मुताबिक यदि किसी युवक को 3-5 साल तक लगातार कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित किया जाए, तो उसके विचार बदलना बेहद मुश्किल हो जाता है. इसलिए इस तरह के नेटवर्क को शुरुआती चरण में ही तोड़ना बेहद जरूरी है.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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