मांझे से हुआ जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर धमाका, जानें इसमें ऐसा क्या कि बिजली के तार छूते ही दौड़ता है करंट

दिल्ली के जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर गुरुवार शाम हुए धमाके के लिए पुलिस ने पतंग के मांझे को जिम्मेदार बताया है और कहा है कि मेट्रो की पावर केबल में मांझा उलझ गया था, जिसकी वजह से हल्का ब्लास्ट हुआ और आग लग गई.

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  • दिल्ली के जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर गुरुवार शाम धमाके की आवाज सुने जाने से हड़कंप मच गया
  • पुलिस के मुताबिक, पतंग का मांझा मेट्रो के तारों में उलझने से हल्का धमाका हुआ था और आग लग गई थी
  • मांझे में मेटल-कांच की कोटिंग होने या इसके गीला होने से इसमें बिजली का करंट दौड़ने लगता है
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दिल्ली के जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर धमाके की आवाज सुने जाने से अफरातफरी फैल गई. पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद इस धमाके के लिए चाइनीज मांझे को जिम्मेदार बताया. डीसीपी मेट्रो के मुताबिक, कुछ बच्चे इलाके में पतंग उड़ा रहे थे, जिसका मांझा मेट्रो की पावर केबल में उलझ गया था. जिसकी वजह से हल्का ब्लास्ट हुआ और आग लग गई. सवाल ये है कि मांझे में ऐसा क्या होता है, जिसकी वजह से बिजली के तारों में शॉर्ट सर्किट हुआ. आइए बताते हैं. 

जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर हुआ क्या था?

पहले जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर हुई घटना के बारे में जान लीजिए. गुरुवार शाम करीब 6 बजे का वक्त था. पुलिस को सूचना मिली कि जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर धमाके जैसी आवाज सुनी गई है. ये आवाज बुराड़ी की तरफ जाने वाली मेट्रो लाइन से आई थी. इससे मेट्रो स्टेशन पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया. 

मेट्रो की सुरक्षा में लगी सीआईएसएफ और पुलिस तुरंत मौके पर पहुंच गई. डीसीपी मेट्रो ने बताया कि मेट्रो की पावर केबल्स में माइनर ब्लास्ट हुआ था और आग लग गई थी. एहतियातन सभी यात्रियों को सुरक्षित तरीके से निकाल लिया गया. किसी को भी चोट लगने आदि की सूचना नहीं है. 

पुलिस ने धमाके की क्या वजह बताई?

डीसीपी मेट्रो ने शुरुआती जांच के बाद बताया कि ये धमाका मेट्रो की पावर केबल्स में चाइनीज मांझा उलझने की वजह से हुआ था. दो पावर केबल्स में मांझा फंस गया था, जिससे शॉर्ट सर्किट हुआ और हल्का धमाका होकर आग लग गई. बता दें कि पतंग के मांझे में कोई विस्फोटक वगैरा नहीं होता, लेकिन कभी-कभी ये बिजली के हाई वोल्टेज तारों के संपर्क में आकर खतरनाक हो सकता है. 

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मांझे में क्यों दौड़ता है करंट?

इसकी वजह ये है कि मांझे खासकर चाइनीज मांझे में डोरी के ऊपर मैटेलिक पाउडर और बारीक कांच की कोटिंग की जाती है. धातु की परत चढ़ी होने के कारण मांझा बिजली के लिए कंडक्टर (सुचालक) की तरह काम करने लगता है. यानी इसमें से होकर बिजली का करंट दौड़ सकता है. मेट्रो की ओवरहेड पावर केबल्स में 25 हजार वोल्ट तक का करंट दौड़ता है. ऐसे में मेटलिक मांझे के दोनों तारों से टच होने पर शॉर्ट सर्किट हो जाता है. 

गीला मांझा भी दे सकता है बिजली का झटका

इसके अलावा साधारण सूती मांझा भी अगर गीला हो तो बिजली के संपर्क में आने पर उसमें भी करंट आ सकता है. नमी मांझे को बिजली का सुचालक बना देती है. ऐसे मांझे अगर बिजली के अलग-अलग फेज की लाइनों से एकसाथ टच होते हैं तो शॉर्ट सर्किट कर सकते हैं. कई बार बिजली के तारों से छूने पर पतंग उड़ाने वालों को करंट लगने की भी खबरें आई हैं.

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पतंग उड़ाने वाले को भी लग सकता है करंट

मेटल की कोटिंग वाले या गीले मांझे कई बार खतरनाक भी साबित हो सकते हैं. मेटल और कांच की परत चढ़ा मांझा बहुत धारदार हो जाता है. इससे अक्सर लोगों के गले कटने और यहां तक की मौतों की भी खबरें आती हैं. यही वजह है कि सरकार ने चाइनीज मांझे को बैन कर रखा है. मेट्रो स्टेशन के आसपास पतंग उड़ाने की भी मनाही रहती है. ये मांझे इतने खतरनाक है कि बिजली के संपर्क में आने पर पतंग उड़ाने वाले को भी करंट का झटका दे सकते हैं. 

देखें- दिल्ली के जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के पास धमाके जैसी आवाज, मची अफरा-तफरी

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