ग्रंथों और परंपराओं के ज्ञान की समीक्षा जरूरी : आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत

नागपुर में सरसंघचालक ने कहा कि जीवन को संतुलन देने वाला धर्म है. हमारा धर्म विज्ञान के अनुसार चलता है. विज्ञान को मनुष्य के लिए लाभकारी होने के लिए धर्म की आवश्यकता है.

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हिंदू धर्म को लेकर बड़ी बात कही है.
नई दिल्ली:

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हिंदू धर्म को लेकर बड़ी बात कही है. उन्होंने ग्रंथों और परंपराओं की समीक्षा की बात कही है. सरसंघचालक ने कहा कि हिंदू धर्म विज्ञान के अनुसार चलता है. विज्ञान में अब तक हुए अन्वेषण में हमारे पूर्वजों का किया कुछ न कुछ है. हालांकि, वह मौखिक परंपरा से चलकर आया. बाद में कुछ स्वार्थी लोगों ने ग्रंथों में कुछ-कुछ घुसाया, जो बिल्कुल गलत है.

नागपुर में सरसंघचालक ने कहा कि जीवन को संतुलन देने वाला धर्म है. हमारा धर्म विज्ञान के अनुसार चलता है. विज्ञान को मनुष्य के लिए लाभकारी होने के लिए धर्म की आवश्यकता है. इसलिए यह विज्ञान सामने लाने की जरूरत है. हमारी परंपराओं में, हर विषय में दुनिया के अन्वेषण में हमारे पूर्वजों का किया कुछ न कुछ है. वह मौखिक परंपरा से चलकर आया. बाद में ग्रंथों में आया. हमारे यहां पहले ग्रंथ नहीं थे, मौखिक परंपरा से चलता आ रहा था. बाद में ग्रंथ इधर-उधर हो गए और कुछ स्वार्थी लोगों ने ग्रंथ में कुछ-कुछ घुसाया, जो बिल्कुल गलत है. उन ग्रंथों, परंपराओं के ज्ञान की फिर एक बार समीक्षा जरूरी है...समीक्षा के बाद जो कसौटी पर टिकेगा फिर वह विज्ञान और धर्म है. यह सभी के लिए लाभकारी होगा.

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