- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की PSLV-C62 रॉकेट मिशन 12 जनवरी को श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा.
- इस मिशन में DRDO द्वारा विकसित EOS-N1 उपग्रह 'अन्वेषा' को भी अंतरिक्ष में स्थापित किया जाएगा.
- अन्वेषा हाइपरस्पेक्ट्रलइमेजिंग सैटेलाइट है, जिससे भारत की डिफेंस सेक्टर में निगरानी और मजबूत हो जाएगी.
ISRO PSLV C62 launching: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की साल 2026 की पहली लॉन्चिंग सोमवार 12 जनवरी को सतीश धवन स्पेस स्टेशन श्रीहरिकोटा से होना है. इस लॉन्चिंग के साथ ही इसरो अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक और बड़ी छलांग लगाएगा. PSLV रॉकेट C-62 मिशन की लॉन्चिंग के जरिए भारत DRDO द्वारा डेवलप किया गया एक ऐसा सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजेगा, जिसकी 'दिव्य दृष्टि' से न चीन की चाल छिपेगी और ना ही पाकिस्तान के आतंकी. दुश्मन के बंकर हो या जंगलों में झाड़ियों के पीछे छिपने आतंकियों का सेफहाउस, 600 किमी की ऊंचाई से यह सैटेलाइट सब कुछ कैद कर लेगा.
अन्वेषा से चीन की चाल और पाक के आतंकी भी नहीं बचेंगे
DRDO द्वारा विकसित इस सैटेलाइट का नाम EOS-N1 (अन्वेषा) है. जिसे 'दिव्य दृष्टि' या हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट के रूप में जाना जाता है. यह सैटेलाइट न केवल पर्यावरण निगरानी में नई क्रांति लाएगा, बल्कि रक्षा क्षेत्र में भी भारत की क्षमताओं को और अधिक मजबूत करेगा. इससे पाकिस्तान के आतंकवादियों की छिपने की कोशिशें और चीन की सीमा पर चालें भी बेनकाब हो सकेंगी.
इसरो के एक अधिकारी के अनुसार, इस मिशन का मुख्य पेलोड ‘ईओएस-एन1' है, जो रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन द्वारा रणनीतिक उद्देश्यों के लिए निर्मित एक इमेजिंग उपग्रह है.
अन्वेषा की लॉन्चिंग इस मिशन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि
जानकारों का कहना है कि DRDO द्वारा विकसित अन्वेषा उपग्रह इस मिशन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि है. जो उन्नत इमेजिंग क्षमताओं से लैस यह उपग्रह भारत के निगरानी ढांचे को मजबूत करेगा. साथ ही रक्षा और रणनीतिक योजना के लिए वास्तविक समय की खुफिया जानकारी प्रदान करेगा. भू-राजनीतिक तनाव के इस दौर में, यह संपत्ति भारत की प्रतिरोधक क्षमता को और भी मजबूत करेगी.
14 अन्य सैटेलाइट को किया जाएगा लॉन्च
PSLV रॉकेट C-62 मिशन की लॉन्चिंग के लिए रविवार को साढ़े बाईस घंटे की उल्टी गिनती शुरू की गई. इस साल के पहले मिशन के जरिए पृथ्वी अवलोकन उपग्रह के साथ-साथ 14 अन्य सह उपग्रहों को कक्षा में स्थापित किया जाएगा. इसरो की वाणिज्यिक शाखा, न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के लिए भेजे जा रहे इस मिशन में 14 घरेलू और विदेशी उपग्रहों को कक्ष में स्थापित किया जाएगा.
260 टन वजनी PSLV-C62 रॉकेट की लॉन्चिंग, जानें- बड़ी बातें
- इसरो ने बताया कि 260 टन के भार वाले PSLV-C62 रॉकेट की लॉन्चिंग सोमवार को सुबह 10.18 बजे किया जाएगा. इसरो ने बताया, ‘‘काउंट डाउन 12.48 बजे शुरू हुई, जो कुल अवधि 22 घंटे 30 मिनट है. लॉन्चिंग सोमवार को सुबह 10.18 बजे होगा.''
- PSLV-C62/EOS-N1 मिशन सबसे पहले थाईलैंड और ब्रिटेन द्वारा निर्मित पृथ्वी अवलोकन उपग्रह को कक्षा में स्थापित करेगा, जिसके बाद प्रक्षेपण के लगभग 17 मिनट बाद 13 अन्य उपग्रहों को सूर्य-समकालिक कक्षा में स्थापित किया जाएगा.
- इसके बाद, रॉकेट के चौथे चरण (पीएस4) के अलग होने और स्पेनिश स्टार्टअप से संबंधित लगभग 25 किलोग्राम वजनी केस्ट्रेल इनिशियल टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर (केआईडी) कैप्सूल स्थापित होगा. ऐसा प्रक्षेपण के दो घंटे से अधिक समय बाद होने की उम्मीद है.
- इसरो के मुताबिक, वैज्ञानिक रॉकेट के चौथे चरण को फिर से प्रणोदित करेंगे, ताकि केआईडी कैप्सूल को पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश करते हुए प्रदर्शित किया जा सके.
ISRO ने PSLV के जरिए अब तक पूरे किए 63 मिशन
इसरो ने बताया कि पीएस4 चरण और केआईडी कैप्सूल (जो अंतिम सह-उपग्रह होगा) दोनों पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश करेंगे और दक्षिण प्रशांत महासागर में उतरेंगे. भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने पीएसएलवी के जरिये अबतक 63 मिशन को पूरा किया है, जिनमें महत्वाकांक्षी चंद्रयान-1, मंगलयान और आदित्य-एल1 मिशन शामिल हैं.













